विकसित भारत की अवधारणा को सभी के लिए समावेशी होना चाहिए, यह कहना है द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक केशव सूरी का। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए, जिसमें विभिन्न समुदाय और पृष्ठभूमि के लोग शामिल हैं।
उनके अनुसार, जब हम एक विकसित भारत की बात करते हैं, तो इसका मतलब सभी के लिए एक विकसित राष्ट्र होना चाहिए। इसमें लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, दलित, मुस्लिम, हिंदू, दिव्यांगजन, और एसिड अटैक सर्वाइवर जैसे सभी समूह शामिल हैं। सूरी ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचा या पर्यटन कुछ चुनिंदा लोगों के लिए नहीं हो सकता, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ होना चाहिए।
इसी संदर्भ में, शहरी डिजाइन विशेषज्ञ और ओएसिस डिजाइन्स के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट आकाश हिंगोरानी ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। दिल्ली और अन्य शहरों में सार्वजनिक स्थानों के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हिंगोरानी ने कहा कि अधिकांश भारतीय शहर अभी भी सार्वजनिक स्थानों के लिए समावेशी डिजाइन की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
केशव सूरी का ‘सबके लिए विकसित भारत’ पर जोर
द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक, केशव सूरी ने कहा, “जब आप विकसित भारत की बात करते हैं, तो आपका मतलब सभी के लिए विकसित भारत है — जिसमें लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, दलित, मुस्लिम, हिंदू, दिव्यांगजन, एसिड अटैक सर्वाइवर, और भी बहुत कुछ शामिल हैं।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि समावेशी विकास के बिना कोई भी राष्ट्र सही मायनों में विकसित नहीं हो सकता। सूरी के अनुसार, “आप कुछ लोगों के लिए बुनियादी ढांचा या पर्यटन विकसित नहीं कर सकते, यह सभी के लिए होना चाहिए।”
सार्वजनिक स्थानों में समावेशी डिजाइन की कमी
ओएसिस डिजाइन्स के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट आकाश हिंगोरानी ने भारतीय शहरों में सार्वजनिक स्थानों के डिजाइन को लेकर चिंता जताई है। हिंगोरानी, जिन्होंने दिल्ली व अन्य शहरों में सार्वजनिक स्थानों और कोयंबटूर में झीलों के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, का मानना है कि अधिकांश भारतीय शहर समावेशी डिजाइन की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने एक व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा, “सभी सार्वजनिक स्थान प्रैम-और-ट्रॉली-बैग के अनुकूल होने चाहिए,” जिससे यह स्पष्ट होता है कि डिजाइन को बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों सहित सभी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए।
विकसित भारत 2047: एक अवलोकन
विकसित भारत @ 2047 भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के 100वें वर्ष, यानी 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दृष्टिकोण में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन जैसे विभिन्न पहलू शामिल हैं। केशव सूरी और आकाश हिंगोरानी जैसे विशेषज्ञों की टिप्पणियां इसी व्यापक दृष्टिकोण के भीतर सामाजिक समावेश के महत्व को रेखांकित करती हैं।
समावेशी डिजाइन का महत्व
समावेशी डिजाइन, जिसे सार्वभौमिक डिजाइन भी कहा जाता है, एक ऐसी अवधारणा है जो यह सुनिश्चित करती है कि इमारतों, उत्पादों, सेवाओं और वातावरण को सभी लोगों द्वारा उनकी उम्र, क्षमता या स्थिति की परवाह किए बिना उपयोग किया जा सके। इसका उद्देश्य बाधाओं को दूर करना है जो दिव्यांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और अस्थायी रूप से अक्षम लोगों की भागीदारी को रोक सकती हैं। हिंगोरानी का प्रैम और ट्रॉली-बैग के अनुकूल स्थानों का उल्लेख इसी सिद्धांत का एक हिस्सा है, जो सभी के लिए आसान पहुंच और गतिशीलता पर जोर देता है।
उद्योग जगत के प्रमुख और शहरी नियोजन के विशेषज्ञ, दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत के विकास की कहानी में सामाजिक और ढांचागत समावेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाए।
FAQs
विकसित भारत की अवधारणा क्या है?
विकसित भारत 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने का एक दृष्टिकोण है, जिसमें आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति शामिल है।
केशव सूरी ने किन समुदायों को शामिल करने की बात कही?
केशव सूरी ने लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, दलित, मुस्लिम, हिंदू, दिव्यांगजन और एसिड अटैक सर्वाइवर सहित सभी समुदायों को विकास में शामिल करने की बात कही।
आकाश हिंगोरानी ने सार्वजनिक स्थानों के बारे में क्या चिंता व्यक्त की?
आकाश हिंगोरानी ने चिंता व्यक्त की कि अधिकांश भारतीय शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर समावेशी डिजाइन का अभाव है और वे सभी के लिए सुलभ नहीं हैं।
केशव सूरी किस संगठन से जुड़े हैं?
केशव सूरी द ललित सूरी हॉस्पिटैलिटी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक हैं।
समावेशी डिजाइन का क्या अर्थ है?
समावेशी डिजाइन का अर्थ है ऐसे स्थान और उत्पाद बनाना जो उम्र, क्षमता या अन्य कारकों की परवाह किए बिना सभी लोगों द्वारा आसानी से उपयोग किए जा सकें।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


