जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों ने उन आतंकवादियों के साथ फिर से संपर्क स्थापित कर लिया है, जो 18 जनवरी की मुठभेड़ में शामिल थे। इस मुठभेड़ में सेना का एक जवान शहीद हो गया था। शनिवार को सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू और कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर यह संयुक्त अभियान शुरू किया।
खुफिया सूचनाओं के आधार पर आतंकवादियों के नए ठिकाने का पता चलने के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया। ये आतंकवादी 18 जनवरी को छतरू के सिंहपोरा इलाके में हुई संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद से ही फरार चल रहे थे। उस घटना में, ऊंचाई पर छिपे आतंकवादियों ने तलाशी दल पर गोलीबारी की थी, जिसमें स्पेशल फोर्सेज के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य सैनिक घायल हो गए थे।
इस घटना के बाद से सुरक्षा बल लगातार तलाशी और कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं। इससे पहले 22 जनवरी और 25 जनवरी को भी सुरक्षा बलों का आतंकवादियों से संपर्क हुआ था, लेकिन दोनों ही मौकों पर वे भागने में सफल रहे। सुरक्षा कर्मियों ने जंगलों में अपनी तलाशी का दायरा और बढ़ा दिया है।
ताज़ा मुठभेड़ और संयुक्त अभियान
शनिवार, 31 जनवरी 2026 की सुबह, किश्तवाड़ के छतरू क्षेत्र के डोलगाम इलाके में चल रहे संयुक्त ऑपरेशन ‘त्राशी-1’ के दौरान आतंकवादियों के साथ एक बार फिर संपर्क स्थापित हुआ। नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कॉर्प्स के अनुसार, इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सभी स्रोतों से मिली खुफिया जानकारी का समन्वय किया गया है। इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और ऑपरेशन अभी जारी है। यह मुठभेड़ उस घटना के एक दिन बाद फिर से शुरू हुई है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने छतरू में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
18 जनवरी की मुठभेड़ का संदर्भ
यह मामला 18 जनवरी को छतरू के सिंहपोरा इलाके में हुई मुठभेड़ से जुड़ा है। उस दौरान, आतंकवादियों के एक समूह ने तलाशी के लिए आगे बढ़ रहे सुरक्षा बलों के दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में सेना की स्पेशल फोर्सेज के हवलदार गजेंद्र सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे, जबकि सात अन्य सैनिक घायल हो गए थे। उस संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद आतंकवादी घने जंगलों का फायदा उठाकर भाग निकले थे। तब से ही सुरक्षा बल उनकी तलाश में एक बड़ा अभियान चला रहे हैं।
आतंकियों की तलाश और पिछली कोशिशें
18 जनवरी की घटना के बाद से, सुरक्षा बल लगातार आतंकवादियों का पीछा कर रहे हैं। इस ताजा संपर्क से पहले, सुरक्षा बलों ने 22 जनवरी और 25 जनवरी को दो बार आतंकवादियों के साथ संपर्क स्थापित किया था। हालांकि, दोनों ही मौकों पर आतंकवादी मुठभेड़ से बचकर भागने में कामयाब रहे। इसके बावजूद, सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी और जंगलों के अंदर चारों तरफ से तलाशी और घेराबंदी अभियान को जारी रखा, जिसके परिणामस्वरूप अब फिर से संपर्क स्थापित हो सका है।
क्षेत्र में सुरक्षा उपाय और इंटरनेट निलंबन
इस मुठभेड़ से ठीक एक दिन पहले, जम्मू और कश्मीर पुलिस ने छतरू क्षेत्र में हाई-स्पीड मोबाइल डेटा सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने का आदेश दिया था। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि राष्ट्र-विरोधी तत्व और उपद्रवी इन सेवाओं का दुरुपयोग करके देश और केंद्र शासित प्रदेश की शांति, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने वाली सार्वजनिक अव्यवस्था न फैला सकें।
छतरू क्षेत्र में आतंकी गतिविधियां
पिछले दो वर्षों से किश्तवाड़ का छतरू इलाका आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। पिछले साल अप्रैल में भी, सुरक्षा बलों और पुलिस ने एक संयुक्त अभियान में यहां तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। अधिकारियों ने उस समय कहा था कि मारे गए आतंकवादी 2024 में एक जेसीओ और दो ग्राम रक्षा गार्डों की अलग-अलग हमलों में हत्या के लिए जिम्मेदार थे। यह ऑपरेशन भी खराब मौसम और दो से तीन फीट बर्फ से ढके दुर्गम इलाके में चलाया गया था।
सुरक्षा बलों ने 18 जनवरी की मुठभेड़ के बाद से फरार चल रहे आतंकवादियों के साथ किश्तवाड़ में फिर से संपर्क स्थापित कर लिया है। व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त ऑपरेशन जारी है और पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली गई है।
FAQs
यह मुठभेड़ कहाँ हो रही है?
यह मुठभेड़ जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छतरू क्षेत्र के डोलगाम इलाके में हो रही है।
इस ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल है?
इस संयुक्त ऑपरेशन में भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू और कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान शामिल हैं।
क्या यह किसी पुरानी घटना से जुड़ा है?
हाँ, यह 18 जनवरी 2026 को हुई मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें स्पेशल फोर्सेज के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य सैनिक घायल हुए थे।
सुरक्षा बलों ने पहले कितनी बार संपर्क स्थापित किया था?
18 जनवरी की घटना के बाद, सुरक्षा बलों ने इस ताजा मुठभेड़ से पहले 22 जनवरी और 25 जनवरी को दो बार आतंकवादियों से संपर्क स्थापित किया था, लेकिन वे भाग निकले थे।
इलाके में इंटरनेट क्यों बंद किया गया था?
जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने और शांति भंग करने के लिए हाई-स्पीड डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


