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भारत के MTA प्रोग्राम के लिए लॉकहीड मार्टिन बढ़ाएगी C-130J की रेंज, स्वदेशी सिस्टम के लिए देगी ओपन आर्किटेक्चर

भारतीय वायु सेना (IAF) के आगामी मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीद कार्यक्रम के लिए अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपनी पेशकश में बड़े अपग्रेड की घोषणा की है। यह कदम भारत की लंबी दूरी की रसद और घरेलू रक्षा उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कंपनी ने पुष्टि की है कि भारत को पेश किए गए C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान में नई विकसित रेंज-विस्तार क्षमता और एक ओपन आर्किटेक्चर डिज़ाइन शामिल होगा। इन घोषणाओं का उद्देश्य सोवियत-युग के पुराने एंटोनोव एन-32 विमानों के बेड़े को बदलने के लिए जारी होने वाले महत्वपूर्ण टेंडर में अपनी स्थिति को मजबूत करना है।

लॉकहीड मार्टिन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि कंपनी ने C-130J के लिए एक विशेष रेंज-एक्सटेंशन किट विकसित की है, जो वर्तमान में प्रमाणन प्रक्रिया से गुजर रही है। यह क्षमता भारतीय वायु सेना के लिए एक निर्णायक कारक हो सकती है, जिसे हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी के मिशनों और उच्च-ऊंचाई वाले ठिकानों तक पहुंचने के लिए विमानों की आवश्यकता है।

इस पहल से न केवल विमान की परिचालन पहुंच बढ़ेगी, बल्कि यह सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के साथ भी सीधे तौर पर जुड़ती है। ओपन आर्किटेक्चर डिज़ाइन भारतीय कंपनियों को स्वदेशी सब-सिस्टम को एकीकृत करने की अनुमति देगा, जिससे घरेलू रक्षा उद्योग को काफी बढ़ावा मिलेगा।

विमान की क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि

लॉकहीड मार्टिन द्वारा प्रस्तावित प्रमुख अपग्रेड में C-130J विमान की रेंज बढ़ाना शामिल है। कंपनी ने एक विशेष किट विकसित की है जिसे प्रमाणित किया जा रहा है। यह बढ़ी हुई रेंज भारतीय वायु सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे विशाल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) को कवर करने और बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता के बिना ऊंचाई वाले अग्रिम सैन्य ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम विमान की आवश्यकता है।

इस क्षमता से दूर-दराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में छोटे और अर्ध-तैयार हवाई पट्टियों से लंबी दूरी की रसद, आपदा राहत और विशेष अभियानों को संचालित करने की भारत की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर जोर

विमान के भौतिक प्रदर्शन के अलावा, लॉकहीड मार्टिन भारतीय औद्योगिक प्राथमिकताओं के अनुरूप इसके डिजिटल सिस्टम को भी तैयार कर रहा है। प्रस्तावित C-130J में एक ‘ओपन आर्किटेक्चर’ डिज़ाइन होगा। यह तकनीकी लचीलापन भारतीय वायु सेना और स्थानीय रक्षा फर्मों को मालिकाना सॉफ्टवेयर बाधाओं का सामना किए बिना स्वदेशी सब-सिस्टम, जैसे एवियोनिक्स, संचार सूट और सेंसर, को एकीकृत करने की अनुमति देगा।

यह दृष्टिकोण सीधे तौर पर भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है। स्थानीय रूप से विकसित प्रौद्योगिकी के एकीकरण को सक्षम करके, यह प्रस्ताव भारतीय कंपनियों को केवल असेंबली पार्टनर के रूप में काम करने के बजाय विमान के जीवनचक्र समर्थन, भविष्य के अपग्रेड और उच्च-मूल्य वाले सब-सिस्टम एकीकरण में भाग लेने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

एमटीए टेंडर और प्रतिस्पर्धा का परिदृश्य

यह घोषणाएं ऐसे समय में आई हैं जब रक्षा मंत्रालय एमटीए कार्यक्रम के लिए प्रस्ताव हेतु अनुरोध (RFP) जारी करने की तैयारी कर रहा है। इस टेंडर का अनुमानित मूल्य 6 अरब से 8 अरब डॉलर के बीच है और इसका उद्देश्य वायु सेना के पुराने हो चुके सोवियत-युग के एंटोनोव एन-32 विमानों के बेड़े को बदलना है। इस कार्यक्रम के तहत 40 से 80 विमानों की खरीद की जानी है।

