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छोटे ड्रोन हमलों से एयरबेस को बचाएगी वायु सेना की बैटल लैब

अमेरिकी वायु सेना (U.S. Air Force) ने अपने सैन्य ठिकानों पर छोटे ड्रोनों से उत्पन्न होने वाले खतरों से निपटने के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए नॉर्थ डकोटा में स्थित ग्रैंड फोर्क्स एयर फोर्स बेस की 319वीं रिकॉनिसेंस विंग को चुना है। इस महीने की शुरुआत में सेवा द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, यह कदम ड्रोन प्रौद्योगिकी से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के जवाब में उठाया गया है।

इस पहल को “पॉइंट डिफेंस बैटल लैब” नाम दिया गया है। 8 जनवरी को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, इसका मुख्य ध्यान छोटे मानव रहित विमान प्रणालियों (small unmanned aircraft systems) पर हवाई वर्चस्व विकसित करने और उसे बनाए रखने पर होगा। इसमें फर्स्ट पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन भी शामिल हैं, जिनका उपयोग हाल के संघर्षों में निगरानी और हमलों के लिए तेजी से बढ़ा है।

यह लैब नई रणनीति विकसित करने और प्रौद्योगिकी का मूल्यांकन करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। कंसास एयर नेशनल गार्ड की 184वीं विंग इस परियोजना में हवाई ट्रैकिंग, निगरानी और टोही में अपनी विशेषज्ञता के साथ सहायता प्रदान करेगी। यह सहयोग अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को ड्रोन के विकसित हो रहे खतरों से एक कदम आगे रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पॉइंट डिफेंस बैटल लैब का मुख्य उद्देश्य

इस नई बैटल लैब का प्राथमिक लक्ष्य छोटे ड्रोनों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को मजबूत करना है। यह लैब नई तकनीकों के परीक्षण, विकास और एकीकरण के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य केवल खतरों का जवाब देना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से हवाई क्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करना है ताकि किसी भी ड्रोन घुसपैठ को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

प्रमुख भागीदार और उनकी भूमिका

इस महत्वपूर्ण प्रयास का नेतृत्व 319वीं रिकॉनिसेंस विंग कर रही है, जिसके पास मानव रहित और दूर से संचालित प्रौद्योगिकी का व्यापक अनुभव है। 319वीं आरडब्ल्यू कमांडर, कर्नल अल्फ्रेड रोसेल्स ने एक बयान में कहा, “319वीं रिकॉनिसेंस विंग हमारे एयर नेशनल गार्ड भागीदारों के साथ पॉइंट डिफेंस बैटल लैब का नेतृत्व करने के लिए सम्मानित महसूस कर रही है।” वहीं, कंसास एयर नेशनल गार्ड की 184वीं विंग हवाई निगरानी और ट्रैकिंग में अपनी विशेषज्ञता का योगदान देगी, जो ड्रोन का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए आवश्यक है।

रणनीति में रक्षात्मक से आक्रामक बदलाव

बैटल लैब की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा की मुद्रा को पूरी तरह से रक्षात्मक से आक्रामक में बदलना है। इसका मतलब यह है कि केवल ड्रोन हमलों से बचाव करने के बजाय, वायु सेना सक्रिय रूप से ड्रोन खतरों को बेअसर करने की क्षमता विकसित करेगी। लैब की वेबसाइट के अनुसार, इसमें मौजूदा काउंटर-ड्रोन तकनीक का लाभ उठाना और जैसे-जैसे नए मानव रहित हवाई खतरे विकसित हो रहे हैं, उनके बारे में जागरूकता बनाए रखना शामिल है।

बढ़ते ड्रोन खतरे और पेंटागन की प्रतिक्रिया

हाल के वर्षों में, दुनिया भर में सैन्य सुरक्षा के लिए छोटे और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ड्रोन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। निगरानी और संभावित हमलों से बढ़ते खतरों के कारण अमेरिकी सैन्य ठिकाना कमांडरों के लिए ड्रोन घुसपैठ एक प्रमुख चिंता का विषय बन गई है। इसी के जवाब में, पेंटागन ने हाल ही में एक दिशानिर्देश जारी किया है, जिसमें अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास सभी अनधिकृत ड्रोन उड़ानों को खतरे के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

यह पहल ड्रोन प्रौद्योगिकी के दोहरे उपयोग वाले स्वरूप को दर्शाती है, जहाँ नागरिक उद्देश्यों के लिए विकसित तकनीक का आसानी से सैन्य अनुप्रयोगों के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है।

संक्षेप में, अमेरिकी वायु सेना द्वारा पॉइंट डिफेंस बैटल लैब की स्थापना छोटे ड्रोनों से उत्पन्न हो रहे जटिल और निरंतर विकसित हो रहे सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण और सक्रिय कदम है।

FAQs

पॉइंट डिफेंस बैटल लैब क्या है?

यह अमेरिकी वायु सेना द्वारा स्थापित एक नई पहल है, जिसका उद्देश्य छोटे ड्रोन खतरों से निपटने के लिए रणनीति, तकनीक और क्षमताओं का विकास करना है ताकि सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस पहल का नेतृत्व कौन कर रहा है?

इस पहल का नेतृत्व नॉर्थ डकोटा के ग्रैंड फोर्क्स एयर फोर्स बेस पर स्थित 319वीं रिकॉनिसेंस विंग कर रही है।

यह लैब कहाँ स्थापित की गई है?

यह बैटल लैब ग्रैंड फोर्क्स एयर फोर्स बेस, नॉर्थ डकोटा में स्थापित की गई है।

यह पहल क्यों शुरू की गई है?

यह पहल अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर निगरानी और हमलों के लिए छोटे ड्रोनों से बढ़ते खतरों के जवाब में शुरू की गई है।

इस परियोजना में कौन सी अन्य यूनिट सहायता कर रही है?

कंसास एयर नेशनल गार्ड की 184वीं विंग हवाई ट्रैकिंग, निगरानी और टोही में अपनी विशेषज्ञता के साथ इस परियोजना में सहायता प्रदान कर रही है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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