अडानी एयरपोर्ट्स लिमिटेड ने भारत सरकार से विदेशी एयरलाइनों के लिए सीटों की संख्या पर लगी सीमाओं में ढील देने का आग्रह किया है। कंपनी का कहना है कि ये प्रतिबंध भारत को एक वैश्विक विमानन हब बनाने की उसकी महत्वाकांक्षा में बाधा डाल रहे हैं। यह मांग हैदराबाद में आयोजित एक एयर शो के दौरान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा की गई।
यह मुद्दा लंबे समय से विदेशी और घरेलू विमानन कंपनियों के बीच बहस का विषय रहा है। एक ओर जहाँ विदेशी एयरलाइनें अधिक उड़ानों और सीटों की मांग कर रही हैं, वहीं भारतीय एयरलाइनें इन प्रतिबंधों को घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानती हैं। सरकार ने इन प्रतिबंधों को घरेलू विमानन कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया है।
अडानी एयरपोर्ट्स, जो अरबपति गौतम अडानी के समूह का हिस्सा है, भारत के विमानन क्षेत्र में एक बड़ी विस्तार योजना पर काम कर रहा है। कंपनी का मानना है कि ‘खुली आकाश नीति’ को अपनाना देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इस मामले पर सरकार के प्रवक्ता ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया।
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार है। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और विकास की संभावनाएं काफी अधिक हैं, जिससे नीतियों में किसी भी बदलाव का गहरा असर पड़ सकता है।
सीईओ अरुण बंसल का बयान
अडानी एयरपोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरुण बंसल ने बुधवार, 28 जनवरी 2026 को हैदराबाद में एक एयर शो के दौरान एक पैनल चर्चा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “अल्पकाल में, भारतीय विमानन का विकास द्विपक्षीय (हवाई सेवा) समझौतों से बाधित है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत को एक हब बनने के लिए, हमें एक खुली आकाश नीति की आवश्यकता है।”
वैश्विक हब बनने की महत्वाकांक्षा
कंपनी का तर्क है कि मौजूदा द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते भारत की वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता को सीमित करते हैं। इन समझौतों के तहत, दो देशों के बीच उड़ानों और सीटों की संख्या पहले से तय होती है, जिससे एयरलाइनें मांग के अनुसार अपनी सेवाओं का विस्तार नहीं कर पाती हैं। ‘खुली आकाश नीति’ अपनाने से विदेशी एयरलाइनों को अधिक उड़ानें संचालित करने की अनुमति मिलेगी, जिससे हवाई अड्डों पर यातायात बढ़ेगा और भारत एक ट्रांजिट हब के रूप में स्थापित हो सकेगा।
विदेशी और घरेलू एयरलाइनों का पक्ष
विदेशी एयरलाइनें लंबे समय से इन प्रतिबंधों से निराश रही हैं। उदाहरण के लिए, दुबई की एमिरेट्स एसए ने कहा है कि भारत-यूएई द्विपक्षीय समझौते के तहत साप्ताहिक सीट सीमाओं की तुलना में मांग बहुत अधिक है। दूसरी ओर, बाजार में अग्रणी इंडिगो सहित भारतीय एयरलाइनों ने सीट कैप बनाए रखने के सरकार के फैसले का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि द्विपक्षीय सौदों में तेजी से उदारीकरण घरेलू वाहकों को कमजोर कर सकता है जो अभी भी अपने बेड़े का विस्तार कर रहे हैं।
अडानी एयरपोर्ट्स की विस्तार योजना
अडानी एयरपोर्ट्स वर्तमान में आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है। कंपनी की अपनी 11 बिलियन डॉलर की विस्तार रणनीति के हिस्से के रूप में 11 और हवाई अड्डों के लिए बोली लगाने की योजना है। यह विस्तार भारत के विमानन बुनियादी ढांचे में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की कंपनी की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। अडानी समूह का यह कदम देश के बढ़ते विमानन बाजार की क्षमता का लाभ उठाने पर केंद्रित है।
अडानी एयरपोर्ट्स ने भारत को एक वैश्विक विमानन केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ विदेशी एयरलाइनों पर लगे सीट प्रतिबंधों को हटाने का आह्वान किया है। हालाँकि, इस प्रस्ताव का घरेलू एयरलाइनों द्वारा विरोध किया जा रहा है, जो अपने हितों की रक्षा के लिए मौजूदा नीति का समर्थन करती हैं।
FAQs
अडानी एयरपोर्ट्स ने सरकार से क्या आग्रह किया है?
अडानी एयरपोर्ट्स ने सरकार से विदेशी एयरलाइनों के लिए भारत आने और जाने वाली उड़ानों पर सीटों की संख्या की सीमा में ढील देने का आग्रह किया है।
यह मांग क्यों की गई है?
कंपनी के अनुसार, मौजूदा प्रतिबंध भारत की एक वैश्विक विमानन हब बनने की महत्वाकांक्षा में बाधा डाल रहे हैं और विकास को सीमित कर रहे हैं।
घरेलू भारतीय एयरलाइनें इस पर क्या विचार रखती हैं?
इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइनों ने सीट कैप बनाए रखने के सरकार के फैसले का समर्थन किया है, क्योंकि उनका मानना है कि उदारीकरण से घरेलू वाहकों को नुकसान हो सकता है।
अडानी एयरपोर्ट्स के सीईओ कौन हैं?
अडानी एयरपोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अरुण बंसल हैं।
कंपनी वर्तमान में कितने हवाई अड्डों का संचालन करती है?
अडानी एयरपोर्ट्स वर्तमान में आठ हवाई अड्डों का संचालन करती है और 11 और के लिए बोली लगाने की योजना बना रही है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


