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राजस्थान: मानव-तेंदुआ संघर्ष से निपटने के लिए सरकार ने हेल्पलाइन लॉन्च की

जयपुर में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के जवाब में, राजस्थान सरकार ने एक समर्पित हेल्पलाइन शुरू करने की घोषणा की है। पिछले एक साल में शहर के रिहायशी इलाकों में तेंदुओं से जुड़ी सात संघर्ष की घटनाओं के बाद यह कदम उठाया गया है। इस हेल्पलाइन का उद्देश्य ऐसी घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया देना और भविष्य में होने वाले टकराव को रोकना है।

गुरुवार को विधानसभा में, वन मंत्री संजय शर्मा ने इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन नंबर “1926” स्थापित किया जा रहा है और यह एक महीने के भीतर चालू हो जाएगा। यह निर्णय जयपुर के मालवीय नगर से भाजपा विधायक कालीचरण सराफ द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में आया।

विधायक सराफ ने इस बात पर जोर दिया था कि एक समर्पित हेल्पलाइन के अभाव में, जानकारी संबंधित अधिकारियों तक देरी से पहुँचती है। उन्होंने बताया कि लोग पहले पुलिस या जिला प्रशासन को फोन करते हैं, जो फिर वन विभाग को सूचित करते हैं, इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। नई हेल्पलाइन का लक्ष्य इस समय को कम करना और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पिछले एक साल की प्रमुख घटनाएं

जयपुर में पिछले एक साल में तेंदुओं के रिहायशी इलाकों में घुसने की सात घटनाएं दर्ज की गईं, जिसने अधिकारियों को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। फरवरी में, जगतपुरा के हरिनगर में एक तेंदुए को देखा गया, जिसे ट्रैंकुलाइज करके झालाना के जंगलों में छोड़ा गया। अप्रैल में, सिल्वानी पार्क में एक मादा शावक मिली, जिसकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

अगस्त में दो घटनाएं हुईं। पहली घटना गोपालपुरा में NCB फैक्ट्री के पास हुई, जहाँ एक तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर आमागढ़ वन क्षेत्र में छोड़ा गया। दूसरी घटना में, मालवीय नगर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) परिसर में कई बार तेंदुआ देखा गया, जिसके बाद एक युवा तेंदुए को पिंजरे में पकड़कर आमागढ़ जंगल में छोड़ा गया।

नवंबर में तीन और मामले सामने आए। एक नर तेंदुए को सिविल लाइंस जैसे वीआईपी इलाके से बचाया गया और उसे बीसलपुर क्षेत्र में छोड़ा गया। एक अन्य तेंदुए को घनी आबादी वाले चांदपोल इलाके से बचाकर झुंझुनूं के खेतड़ी कस्बे में छोड़ा गया। तीसरी घटना गुर्जर घाटी में हुई, जहाँ एक तेंदुए को बचाया तो गया, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण चोट लगना बताया गया और मामले की जांच जारी है।

सरकार की नई योजना और अन्य कदम

हेल्पलाइन “1926” की स्थापना के अलावा, सरकार अन्य उपायों पर भी विचार कर रही है। वन मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि विभाग अन्य राज्यों में लागू उपायों का अध्ययन करेगा और राजस्थान के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लाने का प्रयास करेगा। यह SOP महाराष्ट्र जैसे राज्यों के मॉडल पर आधारित हो सकता है, जहाँ खतरे वाले क्षेत्र को सील कर दिया जाता है। इस SOP को चालू वित्त वर्ष में लागू करने की योजना है।

वन विभाग ने संघर्ष को रोकने के लिए पहले से ही कई उपाय किए हैं। दिसंबर 2024 में दो त्वरित प्रतिक्रिया दलों (QRTs) का गठन किया गया था, जो 24 घंटे अलर्ट पर रहती हैं। ये टीमें मालवीय नगर और विद्याधर नगर जैसे क्षेत्रों में रात में लगातार गश्त करती हैं, जहाँ पहले घटनाएं हो चुकी हैं।

इसके अतिरिक्त, रणथंभौर से प्रशिक्षित ट्रैकर्स को बुलाया गया और झालाना और आमागढ़ के छह स्थानीय लोगों को एक महीने का प्रशिक्षण दिया गया। तेंदुओं के शिकार आधार को बढ़ाने के लिए, एक हेक्टेयर का बाड़ा तैयार किया जा रहा है जिसमें चीतल (चित्तीदार हिरण) को छोड़ने का प्रस्ताव है। साथ ही, वन क्षेत्रों में छह नए जलस्रोत बनाए गए हैं और 20 नए कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जिससे कुल संख्या 60 हो गई है। अधिक जानकारी के लिए, आप PaisaMag.com पर पढ़ सकते हैं।

बढ़ते शहरीकरण और घटते वन क्षेत्रों के कारण जयपुर जैसे शहरों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार द्वारा घोषित हेल्पलाइन और अन्य उपाय इन चुनौतियों से निपटने और मनुष्यों तथा वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

FAQs

राजस्थान में वन्यजीव संघर्ष के लिए नया हेल्पलाइन नंबर क्या है?

राजस्थान सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से निपटने के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन “1926” शुरू करने की घोषणा की है।

सरकार ने यह हेल्पलाइन शुरू करने का फैसला क्यों किया?

यह फैसला जयपुर के रिहायशी इलाकों में पिछले एक साल में तेंदुओं से जुड़ी सात संघर्ष की घटनाओं के बाद लिया गया, ताकि सूचना में होने वाली देरी को खत्म किया जा सके।

इस हेल्पलाइन को शुरू करने की घोषणा किसने की?

इस हेल्पलाइन को शुरू करने की घोषणा राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा ने विधानसभा में भाजपा विधायक कालीचरण सराफ के एक सवाल का जवाब देते हुए की।

वन विभाग ने संघर्ष रोकने के लिए और क्या कदम उठाए हैं?

वन विभाग ने दो त्वरित प्रतिक्रिया दलों (QRTs) का गठन किया है, गश्त बढ़ाई है, प्रशिक्षित ट्रैकर्स की नियुक्ति की है, शिकार आधार बढ़ाने के उपाय किए हैं और नए जलस्रोत व कैमरा ट्रैप लगाए हैं।

नई हेल्पलाइन कब तक चालू हो जाएगी?

वन मंत्री के अनुसार, यह नई हेल्पलाइन “1926” घोषणा के एक महीने के भीतर पूरी तरह से चालू हो जाएगी।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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