आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 आज संसद में पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे सुबह 11:00 बजे सदन के पटल पर रखेंगी। यह सर्वेक्षण केंद्रीय बजट 2026 से कुछ दिन पहले प्रस्तुत किया जा रहा है, जो 1 फरवरी को पेश होना है। इस दस्तावेज़ पर निवेशकों और नीति निर्माताओं की गहरी नजर है, क्योंकि इससे देश की आर्थिक दिशा का संकेत मिलता है।
यह सर्वेक्षण मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन और उनकी टीम द्वारा तैयार किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की एक मजबूत तस्वीर पेश की जाएगी, जिसमें तेज विकास दर और घटती महंगाई का जिक्र होगा। सरकार के पहले अग्रिम अनुमानों और IMF के हालिया अपडेट के अनुसार, सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP विकास दर लगभग 7.3% से 7.5% रहने का अनुमान लगाया जा सकता है।
आर्थिक सर्वेक्षण को सरकार के पिछले एक साल के कामकाज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। इसमें GDP वृद्धि, महंगाई, रोजगार और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों की विस्तृत समीक्षा होती है। यह दस्तावेज़ आगामी केंद्रीय बजट के लिए एक वैचारिक आधार तैयार करता है और सरकार की भविष्य की आर्थिक नीतियों की दिशा तय करने में मदद करता है।
संसद में आज की कार्यवाही
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करेंगी। सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य संबंधित दस्तावेज़ सदन के पटल पर रखेंगे। आर्थिक सर्वेक्षण पेश होने के बाद, नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल अपने मंत्रालय से संबंधित कागजात प्रस्तुत करेंगे। इसके अलावा, किरण रिजिजू और कोडिकुन्निल सुरेश द्वारा व्यापार सलाहकार समिति की 13वीं रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।
सर्वेक्षण के मुख्य अपेक्षित बिंदु
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में दोहरी सफलता पर प्रकाश डाला जा सकता है: पहला, मुख्य मुद्रास्फीति में तेज गिरावट, जो 2025 के अंत में केंद्रीय बैंक के 4% के लक्ष्य से नीचे आ गई थी, और दूसरा, मजबूत घरेलू खपत। यह सर्वेक्षण भारतीय अर्थव्यवस्था को एक ऐसे बिंदु पर प्रस्तुत कर सकता है जहां विकास दर मजबूत है और कीमतें नियंत्रण में हैं। सर्वेक्षण में राजकोषीय समेकन की प्रगति का विश्लेषण भी शामिल होने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य राजकोषीय घाटे को 4.4% तक लाना है।
आर्थिक सर्वेक्षण क्या है और इसे कौन तैयार करता है?
आर्थिक सर्वेक्षण केंद्र सरकार का एक वार्षिक दस्तावेज़ है जो पिछले वित्तीय वर्ष में देश के आर्थिक प्रदर्शन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। यह आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार के सीधे पर्यवेक्षण में तैयार किया जाता है। वर्तमान में यह डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया है। हालांकि इसे वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह CEA और उनकी टीम का एक स्वतंत्र मूल्यांकन होता है।
बजट 2026 के लिए महत्व
आर्थिक सर्वेक्षण आगामी केंद्रीय बजट 2026 के लिए मंच तैयार करता है। जहां बजट भविष्य के करों और खर्चों पर ध्यान केंद्रित करता है, वहीं सर्वेक्षण यह बताता है कि वे निर्णय क्यों आवश्यक हैं। यह दस्तावेज़ इस बात का संकेत देगा कि क्या सरकार के पास मध्यम वर्ग को कर राहत देने के लिए राजकोषीय गुंजाइश है या वह ढांचागत अंतर को पाटने के लिए पूंजीगत व्यय पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी। यह निवेशकों, अर्थशास्त्रियों और छात्रों के लिए सरकार की वित्तीय दिशा को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
प्रमुख विषय और बाहरी जोखिम
इस वर्ष के सर्वेक्षण में कुछ प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में प्रगति, विशेष रूप से प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं के संदर्भ में, और सेवा क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर जोर देना शामिल हो सकता है। इसके साथ ही, सर्वेक्षण में बढ़ते व्यापार संरक्षणवाद और अमेरिकी टैरिफ नीति में संभावित बदलाव जैसे बाहरी जोखिमों पर भी सतर्कतापूर्ण दृष्टिकोण अपनाए जाने की संभावना है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया जाएगा। यह वार्षिक दस्तावेज़ पिछले एक साल में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है और आगामी केंद्रीय बजट के लिए नीतिगत दिशा का संकेत देता है।
FAQs
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 कौन पेश करेगा?
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किया जाएगा।
यह सर्वेक्षण कब पेश किया जाएगा?
यह सर्वेक्षण 29 जनवरी 2026 को सुबह 11:00 बजे संसद में प्रस्तुत किया जाना निर्धारित है।
आर्थिक सर्वेक्षण कौन तैयार करता है?
यह सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग का आर्थिक प्रभाग, मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के मार्गदर्शन में तैयार करता है।
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पिछले वित्तीय वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा करना और भविष्य के लिए नीतिगत सुधारों की सिफारिश करना है।
आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट में क्या अंतर है?
आर्थिक सर्वेक्षण पिछले वर्ष के आर्थिक प्रदर्शन की समीक्षा करता है और सुझाव देता है, जबकि केंद्रीय बजट आगामी वर्ष के लिए सरकार की आय और व्यय की योजना प्रस्तुत करता है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


