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पनामा कोर्ट ने हॉन्ग कॉन्ग की सीके हचिसन को नहर बंदरगाहों से किया बाहर

पनामा के सुप्रीम कोर्ट ने एक हांगकांग की कंपनी की इकाई के साथ हुए उस अनुबंध को रद्द कर दिया है, जिसके तहत वह देश की प्रसिद्ध नहर पर दो प्रमुख बंदरगाहों का संचालन कर रही थी। इस फैसले ने टर्मिनलों को बेचने के एक सौदे पर अनिश्चितता बढ़ा दी है और इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को फिर से स्थापित करने के डोनाल्ड ट्रम्प के प्रयासों को बल दिया है।

गुरुवार देर रात प्रकाशित एक सर्वसम्मत फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CK हचिसन होल्डिंग्स की एक इकाई को पनामा नहर के दोनों सिरों पर स्थित बाल्बोआ और क्रिस्टोबल बंदरगाहों को चलाने की रियायत असंवैधानिक थी। यह मुकदमा पनामा के नियंत्रक द्वारा दायर किया गया था, जिसमें एक सरकारी ऑडिट के बाद अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

यह फैसला उस योजनाबद्ध सौदे पर भी संदेह पैदा करता है जिसके तहत चीन इन दो बंदरगाहों पर अपना प्रभाव बनाए रखने की उम्मीद कर रहा था। 2017 में पनामा द्वारा ताइवान से राजनयिक मान्यता बदलकर चीन को मान्यता देने के बाद से चीन ने देश में भारी निवेश किया है। CK हचिसन लगभग 30 वर्षों से इन बंदरगाहों का संचालन कर रहा था और 2021 में बिना किसी बोली प्रक्रिया के अनुबंध को 25 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था।

इस मामले का एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है। अमेरिका, जिसने एक सदी पहले इस 82 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया था और 1999 में इसे पूरी तरह से पनामा को सौंप दिया था, इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित रहा है। यह फैसला अमेरिकी हितों के अनुरूप देखा जा रहा है।

पनामा सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

पनामा की शीर्ष अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में हांगकांग स्थित कंपनी CK हचिसन होल्डिंग्स की सहायक कंपनी के साथ हुए बंदरगाह संचालन अनुबंध को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय “व्यापक विचार-विमर्श और चर्चा” के बाद लिया गया। यह मामला पनामा के नियंत्रक द्वारा पिछले साल जुलाई में दायर एक मुकदमे पर आधारित था, जिसमें अनुबंध के उल्लंघन और संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना का आरोप लगाया गया था।

अनुबंध रद्द होने के मुख्य कारण

यह कानूनी कार्रवाई एक सरकारी ऑडिट के बाद शुरू हुई जिसमें कई अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में दिखाया गया था कि 1997 में जब से हचिसन ने बंदरगाहों का संचालन संभाला था, तब से $1.3 बिलियन के राजस्व का नुकसान हुआ था। इसके अलावा, 2021 में कंपनी के अनुबंध को अतिरिक्त 25 वर्षों के लिए बिना किसी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बढ़ाया गया था, जिसे भी अदालत ने गलत माना।

CK हचिसन और चीन की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, CK हचिसन की पनामा पोर्ट्स कंपनी (PPC) इकाई ने इसे “पनामा राज्य द्वारा अपने स्वयं के कानूनी और संविदात्मक ढांचे के खिलाफ एक अभियान” बताया। कंपनी ने कहा कि वह “राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्यवाही सहित अपने सभी अधिकारों को सुरक्षित रखती है”। इस खबर के बाद हांगकांग में CK हचिसन का शेयर मूल्य 3.2 प्रतिशत गिरकर HK$64.15 पर आ गया। यह फैसला चीन के लिए भी एक झटका है, जो अपनी सरकारी शिपिंग कंपनी कॉस्को के माध्यम से बंदरगाहों में बहुमत हिस्सेदारी चाहता था।

अमेरिका और भू-राजनीतिक प्रभाव

यह फैसला पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन प्रयासों का समर्थन करता है, जिन्होंने पिछले साल प्रशांत और कैरिबियन को जोड़ने वाली नहर पर “नियंत्रण वापस लेने” का संकल्प लिया था। अमेरिका में चीन के आलोचक लैटिन अमेरिकी देश में चीनी प्रभाव को लेकर इन दो बंदरगाहों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते रहे हैं। इस फैसले से इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव फिर से मजबूत होने की संभावना है।

पनामा सरकार का रुख और भविष्य की योजना

पनामा के वित्त मंत्री फेलिप चैपमैन ने कहा कि उनका देश सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को स्वीकार करने के लिए बाध्य है और कार्यपालिका का न्यायपालिका के काम में कोई दखल नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पनामा का कानून सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों को बंदरगाह रियायतें रखने की अनुमति नहीं देता, जो कॉस्को की दावेदारी को सीधे तौर पर खारिज करता है। अब पनामा को इन बंदरगाहों के लिए फिर से निविदा जारी करनी होगी। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो और देश का समुद्री प्राधिकरण शुक्रवार को अगले कदमों की घोषणा कर सकते हैं।

FAQs

पनामा की अदालत ने कौन सा अनुबंध रद्द किया है?

पनामा के सुप्रीम कोर्ट ने हांगकांग की कंपनी CK हचिसन होल्डिंग्स की एक इकाई के साथ हुए उस अनुबंध को रद्द कर दिया है, जिसके तहत वह पनामा नहर पर बाल्बोआ और क्रिस्टोबल बंदरगाहों का संचालन करती थी।

अदालत ने अनुबंध को क्यों रद्द किया?

अदालत ने अनुबंध को असंवैधानिक पाया। यह फैसला एक सरकारी ऑडिट के बाद दायर मुकदमे पर आधारित था, जिसमें अनियमितताओं, राजस्व हानि और 2021 में बिना बोली प्रक्रिया के अनुबंध विस्तार का आरोप लगाया गया था।

इस फैसले का CK हचिसन पर क्या असर हुआ?

फैसले के बाद हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में CK हचिसन के शेयरों में 3.2% की गिरावट आई। कंपनी की स्थानीय इकाई ने इस फैसले को एक अभियान बताया है और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखा है।

इस मामले में अमेरिका और चीन की क्या भूमिका है?

यह फैसला क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जो चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित है। चीन अपनी सरकारी कंपनी कॉस्को के माध्यम से इन बंदरगाहों में हिस्सेदारी चाहता था, लेकिन इस फैसले से उसकी योजना को झटका लगा है।

अब इन बंदरगाहों का संचालन कौन करेगा?

पनामा सरकार को अब इन बंदरगाहों के संचालन के लिए एक नई निविदा प्रक्रिया शुरू करनी होगी। अंतरिम अवधि के लिए, यह संभव है कि नहर का सरकारी संचालक, पनामा कैनाल अथॉरिटी, अस्थायी रूप से बंदरगाहों का प्रबंधन करे।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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