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अमेरिकी सांसदों का दिल्ली दौरा: मजबूत हिंद-प्रशांत रक्षा गठबंधन पर द्विदलीय जोर का संकेत

एक अमेरिकी कांग्रेसी प्रतिनिधिमंडल ने भारत और वाशिंगटन के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए 24 से 28 जनवरी तक नई दिल्ली का दौरा किया। इस यात्रा ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व को उजागर किया है।

हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइकल रोजर्स और रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ के नेतृत्व में इस द्विदलीय समूह में प्रतिनिधि जिमी पैट्रोनिस और समिति के वरिष्ठ कर्मचारी भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें दोनों देश अपने सहयोग को मजबूत करने के इच्छुक हैं।

इस यात्रा के दौरान, अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित प्रमुख भारतीय हस्तियों के साथ उच्च-स्तरीय चर्चा की। इन बैठकों का विस्तार भारतीय और अमेरिकी रक्षा उद्योगों के नेताओं के साथ बातचीत तक हुआ, जिसका उद्देश्य अधिक औद्योगिक और तकनीकी तालमेल को बढ़ावा देना था।

प्रतिनिधिमंडल और यात्रा का उद्देश्य

अमेरिकी कांग्रेस के इस द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करना था। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइकल रोजर्स और रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ ने किया। इस यात्रा ने दोनों राजनीतिक दलों की ओर से भारत के साथ साझेदारी को दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को प्रदर्शित किया।

उच्च-स्तरीय बैठकें

नई दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ चर्चा की। इन वार्ताओं में रक्षा संबंधों को मजबूत करने, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में सहायता के लिए प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अमेरिकी अधिकारियों के विचार

समिति के अध्यक्ष रोजर्स ने संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चर्चा का केंद्र रक्षा संबंधों को मजबूत करना और प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाना था। वहीं, रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ ने दोनों लोकतंत्रों के बीच स्पष्ट संवाद की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका-भारत संबंध न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

औद्योगिक और तकनीकी सहयोग

सरकारी चर्चाओं के अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय और अमेरिकी रक्षा उद्योग के अधिकारियों के साथ भी बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य विनिर्माण और नवाचार में संयुक्त उद्यमों की खोज करना था, जो रक्षा उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। बातचीत में रक्षा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान में तेजी लाने और प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए रास्ते तलाशने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

बढ़ती रक्षा साझेदारी

यह यात्रा भारत-अमेरिका के बीच परिपक्व हो रहे रक्षा संबंधों की पुष्टि करती है। भारत को ‘प्रमुख रक्षा भागीदार’ का दर्जा दिए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर पहल (iCET) जैसे ढांचे के तहत ड्रोन, मिसाइल और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक क्षमताओं के हस्तांतरण में तेजी आने की उम्मीद है। अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन इस साझेदारी की दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करता है।

यह यात्रा दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी को कार्रवाई में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जैसे-जैसे क्षेत्रीय गतिशीलता तीव्र हो रही है, यह जुड़ाव हिंद-प्रशांत में स्थिरता और समृद्धि के लिए विस्तारित सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।

FAQs

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत कब आया?

संयुक्त राज्य कांग्रेस का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल 24 से 28 जनवरी तक नई दिल्ली के दौरे पर था।

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन कर रहा था?

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइकल रोजर्स और रैंकिंग सदस्य एडम स्मिथ कर रहे थे।

प्रतिनिधिमंडल ने भारत में किनसे मुलाकात की?

प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा उद्योग के नेताओं से मुलाकात की।

यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?

यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ रक्षा सहयोग को गहरा करना, सैन्य आधुनिकीकरण का समर्थन करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना था।

चर्चा के प्रमुख क्षेत्र कौन से थे?

चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में रक्षा प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान, रक्षा प्रणालियों का सह-विकास और सह-उत्पादन, और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना शामिल था।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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