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चीन ने समुद्री बफर को किया कमजोर, बढ़ाया टकराव का खतरा

चीन और ताइवान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि चीन ने ताइवान के खिलाफ अपनी सैन्य ज़बरदस्ती को व्यवस्थित रूप से तेज कर दिया है। बीजिंग अब समय-समय पर होने वाले अभ्यासों से आगे बढ़कर निरंतर और बड़े पैमाने पर ड्रिल कर रहा है, जिनके उद्देश्य भी पहले से अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं।

यह घटनाक्रम ताइवान पर चीन के दावे की पृष्ठभूमि में हो रहा है। बीजिंग स्व-शासित द्वीप ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और उसे बलपूर्वक मुख्य भूमि के साथ मिलाने की धमकी देता रहा है। इस नीति के तहत, चीनी सेना द्वारा की जाने वाली गतिविधियाँ हाल के वर्षों में बढ़ी हैं।

इस कड़ी में, दिसंबर 2025 के अंत में हुआ ‘जस्टिस मिशन’ नामक सैन्य अभ्यास एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इस अभ्यास ने उन अनौपचारिक सीमाओं को तोड़ा जो लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच एक अलिखित समझ के तौर पर कायम थीं।

बढ़ती सैन्य ज़बरदस्ती

चीन ने ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियों की रणनीति में बदलाव किया है। पहले जहाँ चीनी सेना कुछ समय के अंतराल पर अभ्यास करती थी, वहीं अब यह गतिविधियाँ लगातार और बड़े पैमाने पर हो रही हैं। इन सैन्य अभ्यासों का स्वरूप भी अधिक आक्रामक हो गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

‘जस्टिस मिशन’ अभ्यास

दिसंबर 2025 के अंत में चीन द्वारा आयोजित सैन्य अभ्यास, जिसे ‘जस्टिस मिशन’ का नाम दिया गया, एक अहम घटना थी। इस अभ्यास को लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक सैन्य सीमाओं का उल्लंघन माना गया। यह अभ्यास चीन की बदली हुई रणनीति का एक स्पष्ट संकेत था।

ताइवान पर बीजिंग का दावा

चीन की सरकार, जिसे बीजिंग के नाम से भी जाना जाता है, ताइवान पर अपनी संप्रभुता का दावा करती है। वह ताइवान को एक अलग हुआ प्रांत मानती है और बल प्रयोग सहित किसी भी माध्यम से उसे अपने नियंत्रण में लाने की बात कहती है। यह चीन की एक घोषित नीति है।

स्व-शासित द्वीप की स्थिति

ताइवान वर्तमान में एक स्व-शासित द्वीप है। चीनी गृहयुद्ध के बाद से ही ताइवान की अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था है, जबकि चीन इसे अपने ‘एक चीन सिद्धांत’ के तहत अपना हिस्सा मानता है। यह स्थिति दोनों के बीच विवाद का मुख्य कारण है।

संक्षेप में, चीन ताइवान के खिलाफ अपनी सैन्य ज़बरदस्ती को निरंतर बढ़ा रहा है, जो समय-समय पर होने वाले अभ्यासों से बड़े पैमाने पर और आक्रामक ड्रिलों में बदल गया है। दिसंबर 2025 का ‘जस्टिस मिशन’ अभ्यास इस बढ़ती आक्रामकता का एक प्रमुख उदाहरण है, जो ताइवान पर बीजिंग के दावे को दर्शाता है।

FAQs

चीन ताइवान के खिलाफ क्या कर रहा है?

चीन ताइवान के खिलाफ अपनी सैन्य ज़बरदस्ती को बढ़ा रहा है। इसमें निरंतर, बड़े पैमाने पर और आक्रामक उद्देश्यों वाले सैन्य अभ्यास शामिल हैं।

‘जस्टिस मिशन’ क्या था?

‘जस्टिस मिशन’ दिसंबर 2025 के अंत में चीन द्वारा आयोजित एक सैन्य अभ्यास का कोडनेम था। इसने दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक सीमाओं को पार किया।

ताइवान पर बीजिंग का क्या रुख है?

बीजिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और यह धमकी देता है कि वह बलपूर्वक द्वीप पर कब्ज़ा कर सकता है।

ताइवान की वर्तमान स्थिति क्या है?

ताइवान एक स्व-शासित द्वीप है जिसकी अपनी सरकार और प्रशासनिक प्रणाली है।

चीन की सैन्य गतिविधियों में क्या बदलाव आया है?

चीन की सैन्य गतिविधियाँ अब रुक-रुक कर होने वाले अभ्यासों से बदलकर निरंतर और बड़े पैमाने पर होने वाले ड्रिलों में तब्दील हो गई हैं।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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