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भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव, पर सैन्य आधुनिकीकरण में बड़ी हिस्सेदारी चाहता है अमेरिका

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक उच्च-स्तरीय अमेरिकी कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में भारत का दौरा किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है और साथ ही रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ पर भी जोर दे रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में कुछ हालिया चुनौतियों के बावजूद, रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

यह पांच दिवसीय यात्रा 24 से 28 जनवरी तक हुई, जिसमें अमेरिकी रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इस यात्रा का मुख्य केंद्र बिंदु रक्षा सहयोग का विस्तार करना, रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग को गति देना और साझा सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की पहचान करना था।

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है, जिसने 2023 में अपने सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत 81 बिलियन डॉलर की रिकॉर्ड बिक्री की थी। भारत पहले से ही अमेरिका का एक प्रमुख रक्षा भागीदार है और उससे लगभग 20 बिलियन डॉलर के हथियार खरीद चुका है।

भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्रोतों में विविधता लाने की एक सचेत नीति पर भी काम कर रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक रूप से रूसी हथियारों पर अपनी निर्भरता को कम करना है। इसी क्रम में भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सौदे पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें सैन्य पहलू भी शामिल हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा

एक द्विदलीय अमेरिकी कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने 24 से 28 जनवरी तक भारत का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइकल रोजर्स और रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ ने किया। इस यात्रा का उद्देश्य भारत के साथ रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और रणनीतिक समन्वय को गहरा करने के लिए निरंतर अमेरिकी जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करना था।

अपनी यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भारत के निजी रक्षा उद्योग के कई प्रमुख नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया। इन बैठकों का जोर रक्षा साझेदारी के दायरे को और व्यापक बनाने पर था।

यात्रा का मुख्य उद्देश्य

अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस दौरे की बैठकों का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग का विस्तार करना, रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग में तेजी लाना और साझा सुरक्षा उद्देश्यों के समर्थन में संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की पहचान करना था। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में।

मौजूदा भारत-अमेरिका रक्षा व्यापार

भारत पहले से ही अमेरिकी निर्मित कई महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों का उपयोग करता है। इनमें एएच-64 अपाचे (हमलावर हेलीकॉप्टर), सीएच-47 चिनूक (परिवहन हेलीकॉप्टर), सी-130जे और सी-17 ग्लोबमास्टर III (भारी परिवहन विमान), पी-8आई नेप्च्यून (लंबी दूरी की समुद्री निगरानी के लिए), और लीज पर लिए गए एमक्यू-9ए रीपर ड्रोन शामिल हैं।

इसके अलावा, भारत ने अमेरिका से एजीएम-114 हेलफायर, स्टिंगर, जेवलिन मिसाइलें, एम777 आर्टिलरी गन और कई प्रकार के गोला-बारूद भी खरीदे हैं। अमेरिका ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान की भी पेशकश की है। अमेरिका दुनिया के 107 देशों को अपने हथियार बेचता है।

प्रमुख रक्षा समझौते और संवाद तंत्र

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग कई संस्थागत संवाद तंत्रों और समझौतों पर आधारित है। इनमें मंत्रिस्तरीय (रक्षा और विदेश मंत्री) स्तर पर 2+2 संवाद सबसे प्रमुख है। इसके अलावा, डिफेंस प्रोडक्शन एंड प्रोक्योरमेंट ग्रुप (डीपीपीजी), जॉइंट टेक्नोलॉजी ग्रुप (जेटीजी), द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा संवाद और डिफेंस ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव जैसे कई अन्य मंच भी सक्रिय हैं।

दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं जो सहयोग की रूपरेखा प्रदान करते हैं। इनमें लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (2016), कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (2018), इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (2019), और बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (2020) शामिल हैं। ये समझौते दोनों सेनाओं के बीच गहरे सहयोग और सूचना साझा करने की सुविधा प्रदान करते हैं।

इस यात्रा और मौजूदा संस्थागत ढांचे से यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग एक मजबूत आधार पर टिका है और भविष्य में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है। यह सहयोग दोनों देशों के साझा रणनीतिक हितों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

FAQs

भारत दौरे पर आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइकल रोजर्स और रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ ने किया।

भारत अमेरिका से कौन-कौन से प्रमुख सैन्य उपकरण खरीदता है?

भारत अमेरिका से एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर, सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 ग्लोबमास्टर III परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री निगरानी विमान और एम777 आर्टिलरी गन जैसे कई प्रमुख सैन्य उपकरण खरीदता है।

भारत और अमेरिका के बीच कुछ प्रमुख रक्षा समझौते कौन से हैं?

दोनों देशों के बीच कुछ प्रमुख रक्षा समझौतों में लेमोआ (LEMOA), कॉमकासा (COMCASA), और बेका (BECA) शामिल हैं, जो लॉजिस्टिक्स, संचार और भू-स्थानिक खुफिया जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान करते हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत में किनसे मुलाकात की?

प्रतिनिधिमंडल ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और भारतीय निजी रक्षा उद्योग के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की।

इस यात्रा का घोषित उद्देश्य क्या था?

इस यात्रा का घोषित उद्देश्य रक्षा सहयोग का विस्तार करना, रक्षा प्रौद्योगिकी में सहयोग को गति देना और दोनों देशों के बीच सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए नए अवसरों की पहचान करना था।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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