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मूडा केस: सिद्धारमैया व परिजनों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट विशेष अदालत ने की मंजूर

मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तीन अन्य के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा दायर एक क्लोजर रिपोर्ट को विशेष अदालत ने बुधवार को स्वीकार कर लिया। यह फैसला मुख्यमंत्री और उनके परिवार के लिए एक बड़ी राहत है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक “पीड़ित व्यक्ति” के रूप में केवल “सीमित सीमा” तक ही हस्तक्षेप कर सकता है। अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रखने और अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला एक आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा दायर एक निजी शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी को मिले भूखंडों के माध्यम से अनुचित लाभ कमाया था। हालांकि, लोकायुक्त पुलिस को मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले, जिसके बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी।

विशेष अदालत का आदेश

निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जांच अधिकारी द्वारा आरोपी नंबर 1 श्री सिद्धारमैया, आरोपी नंबर 2 श्रीमती बी एम पार्वती, आरोपी नंबर 3 श्री मल्लिकार्जुन स्वामी और आरोपी नंबर 4 श्री जे देवराज के खिलाफ दायर ‘बी’ रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है।” अदालत ने लोकायुक्त पुलिस द्वारा फरवरी 2025 में दायर की गई इस ‘बी’ या क्लोजर रिपोर्ट को अपनी मंजूरी दे दी। हालांकि, अदालत ने पुलिस को अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रखने और लोकायुक्त को इस संबंध में एक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ ये आरोप एक आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने एक निजी शिकायत में लगाए थे। सितंबर 2024 में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मंजूरी के बाद इसे एक प्राथमिकी (FIR) के रूप में दर्ज किया गया था। कृष्णा ने आरोप लगाया था कि 2021 में 3.16 एकड़ की भूमि के बदले में मुख्यमंत्री की पत्नी को MUDA से 14 आवासीय भूखंड मिले, जिससे सिद्धारमैया को ₹56 करोड़ का लाभ हुआ। विवाद बढ़ने के बाद, उनकी पत्नी पार्वती ने सभी 14 भूखंड MUDA को वापस कर दिए थे।

लोकायुक्त पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट

कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने फरवरी 2025 में मामले में ‘बी’ रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि सिद्धारमैया, उनकी पत्नी बी एम पार्वती, साले मल्लिकार्जुन स्वामी और एक पूर्व भू-स्वामी जे देवराज के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को स्थापित करने के लिए सबूतों का अभाव है। इस रिपोर्ट को याचिकाकर्ता स्नेहमयी कृष्णा और ED ने चुनौती दी थी। कृष्णा ने मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की थी। अदालत ने जांच में देरी को लेकर जांच अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की याचिका को भी खारिज कर दिया।

प्रवर्तन निदेशालय की जांच

ED ने अपनी जांच में MUDA साइटों के आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाले का दावा किया था। हालांकि, मार्च 2025 में ED द्वारा पार्वती और कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री बी एस सुरेश को भेजे गए समन को उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि किसी व्यक्ति को PMLA मामले में बयान देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस incriminating सामग्री न हो। इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। विशेष अदालत ने ED को मामले में PMLA के तहत अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। इसके बाद ED ने नवंबर में MUDA के पूर्व आयुक्त जी टी दिनेश कुमार के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की।

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट

लोकायुक्त रिपोर्ट के अलावा, सिद्धारमैया सरकार द्वारा MUDA में भ्रष्टाचार और कुप्रशासन के आरोपों की जांच के लिए गठित एक न्यायिक आयोग ने सितंबर 2025 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा कोई गलत काम नहीं किया गया। हालांकि, आयोग ने 2020-2024 की अवधि में MUDA के कामकाज में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाईं और MUDA अधिकारियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की। आयोग ने मार्च 2023 के बाद आवंटित सभी साइटों को रद्द करने की भी सिफारिश की थी।

यह फैसला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को व्यक्तिगत आरोपों से मुक्त करता है, लेकिन MUDA में कथित व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच अभी भी जारी रहेगी। अदालत ने लोकायुक्त और ED को अन्य आरोपियों और संबंधित मामलों में अपनी जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

FAQs

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संबंध में अदालत का क्या फैसला है?

विशेष अदालत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी, साले और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, जिससे उनके खिलाफ मामला बंद हो गया है।

यह आरोप मूल रूप से किसने लगाए थे?

यह आरोप एक आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा द्वारा एक निजी शिकायत में लगाए गए थे, जिसके बाद राज्यपाल की मंजूरी से प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

‘बी’ रिपोर्ट का क्या मतलब है?

‘बी’ रिपोर्ट पुलिस द्वारा दायर की जाने वाली एक क्लोजर रिपोर्ट है। यह तब दायर की जाती है जब जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलते हैं।

इस मामले में ED की वर्तमान भूमिका क्या है?

अदालत के अनुसार, ED एक पीड़ित पक्ष के रूप में सीमित हस्तक्षेप कर सकती है। हालांकि, एजेंसी को MUDA घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के व्यापक मामले में अपनी जांच जारी रखने की अनुमति है।

क्या न्यायिक आयोग को कोई अनियमितता मिली थी?

हां, न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री के परिवार को क्लीन चिट दी, लेकिन 2020-2024 के दौरान MUDA के कामकाज में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाईं और अधिकारियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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