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बजट 2026 से पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 709.413 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में $8.053 बिलियन बढ़कर $709.413 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। यह वृद्धि देश की मजबूत बाहरी स्थिति को दर्शाती है, जो विदेशी निवेश और प्रेषण प्रवाह में वृद्धि से समर्थित है।

इस नई ऊंचाई ने सितंबर 2024 में दर्ज किए गए $704.89 बिलियन के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार में यह लगातार दूसरी बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है। इससे पिछले सप्ताह, भंडार में $14.167 बिलियन की वृद्धि हुई थी, जिससे यह $701.360 बिलियन तक पहुंच गया था।

भंडार में इस महत्वपूर्ण उछाल का मुख्य कारण स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) के मूल्य में हुई भारी वृद्धि है। RBI के अनुसार, भंडार के सभी प्रमुख घटकों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है, जिसमें प्रेषण और विदेशी निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक

RBI के आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA), जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है, $2.367 बिलियन बढ़कर $562.885 बिलियन हो गई। FCA में विदेशी मुद्राओं में रखी गई संपत्ति जैसे विदेशी कंपनियों के शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड आदि शामिल होते हैं।

इसी अवधि में, देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य $5.635 बिलियन की बड़ी वृद्धि के साथ $123.088 बिलियन पर पहुंच गया। विशेष आहरण अधिकार (SDRs) का मूल्य $33 मिलियन बढ़कर $18.737 बिलियन हो गया। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति $18 मिलियन बढ़कर $4.703 बिलियन हो गई।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और प्रेषण

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत दुनिया में प्रेषण (remittances) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है, और वित्त वर्ष 25 में यह प्रवाह $135.4 बिलियन तक पहुंच गया। यह देश के बाहरी खाते में स्थिरता प्रदान करने में मदद करता है। वैश्विक वित्तीय स्थितियों में सख्ती के बावजूद, भारत ने वित्त वर्ष 25 में सकल घरेलू उत्पाद के 18.5 प्रतिशत के बराबर सकल निवेश प्रवाह को आकर्षित किया है।

UNCTAD के आंकड़ों के अनुसार, भारत दक्षिण एशिया में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है और उसने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रमुख एशियाई देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। अप्रैल-नवंबर 2025 में, सकल FDI प्रवाह बढ़कर $64.7 बिलियन हो गया, जबकि अप्रैल-नवंबर 2024 में यह $55.8 बिलियन था।

भंडार की पर्याप्तता और अर्थव्यवस्था

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि भंडार की पर्याप्तता के मामले में, यह लगभग 11 महीनों के वस्तुओं के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, यह सितंबर 2025 के अंत तक के कुल बाहरी ऋण का लगभग 94 प्रतिशत कवर करता है, जो एक आरामदायक तरलता बफर प्रदान करता है। 2024 में ग्रीनफील्ड निवेश घोषणाओं में भारत विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर रहा, जिसमें 1,000 से अधिक परियोजनाएं शामिल थीं। भारत 2020-24 के बीच $114 बिलियन आकर्षित कर ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश के लिए सबसे बड़ा गंतव्य भी बनकर उभरा।

संक्षेप में, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार स्वर्ण भंडार और विदेशी मुद्रा संपत्ति में मजबूत वृद्धि के कारण एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह देश की बाहरी स्थिति की मजबूती को दर्शाता है, जिसे मजबूत FDI और प्रेषण प्रवाह का समर्थन प्राप्त है।

FAQs

भारत का नवीनतम विदेशी मुद्रा भंडार कितना है?

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $709.413 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था।

विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?

इस वृद्धि का मुख्य कारण स्वर्ण भंडार के मूल्य में $5.635 बिलियन और विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) में $2.367 बिलियन की बढ़ोतरी है।

विदेशी मुद्रा भंडार के मुख्य घटक क्या हैं?

विदेशी मुद्रा भंडार में मुख्य रूप से चार घटक होते हैं: विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA), स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (SDRs), और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास आरक्षित स्थिति।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, यह भंडार कितना पर्याप्त है?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, यह भंडार लगभग 11 महीने के आयात खर्च को कवर करने और देश के कुल बाहरी ऋण का लगभग 94 प्रतिशत कवर करने के लिए पर्याप्त है।

प्रेषण (remittances) के मामले में भारत की क्या स्थिति है?

भारत दुनिया में प्रेषण का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता है। वित्त वर्ष 2025 में देश में $135.4 बिलियन का प्रेषण प्रवाह दर्ज किया गया, जो बाहरी खाते को स्थिरता प्रदान करता है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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