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आर्थिक सर्वेक्षण: गिग वर्कर्स और ग्रामीण भारत के लिए मजबूत पेंशन पर जोर, बजट 2026 में हो सकता है ऐलान

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भारत की पेंशन प्रणाली के भविष्य को लेकर एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, देश के पेंशन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अंशदायी (contributory) और गैर-अंशदायी (non-contributory) दोनों तरह की योजनाओं का संतुलित विस्तार आवश्यक है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों, सहकारी समितियों, किसान नेटवर्कों और गिग-प्लेटफॉर्म कंपनियों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया गया है ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने देश में एक मजबूत पेंशन प्रणाली की नींव रखी है, जो उपयोगकर्ताओं को कई विकल्प प्रदान करती है और एक बड़ी आबादी को कवर करती है। सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत की पेंशन व्यवस्था एक बहु-स्तरीय प्रणाली है, जिसमें बाजार से जुड़ी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS), 2025 में शुरू की गई सरकार समर्थित एकीकृत पेंशन योजना (UPS), और व्यापक कवरेज के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी अन्य योजनाएं शामिल हैं।

भारत के बीमा और पेंशन नियामक निकायों – भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और PFRDA – ने वित्तीय समावेशन को गहरा करने और अब तक सेवा से वंचित वर्गों तक सुरक्षा पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। सर्वेक्षण में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि EPFO, PFRDA और राज्य-स्तरीय पेंशन निकायों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है ताकि विखंडन को कम किया जा सके, पोर्टेबिलिटी को बढ़ाया जा सके और शासन को सुव्यवस्थित किया जा सके।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की मुख्य सिफारिशें

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की पेंशन प्रणाली को समावेशी और भविष्य के लिए तैयार करने के लिए एक सधे हुए दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें अंशदायी योजनाओं, जहां कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं, के साथ-साथ गैर-अंशदायी योजनाओं, जो सरकार द्वारा वित्त पोषित होती हैं, के विस्तार पर बल दिया गया है। सर्वेक्षण का सुझाव है कि योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों और विभिन्न जमीनी नेटवर्कों के साथ सक्रिय जुड़ाव महत्वपूर्ण होगा।

NPS और APY के प्रदर्शन के आंकड़े

सर्वेक्षण में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर, 2025 तक राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के 211.7 लाख ग्राहक थे और इसके तहत प्रबंधित संपत्ति 16.1 करोड़ रुपये थी। पिछले एक दशक में, NPS ग्राहकों की संख्या में 9.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से वृद्धि हुई है, जबकि प्रबंधन के तहत संपत्ति (AUM) में 37.3 प्रतिशत की तीव्र CAGR से वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह, 2016 में अपनी स्थापना के बाद से, अटल पेंशन योजना (APY) के ग्राहकों में 43.7 प्रतिशत की मजबूत CAGR से वृद्धि हुई है और इसके AUM में 64.5 प्रतिशत की असाधारण CAGR से वृद्धि देखी गई है।

पेंशन कवरेज में चुनौतियां और समाधान

इन सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, सर्वेक्षण यह भी मानता है कि पेंशन योजनाओं को लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेष रूप से कम आय वाले और ग्रामीण परिवारों में दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति उत्पादों के प्रति रुझान सीमित है। इस अंतर को पाटने के लिए हाल के वर्षों में कई प्रयास किए गए हैं। इनमें सरल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया, NPS लाइट वेरिएंट, APY के लिए विशेष अभियान, ई-NPS, डिजिटल KYC, लचीली योगदान संरचनाएं और नाबालिगों, गिग श्रमिकों और किसान समूहों के लिए लक्षित उत्पाद शामिल हैं। सर्वेक्षण ने सुझाव दिया कि NPS, APY और अन्य योजनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी का विस्तार करने से श्रमिकों के सेक्टर बदलने या प्रवास करने पर निर्बाध पोर्टेबिलिटी में मदद मिलेगी।

नियामक निकायों की भूमिका और सुधार

PFRDA और IRDAI जैसे नियामक निकायों ने पेंशन और बीमा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाया है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इन संस्थानों को लगातार मजबूत करने से भारत एक ऐसी पेंशन प्रणाली विकसित करने के लिए अच्छी स्थिति में है जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित हो। इन सुधारों का उद्देश्य प्रशासन को सुव्यवस्थित करना और योजनाओं को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है।

बीमा क्षेत्र में बदलाव

पेंशन के अलावा, सर्वेक्षण में ‘गैर-जीवन’ बीमा क्षेत्र में हो रहे संरचनात्मक बदलावों पर भी प्रकाश डाला गया है, जहां स्वास्थ्य बीमा का हिस्सा सकल घरेलू उत्पाद का 41 प्रतिशत है। देश में वर्तमान में 26 जीवन बीमाकर्ता, 26 गैर-जीवन बीमाकर्ता, सात स्वास्थ्य बीमाकर्ता और दो विशेष बीमाकर्ता सक्रिय हैं, जिन्हें 83 लाख से अधिक वितरकों का एक विशाल नेटवर्क समर्थन प्रदान करता है। सर्वेक्षण ने यह भी बताया कि जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर GST में छूट ने पॉलिसीधारकों को काफी राहत दी है और बीमा सेवाओं को अधिक किफायती बनाया है।

सर्वेक्षण के अनुसार, संस्थागत मजबूती और निरंतर सुधारों के साथ, भारत एक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार पेंशन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में सही रास्ते पर है, जो देश के सभी नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम होगी।

FAQs

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने पेंशन प्रणाली के लिए क्या सुझाव दिया है?

सर्वेक्षण ने सुझाव दिया है कि भारत को अंशदायी और गैर-अंशदायी, दोनों प्रकार की पेंशन योजनाओं का संतुलित विस्तार करना चाहिए और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच के लिए राज्य सरकारों और अन्य नेटवर्कों के साथ जुड़ना चाहिए।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के कितने ग्राहक हैं?

31 दिसंबर, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के 211.7 लाख ग्राहक थे।

अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत कब हुई थी?

अटल पेंशन योजना (APY) की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

सर्वेक्षण के अनुसार पेंशन प्रणाली में मुख्य चुनौती क्या है?

सर्वेक्षण के अनुसार, पेंशन प्रणाली में मुख्य चुनौती जागरूकता की कमी है, खासकर कम आय वाले और ग्रामीण परिवारों के बीच दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति उत्पादों को लेकर।

विभिन्न पेंशन योजनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी का क्या मतलब है?

इंटरऑपरेबिलिटी का मतलब है कि एक कर्मचारी नौकरी या सेक्टर बदलने पर अपनी पेंशन बचत को एक योजना से दूसरी योजना में आसानी से स्थानांतरित कर सकता है, जिससे उसकी सेवानिवृत्ति बचत सुरक्षित रहती है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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