राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के एकीकरण की कोशिशों और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के विलय के बाद सरकार में शामिल होने की अटकलों के बीच, विपक्षी INDIA गठबंधन के अन्य दलों ने ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनाई है। यह राजनीतिक हलचल महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय का संकेत दे रही है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “फैसला दोनों गुटों और (पवार) परिवार को लेना है। परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य का निधन हो गया है और हम अभी हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं और घटनाक्रम के अनुसार कुछ करेंगे।” यह बयान गठबंधन के भीतर मौजूदा स्थिति को लेकर सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, NCP के दोनों धड़ों के बीच 8 फरवरी को विलय की घोषणा होने वाली थी, लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के कारण यह योजना टल गई। अब शनिवार दोपहर 2 बजे NCP विधायकों की एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना जाना है। संभावना है कि उन्हें शनिवार शाम को ही उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है।
INDIA गठबंधन की सतर्क प्रतिक्रिया
NCP में चल रही इन गतिविधियों पर INDIA गठबंधन के घटक दल सावधानी से नजर बनाए हुए हैं। AICC के एक नेता ने कहा कि NCP (SP) का गठबंधन से बाहर जाना कोई बड़ा झटका नहीं हो सकता है, क्योंकि “किसी के जाने का गठबंधन पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। राजनीति भविष्यवाणी करने के लिए बहुत गतिशील है।”
हालांकि, महाराष्ट्र के एक कांग्रेस सांसद ने कहा कि अगर शरद पवार और उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन छोड़ते हैं, तो यह एक बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि शरद पवार 2019 में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के साथ महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन बनाने में प्रमुख सूत्रधारों में से एक थे। सांसद ने सुप्रिया सुले की संसद में एक अच्छी वक्ता के रूप में प्रशंसा की और शरद पवार को एक दिग्गज नेता बताया जो किसी भी गठबंधन के लिए एक संपत्ति होंगे।
पवार परिवार से दूरी बनाए हुए सहयोगी दल
महाराष्ट्र के एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पुष्टि की कि पार्टी ने अभी तक पवार परिवार से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, “हमने राज्य इकाई के भीतर पहले ही तय कर लिया है कि पवार परिवार से बात करने का कोई मतलब नहीं है। देखते हैं कि वे क्या तय करते हैं और करते हैं, और हम उसी के अनुसार आने वाले हफ्तों में कदम उठाएंगे।”
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि यह इस तरह की बातचीत का समय नहीं है। उन्होंने कहा, “वे सदमे और दुख में हैं। यह पार्टी का आंतरिक मामला है, और इस समय बात करने के लिए क्या है?” शिवसेना (UBT) के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि जब परिवार शोक में हो तो राजनीतिक बातचीत शुरू करना सही नहीं है।
यह एक आंतरिक मामला: समाजवादी पार्टी
INDIA गठबंधन के एक अन्य घटक समाजवादी पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने कहा कि इस समय गठबंधन या कांग्रेस कुछ नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा, “यह एक आंतरिक पहलू का परिणाम है। दोनों परिवारों, दोनों गुटों के विलय का INDIA गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। तो, हम उनसे बातचीत कैसे शुरू कर सकते हैं?” उन्होंने यह भी कहा कि एक बड़े गठबंधन के भीतर किसी भी पार्टी को पूर्ण स्वायत्तता होती है।
संसद में संख्या बल का समीकरण
वर्तमान में, NCP (SP) के लोकसभा में 8 और राज्यसभा में दो सांसद हैं। यदि दोनों गुटों का विलय होता है, तो संयुक्त पार्टी के लोकसभा में 9 सांसद और उच्च सदन में पांच सदस्य हो जाएंगे। इस विलय से संसद में NDA के आंकड़े और मजबूत होंगे, जिसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में एकीकरण की चर्चाओं के बीच, INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों ने इसे पवार परिवार और पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए फिलहाल कोई भी हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है। वे स्थिति के स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं और उसके बाद ही अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।
FAQs
NCP के दोनों धड़ों के बीच क्या चल रहा है?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार और अजित पवार गुटों के बीच एकीकरण की कोशिशें चल रही हैं, जिसके बाद शरद पवार गुट के सरकार में शामिल होने की भी अटकलें हैं।
INDIA गठबंधन के दल इस पर क्या कह रहे हैं?
INDIA गठबंधन के घटक दलों, जैसे कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और समाजवादी पार्टी, ने इस मुद्दे पर ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनाई है और इसे NCP का आंतरिक मामला बताया है।
अजित पवार के निधन के बाद अगला कदम क्या है?
NCP विधायकों की एक बैठक बुलाई गई है जिसमें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है, जिसके बाद वह उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं।
क्या शरद पवार गुट के जाने से विपक्ष को नुकसान होगा?
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि यह एक बड़ा नुकसान होगा, जबकि कुछ का कहना है कि इसका गठबंधन पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है।
इस एकीकरण का NDA पर क्या असर पड़ेगा?
यदि दोनों गुटों का विलय होता है, तो संसद में उनकी संयुक्त ताकत बढ़ेगी, जिससे लोकसभा और राज्यसभा में NDA की संख्या और मजबूत होगी।
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