ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) को लेकर भागीदार देशों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। इटली के रक्षा मंत्री ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) पर इस त्रिपक्षीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम में अपनी अत्याधुनिक तकनीक साझा नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ब्रिटिश सरकार की इस कथित गोपनीयता को “पागलपन” करार दिया है।
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने चेतावनी दी कि जब तक यूके इस छठी पीढ़ी के जेट कार्यक्रम पर अपने इतालवी और जापानी भागीदारों के साथ शीर्ष तकनीक साझा करने से परहेज करता है, तब तक दुनिया भर के प्रतिद्वंद्वियों को फायदा पहुंचने का खतरा है। उन्होंने एक बयान में कहा, “यह रूसियों और चीनियों के लिए एक बहुत बड़ा तोहफा है।”
यह दूसरी बार है जब क्रोसेटो ने GCAP में तकनीक साझा करने में आनाकानी के लिए विशेष रूप से यूके की आलोचना की है। इससे पहले भी उन्होंने यूके पर “स्वार्थ की बाधाओं” को बनाए रखने का आरोप लगाया था। इन बयानों ने इस महत्वपूर्ण रक्षा परियोजना में भागीदारों के बीच संभावित दरार को उजागर कर दिया है।
इटली के रक्षा मंत्री का यूके पर गंभीर आरोप
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा है कि सहयोगी देशों के साथ तकनीक साझा न करना “पागलपन” है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यूके अपने सहयोगियों के साथ महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी साझा करने को तैयार नहीं है। क्रोसेटो के अनुसार, यह रवैया न केवल कार्यक्रम की भावना के खिलाफ है, बल्कि यह रूस और चीन जैसे वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को रणनीतिक लाभ भी पहुंचाता है।
पहले भी जताई थी नाराजगी
यह पहली बार नहीं है जब इतालवी रक्षा मंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। इसी साल अप्रैल में उन्होंने कहा था कि यूके को “स्वार्थ की बाधाओं” को खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने उस समय कहा था, “इटली ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है, जापान ने भी लगभग पूरी तरह से। मुझे लगता है कि यूके ऐसा करने में बहुत अधिक अनिच्छुक है, और यह एक गलती है क्योंकि स्वार्थ राष्ट्रों का सबसे बड़ा दुश्मन है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका मन बदला है, तो उन्होंने कहा कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
GCAP प्रोग्राम क्या है?
ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) यूके, इटली और जापान के बीच एक महत्वाकांक्षी संयुक्त परियोजना है। इसका उद्देश्य 2035 तक एक अत्याधुनिक छठी पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान विकसित और तैनात करना है। यह विमान भागीदार देशों में मौजूदा लड़ाकू बेड़े की जगह लेगा, जैसे कि यूके और इटली में यूरोफाइटर टाइफून और जापान में मित्सुबिशी एफ-2। यह कार्यक्रम अगली पीढ़ी की हवाई युद्ध क्षमताओं को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है।
इटली की तरफ से पहल
अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए, रक्षा मंत्री क्रोसेटो ने कहा कि वह एक उदाहरण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इतालवी फर्म लियोनार्डो को, जो इस जेट में इटली के योगदान का नेतृत्व कर रही है, अपनी तकनीक साझा करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, “मैंने लियोनार्डो को अपनी तकनीक साझा करने का आदेश दिया है, देखते हैं कि दूसरे इसका पालन करते हैं या नहीं। इस तरह हम पहला कदम उठाते हैं।”
परियोजना की वर्तमान स्थिति और लागत
यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब GCAP कार्यक्रम की प्रगति सुचारू दिखाई दे रही थी, खासकर फ्रांसीसी-जर्मन-स्पेनिश FCAS लड़ाकू कार्यक्रम की तुलना में, जो काम के बंटवारे को लेकर विवादों में फंसा हुआ है। हालांकि, इस महीने एक और चुनौती सामने आई जब इटली ने घोषणा की कि जेट के डिजाइन और विकास पर उसका खर्च 2021 के 6 बिलियन यूरो के पूर्वानुमान से बढ़कर 18.6 बिलियन यूरो हो गया है, जिससे इतालवी विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है। इन मतभेदों के बावजूद, हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची साने के बीच एक बैठक में, दोनों नेताओं ने GCAP की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इटली के रक्षा मंत्री की हालिया टिप्पणियों ने इस हाई-प्रोफाइल रक्षा सहयोग में आंतरिक चुनौतियों को उजागर किया है। जबकि कार्यक्रम तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है, भागीदारों के बीच विश्वास और प्रौद्योगिकी साझाकरण जैसे प्रमुख मुद्दे इसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
FAQs
GCAP प्रोग्राम में कौन से देश शामिल हैं?
ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) में यूनाइटेड किंगडम (यूके), इटली और जापान तीन भागीदार देश हैं।
इटली के रक्षा मंत्री ने यूके पर क्या आरोप लगाया है?
इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने यूके पर संयुक्त लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए अपनी उन्नत और महत्वपूर्ण तकनीक को भागीदारों के साथ साझा नहीं करने का आरोप लगाया है।
यह लड़ाकू विमान कब तक तैयार होने की उम्मीद है?
इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2035 तक लड़ाकू विमान को विकसित करके सेवा में शामिल करना है।
इस परियोजना पर इटली की लागत कितनी बढ़ गई है?
इस परियोजना के लिए इटली का अनुमानित खर्च 2021 में 6 बिलियन यूरो से बढ़कर अब 18.6 बिलियन यूरो हो गया है।
क्या यह पहली बार है जब इटली ने यह मुद्दा उठाया है?
नहीं, इटली के रक्षा मंत्री ने इससे पहले इसी साल अप्रैल में भी तकनीक साझा करने को लेकर यूके की अनिच्छा की आलोचना की थी।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