इस टेंडर में कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की उम्मीद है। लॉकहीड मार्टिन के C-130J को ब्राजील की एम्ब्रेयर से एक मजबूत चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसने महिंद्रा समूह के साथ साझेदारी में अपने C-390 मिलेनियम को पेश किया है, और यूरोप की एयरबस, जो A400M एटलस की पेशकश कर रही है। भारतीय वायु सेना पहले से ही 12 सुपर हरक्यूलिस विमानों का एक बेड़ा संचालित करती है, जिसने लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी में दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी पर लैंडिंग सहित कई चुनौतीपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

गहरे होते औद्योगिक संबंध

लॉकहीड मार्टिन की भारत में अपने संयुक्त उद्यम, टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स लिमिटेड (TLMAL) के माध्यम से पहले से ही एक महत्वपूर्ण विनिर्माण उपस्थिति है। हैदराबाद में स्थित यह सुविधा C-130J एम्पेनेज (टेल असेंबली) की एकमात्र वैश्विक उत्पादक है। कंपनी ने संकेत दिया है कि एमटीए अनुबंध जीतने से भारत में एक अंतिम असेंबली लाइन की स्थापना हो सकती है, जिससे वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एयरोस्पेस साझेदारी और मजबूत होगी।

लॉकहीड मार्टिन ने अपनी रणनीति में भारतीय वायु सेना की “सुपर हर्क” के साथ मौजूदा परिचितता का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया है, साथ ही अधिक रेंज और गहरी स्वदेशीकरण की नई मांगों को भी संबोधित किया है।

ये रणनीतिक अपग्रेड लॉकहीड मार्टिन की उस बड़ी निविदा को हासिल करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जो भारतीय वायु सेना की परिवहन क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनी ने अपनी पेशकश को भारत की सामरिक और औद्योगिक दोनों महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़कर एक मजबूत दावा पेश किया है।

FAQs

एमटीए कार्यक्रम क्या है?

मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) कार्यक्रम भारतीय वायु सेना के पुराने एंटोनोव एन-32 परिवहन विमानों के बेड़े को बदलने के लिए एक खरीद पहल है, जिसके तहत 40 से 80 नए विमान खरीदे जाने हैं।

लॉकहीड मार्टिन C-130J में क्या प्रमुख अपग्रेड दे रही है?

लॉकहीड मार्टिन दो मुख्य अपग्रेड दे रही है: एक नई विकसित रेंज-एक्सटेंशन किट जो विमान की उड़ान दूरी को बढ़ाएगी, और एक ‘ओपन आर्किटेक्चर’ डिज़ाइन जो स्वदेशी सिस्टम के एकीकरण की अनुमति देगा।

‘ओपन आर्किटेक्चर’ से भारत को क्या लाभ होगा?

ओपन आर्किटेक्चर भारतीय रक्षा कंपनियों को विमान में अपने स्वयं के विकसित एवियोनिक्स, सेंसर और संचार प्रणाली जैसे उपकरणों को आसानी से स्थापित करने की अनुमति देता है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देता है और आयात पर निर्भरता कम करता है।

इस टेंडर में कौन सी अन्य कंपनियां प्रतिस्पर्धा कर रही हैं?

इस टेंडर में लॉकहीड मार्टिन के अलावा, ब्राजील की एम्ब्रेयर (C-390 मिलेनियम) और यूरोप की एयरबस (A400M एटलस) प्रमुख प्रतियोगी हैं।

भारत में लॉकहीड मार्टिन की मौजूदा विनिर्माण उपस्थिति क्या है?

लॉकहीड मार्टिन का टाटा समूह के साथ हैदराबाद में एक संयुक्त उद्यम है, जिसका नाम टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स लिमिटेड (TLMAL) है। यह सुविधा विश्व स्तर पर सभी C-130J विमानों के लिए टेल असेंबली का निर्माण करती है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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