ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर से मुलाकात और बातचीत की है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब रुके हुए परमाणु समझौते को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास द्वारा एक आधिकारिक घोषणा में इस मुलाकात की पुष्टि की गई।
यह बातचीत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा तेहरान को दी गई एक कड़ी चेतावनी के बाद हुई है। ट्रम्प ने रुके हुए परमाणु مذاکرات को लेकर ईरान को आगाह किया और एक बड़े अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की तैनाती का उल्लेख किया। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरान ने भी अमेरिकी चेतावनियों का जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अपने मिशन के माध्यम से, ईरान ने कहा कि वह “पारस्परिक सम्मान और हितों के आधार पर” वाशिंगटन के साथ बातचीत करने को तैयार है। हालांकि, उसने यह भी चेतावनी दी कि यदि उस पर दबाव डाला गया, तो वह अपनी रक्षा करेगा और ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं दिया गया।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) ने क्षेत्र में अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा दिया है। इसमें कई दिनों तक चलने वाले अभ्यास शामिल हैं, जिसका उद्देश्य किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की हिंद महासागर में मौजूदगी की भी पुष्टि हुई है, जिससे क्षेत्र में सैन्य हलचल बढ़ गई है।
भारत और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय बैठक
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी और भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक भारत और ईरान के बीच चल रहे रणनीतिक संवाद का हिस्सा है। भारत के लिए ईरान ऊर्जा सुरक्षा और मध्य एशिया तक पहुंच, विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह के माध्यम से, के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े हुए तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है। यह तनाव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रुकी हुई परमाणु वार्ता को लेकर ईरान को चेतावनी दी है। अमेरिका 2018 में ईरान के साथ हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते, जिसे जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के नाम से जाना जाता है, से एकतरफा हट गया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी
पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वेनेजुएला की ओर भेजे गए पिछले बेड़े से भी बड़ा एक अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा “बड़ी शक्ति, उत्साह और उद्देश्य के साथ” तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह बल “यदि आवश्यक हो तो गति और हिंसा के साथ” अपने मिशन को पूरा करने के लिए तैयार है। ट्रम्प ने तेहरान से बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा कि एक निष्पक्ष समझौते पर बातचीत होनी चाहिए जिसमें “कोई परमाणु हथियार नहीं” शामिल हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि “समय समाप्त हो रहा है”।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में अपने मिशन के माध्यम से जवाब दिया। ईरान ने कहा कि वह आपसी सम्मान और हितों के आधार पर वाशिंगटन के साथ जुड़ने को तैयार है। हालांकि, एक अन्य पोस्ट में तेहरान ने चेतावनी दी, “लेकिन अगर धकेला गया, तो यह अपनी रक्षा करेगा और ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं हुआ!” इस बयानबाजी के बीच, ट्रम्प ने संवाददाताओं को बताया कि वाशिंगटन तेहरान की गतिविधियों पर करीब से नजर रख रहा है और पुष्टि की कि “एक विशाल बेड़ा उस दिशा में बढ़ रहा है।”
क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां
अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) ने मंगलवार को कहा कि वह कई दिनों के तैयारी अभ्यास की तैयारी कर रहा है। CENTCOM के अनुसार, इन अभ्यासों का उद्देश्य आक्रामकता को रोकना, गलत अनुमान के जोखिम को कम करना और भागीदारों को आश्वस्त करना है। इन सैन्य तैयारियों से पहले, CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर और इज़राइल रक्षा बलों के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर के बीच रविवार को एक बैठक हुई, जो “दोनों राज्यों के बीच रक्षात्मक सहयोग को मजबूत करने” पर केंद्रित थी। इसके अलावा, USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर में CENTCOM के जल क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस स्ट्राइक ग्रुप में अतिरिक्त अमेरिकी युद्धपोत, विध्वंसक और लड़ाकू विमान शामिल हैं।
ईरान और भारत के सुरक्षा अधिकारियों के बीच यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। यह दर्शाता है कि क्षेत्र के देश मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच संवाद के माध्यम से अपने हितों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
FAQs
किन दो अधिकारियों के बीच बैठक हुई?
यह बैठक ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी और भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर के बीच हुई।
इस बैठक की पृष्ठभूमि क्या है?
यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच रुके हुए परमाणु समझौते को लेकर बढ़े हुए तनाव और सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हुई है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने क्या चेतावनी दी?
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने की चेतावनी दी और कहा कि एक विशाल अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।
ईरान ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान ने कहा कि वह आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी दबाव की स्थिति में अपनी रक्षा के लिए अभूतपूर्व जवाब देने की चेतावनी भी दी।
CENTCOM क्या है?
CENTCOM का पूरा नाम यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड है। यह अमेरिकी रक्षा विभाग की छह भौगोलिक लड़ाकू कमानों में से एक है, जो मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में अमेरिकी हितों की देखरेख करती है।
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