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पहली बार समुद्र में उतरा मलेशिया का लिटोरल कॉम्बैट शिप

रॉयल मलेशियाई नौसेना के पहले लिटोरल कॉम्बैट शिप (LCS 1), जिसका नाम महाराजा लेला है, ने 28 जनवरी को अपना पहला समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। एक सप्ताह के पियरसाइड परीक्षण के बाद यह पहली बार था जब इस फ्रिगेट ने अपनी शक्ति से समुद्र में यात्रा की। यह परीक्षण मलेशियाई नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इस महत्वाकांक्षी लेकिन विलंबित परियोजना को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

परीक्षण के दौरान, जहाज ने लुमुत नेवल शिपयार्ड से टगबोट की सहायता से प्रस्थान किया। बाद में, इसने पैंगकोर द्वीप के पास के पानी में बिना किसी सहायता के स्वतंत्र रूप से यात्रा की और फिर शिपयार्ड में वापस लौट आया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर रॉयल मलेशियाई नौसेना के प्रतिनिधियों के साथ-साथ लुमुत नेवल शिपयार्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इर. अज़हर जुमात भी उपस्थित थे।

यह परीक्षण मलेशिया के रक्षा मंत्री दातो सेरी मोहम्मद खालिद बिन नॉर्डिन द्वारा संसद में की गई घोषणा के बाद हुआ। मंत्री ने बताया कि यह प्रारंभिक समुद्री परीक्षण अप्रैल में शुरू होने वाले आधिकारिक समुद्री परीक्षणों से पहले जहाज की प्रणालियों की जांच के लिए आवश्यक था। इस कार्यक्रम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें इसकी डिलीवरी की समय-सीमा में भी संशोधन किया गया है।

पहला समुद्री परीक्षण

महाराजा लेला जहाज का “पहला समुद्री परीक्षण” 28 जनवरी को आयोजित किया गया। जहाज को शुरुआत में टगबोट्स द्वारा लुमुत नेवल शिपयार्ड से बाहर निकाला गया। इसके बाद, इसने पास के समुद्री क्षेत्र में अपनी शक्ति का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से नौकायन किया। परीक्षण के सफल समापन के बाद, फ्रिगेट वापस शिपयार्ड लौट आया। रॉयल मलेशियाई नौसेना और शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए जहाज पर मौजूद थे।

आधिकारिक घोषणा और उद्देश्य

मलेशिया के रक्षा मंत्री दातो सेरी मोहम्मद खालिद बिन नॉर्डिन ने संसद को जानकारी देते हुए इस परीक्षण की घोषणा की थी। उनके अनुसार, इस “पहले समुद्री परीक्षण” का मुख्य उद्देश्य महाराजा लेला के प्रोपल्शन सिस्टम, बिजली उत्पादन प्रणाली और एयर कंडीशनिंग सिस्टम का मूल्यांकन करना था। यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि जहाज अप्रैल की शुरुआत में होने वाले आधिकारिक समुद्री परीक्षणों के लिए पूरी तरह से तैयार है।

परियोजना में देरी और नई समय-सीमा

रक्षा मंत्री ने सांसदों को यह भी बताया कि महाराजा लेला की डिलीवरी की योजनाबद्ध तारीख चार महीने बढ़ाकर दिसंबर 2026 कर दी गई है। दूसरे जहाज, LCS 2 राजा मुदा नाला की डिलीवरी भी अगस्त 2027 तक के लिए टाल दी गई है। हालांकि, बाकी तीन जहाजों की डिलीवरी की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मंत्री ने कहा कि 25 दिसंबर 2023 तक महाराजा लेला का 82.9 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, जबकि मूल कार्यक्रम के अनुसार इसे 96.52 प्रतिशत पूरा होना चाहिए था।

देरी के कारण और उठाए गए कदम

मंत्री के अनुसार, इस देरी का मुख्य कारण मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) से डिलीवरी में देरी और नेवल ग्रुप द्वारा किए गए डिज़ाइन ऑडिट के बाद वायरिंग और पाइपिंग का निरीक्षण और प्रतिस्थापन है। उन्होंने यह भी बताया कि इस देरी की भरपाई के लिए, लुमुत नेवल शिपयार्ड ने LCS 1 पर काम में तेजी लाने के लिए अब तीन शिफ्टों में काम शुरू कर दिया है।

वित्तीय विवरण और निगरानी

मोहम्मद खालिद के अनुसार, इस कार्यक्रम पर अब तक 8.3 बिलियन मलेशियन रिंगित खर्च हो चुके हैं, जो 2023 में कार्यक्रम को फिर से शुरू करने वाले अनुबंध के तहत बजट में रखे गए 11.2 बिलियन रिंगित का 74% है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी भुगतान जहाजों पर हुई वास्तविक प्रगति के आधार पर किए जाते हैं और नई निगरानी संरचनाओं में रॉयल मलेशियाई नौसेना की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

जहाज की तकनीकी विशेषताएं

केडी महाराजा लेला (2501) एक आधुनिक युद्धपोत है जिसकी विस्थापन क्षमता 3,100 टन है। इसकी लंबाई 111 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। यह CODAD प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है और 28 समुद्री मील (52 किमी/घंटा) की अधिकतम गति तक पहुंच सकता है। 15 समुद्री मील की गति पर इसकी रेंज 5,000 समुद्री मील (9,300 किमी) है। जहाज पर 138 नाविकों का दल तैनात रह सकता है। इसके हथियार प्रणालियों में एक बोफोर्स 57 मिमी मुख्य बंदूक, दो 30 मिमी तोप, 8 नेवल स्ट्राइक मिसाइल और दो ट्रिपल टॉरपीडो लॉन्चर शामिल हैं।

लंबे समय से विलंबित महाराजा लेला जहाज का पहला सफल समुद्री परीक्षण इस परियोजना के लिए एक सकारात्मक विकास है। हालांकि डिलीवरी की समय-सीमा में और विस्तार किया गया है, लेकिन यह परीक्षण दर्शाता है कि जहाज को सेवा में शामिल करने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

FAQs

मलेशिया के पहले LCS जहाज का क्या नाम है और इसका पहला समुद्री परीक्षण कब हुआ?

मलेशिया के पहले लिटोरल कॉम्बैट शिप (LCS) का नाम महाराजा लेला है और इसका पहला समुद्री परीक्षण 28 जनवरी को आयोजित किया गया था।

महाराजा लेला जहाज की डिलीवरी की नई तारीख क्या है?

महाराजा लेला जहाज की डिलीवरी की योजनाबद्ध तारीख को चार महीने बढ़ाकर अब दिसंबर 2026 कर दिया गया है।

इस परियोजना में देरी का मुख्य कारण क्या बताया गया है?

परियोजना में देरी के मुख्य कारण मूल उपकरण निर्माताओं से आपूर्ति में देरी और डिज़ाइन ऑडिट के बाद जहाज की वायरिंग और पाइपिंग में आवश्यक बदलाव हैं।

इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?

इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य जहाज के प्रोपल्शन, बिजली उत्पादन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम की जांच करना था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह अप्रैल में होने वाले आधिकारिक समुद्री परीक्षणों के लिए तैयार है।

इस कार्यक्रम पर अब तक कितना खर्च हो चुका है?

इस कार्यक्रम पर अब तक 8.3 बिलियन मलेशियन रिंगित खर्च हो चुके हैं, जो कुल बजट का लगभग 74% है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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