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आर्थिक सर्वेक्षण: भारत-EU के ऐतिहासिक FTA और रुपये की कमजोरी पर बड़ा खुलासा

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देश की विनिर्माण शक्ति, निर्यात और रणनीतिक क्षमता को बढ़ावा देगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश किए गए इस सर्वेक्षण में इस समझौते को “सभी सौदों की जननी” के रूप में वर्णित किया गया है।

सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान विनिर्मित वस्तुओं के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच का विस्तार करेगा। साथ ही, यह भारत को यूरोप की उन्नत प्रौद्योगिकी और उत्पादन क्षमताओं के साथ अधिक निकटता से जुड़ने में मदद करेगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कई देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के कारण व्यापार में उत्पन्न व्यवधानों के बीच जोखिम कम करने के लिए काम कर रहे हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय रुपये के प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा और विदेशी निवेश प्रवाह में कमी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें गिरावट आई। हालांकि, सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि रुपये का मौजूदा मूल्य भारत के मजबूत आर्थिक आधार की वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाता है।

इस समझौते के तहत भारत में आने वाले लगभग 97 प्रतिशत यूरोपीय संघ के सामानों पर शुल्क में कटौती की जाएगी। वहीं, भारतीय निर्यातकों के लिए, यह एफटीए यूरोपीय संघ के बाजारों में 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों के लिए विशेष पहुंच प्रदान करता है, जो कुल व्यापार मूल्य का 99.5 प्रतिशत हिस्सा है।

आर्थिक सर्वेक्षण में भारत-यूरोपीय संघ FTA

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यह समझौता भारत के श्रम-गहन निर्मित उत्पादों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच को आसान बनाएगा। साथ ही, यह भारत को यूरोप की तकनीकी और उत्पादन शक्तियों से बेहतर ढंग से जुड़ने में मदद करेगा।

सर्वेक्षण के अनुसार, यह एफटीए यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र के कुछ हिस्सों के पुनर्निर्माण के प्रयासों में भी सहायक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यह उत्पादन में भारत की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता में सुधार करेगा और मजबूत निर्यात तथा रणनीतिक क्षमता को बनाए रखने में मदद करेगा। यूरोपीय संघ द्वारा साझा किए गए विवरणों के अनुसार, यूरोपीय संघ के 96.6 प्रतिशत माल निर्यात पर शुल्क कम या समाप्त कर दिया जाएगा, जिससे यूरोपीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्कों में प्रति वर्ष €4 बिलियन तक की बचत हो सकती है।

व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 25 प्रतिशत हिस्सा होगा और 1.9 बिलियन से अधिक लोगों के बाजार को जोड़ेगा। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है, जिसके साथ 2023-24 में 135 बिलियन डॉलर का माल व्यापार हुआ। इस समझौते से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं।

2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि साल 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा। 1 अप्रैल से 22 जनवरी, 2026 के बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 6.5 प्रतिशत कमजोर हुआ। सर्वेक्षण के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेश प्रवाह का धीमा होना था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत वस्तुओं में व्यापार घाटा झेलता है, और सेवाओं तथा प्रेषण से होने वाला अधिशेष इस कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत अपने भुगतान संतुलन को अच्छी स्थिति में रखने के लिए विदेशी निवेश प्रवाह पर निर्भर है। जब यह प्रवाह धीमा हो जाता है, तो रुपये की स्थिरता प्रभावित होती है।

रुपये का मूल्यांकन और भविष्य की दिशा

सर्वेक्षण में कहा गया है कि रुपये का वर्तमान मूल्य भारत के मजबूत आर्थिक आधार की ताकत को पूरी तरह से नहीं दर्शाता है, और यह “अपनी क्षमता से कम प्रदर्शन” कर रहा है। हालांकि, यह भी उल्लेख किया गया है कि इन समयों में रुपये का अवमूल्यन भारतीय वस्तुओं पर उच्च अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कुछ हद तक कम करता है।

मध्यम से लंबी अवधि में, सर्वेक्षण का मानना है कि विनिमय दरें उत्पादकता में वृद्धि, उच्च-मूल्य वाले सामानों और सेवाओं की ओर निर्यात में बदलाव, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) के साथ गहरे संबंध और एक स्थिर नीति सेटिंग जैसे कारकों से प्रभावित होंगी, न कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.00 पर कारोबार कर रहा था, जो एक सप्ताह से भी कम समय में तीसरी बार एक नया रिकॉर्ड था।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के माध्यम से विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण क्षमता पर प्रकाश डाला है। साथ ही, रिपोर्ट ने विदेशी निवेश में कमी के कारण भारतीय रुपये के सामने आने वाली चुनौतियों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसके हालिया प्रदर्शन का भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।

FAQs

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 किसने पेश किया?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया गया।

भारत-यूरोपीय संघ FTA से भारत को क्या लाभ होने की उम्मीद है?

इस समझौते से भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलने, निर्यात में वृद्धि होने और यूरोप की प्रौद्योगिकी तथा उत्पादन शक्तियों के साथ बेहतर संबंध स्थापित होने की उम्मीद है।

सर्वेक्षण के अनुसार 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन कैसा रहा?

सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 में भारतीय रुपये का प्रदर्शन कमजोर रहा और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 6.5 प्रतिशत तक कमजोर हो गया।

रुपये में गिरावट का मुख्य कारण क्या बताया गया है?

रुपये में गिरावट का मुख्य कारण विदेशी निवेश के प्रवाह में कमी आना बताया गया है, जिस पर भारत का भुगतान संतुलन निर्भर करता है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2023-24 में कितना माल व्यापार हुआ?

2023-24 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच माल व्यापार का मूल्य 135 बिलियन डॉलर था, जिससे यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना रहा।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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