अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। यह तैनाती ईरानी नेतृत्व की उन चेतावनियों के बीच हुई है जिसमें कहा गया है कि ईरान पर किसी भी हमले को “संपूर्ण युद्ध” माना जाएगा और उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने 26 जनवरी, 2025 को इस तैनाती की पुष्टि की, जब यह नौसैनिक बेड़ा अमेरिकी 5वें फ्लीट/सेंटकॉम के जल क्षेत्र में दाखिल हुआ।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का एक विशाल जखीरा है, जिसे विशेष रूप से खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की ईरान के तट के करीब मौजूदगी से मिसाइल हमले का खतरा काफी बढ़ गया है, भले ही विश्लेषक सीधे संघर्ष की संभावना को कम आंकते हों।
पिछले वर्ष जून 2025 में हुए “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” ने ईरान के परमाणु ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था, लेकिन उसकी मिसाइल क्षमता पर इसका कोई खास असर नहीं हुआ। हाल के इजरायली हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली कमजोर हुई है, लेकिन उसकी मोबाइल मिसाइल सेना अभी भी एक शक्तिशाली निवारक बनी हुई है, जो मौजूदा गतिरोध को और गंभीर बनाती है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक शक्ति
संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने प्रमुख नौसैनिक बल, USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, को मध्य पूर्व में U.S. 5th Fleet/CENTCOM के अधिकार क्षेत्र वाले समुद्री इलाके में भेजा है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा विभिन्न समाचार माध्यमों को दी गई जानकारी के अनुसार, यह तैनाती 26 जनवरी, 2025 को हुई। यह कदम ईरान द्वारा दी गई उस सार्वजनिक चेतावनी के बाद उठाया गया है जिसमें उसने कहा था कि उसके क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का हमला “संपूर्ण युद्ध” को जन्म देगा।
अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की निकटता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ईरान लगातार ऐसी धमकियां देता रहा है, लेकिन अमेरिकी युद्धपोतों की इतनी करीब मौजूदगी इन चेतावनियों को पहले से कहीं अधिक वजन देती है। इससे एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जहाँ किसी भी पक्ष की छोटी सी गलती भी बड़े सैन्य टकराव का कारण बन सकती है।
ईरान की मिसाइल क्षमता और खतरा
ईरान के पास मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और सबसे विविध मिसाइल शस्त्रागार माना जाता है, जिसमें हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। CSIS मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट के शोधकर्ताओं के अनुसार, ईरान ने पिछले एक दशक में इन हथियारों की सटीकता और मारक क्षमता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया है, जिससे उसकी मिसाइल सेना अमेरिकी और सहयोगी बलों के लिए एक विश्वसनीय खतरा बन गई है।
बैलिस्टिक मिसाइलें एक रॉकेट-चालित हथियार हैं जो वायुमंडल के माध्यम से एक ऊंचे पथ का अनुसरण करती हैं और तेज गति से लक्ष्य पर गिरती हैं, जिससे उन्हें रोकना मुश्किल होता है। वहीं, क्रूज मिसाइलें एक विमान की तरह नीची और लंबी उड़ान भरती हैं और रडार से बचने के लिए इलाके की आड़ (पहाड़ियों, घाटियों) का उपयोग करती हैं। ईरान इन दोनों प्रकार की मिसाइलों का उपयोग अमेरिकी हवाई और नौसैनिक शक्ति का मुकाबला करने के लिए करता है।
सैन्य हमलों का ईरान की क्षमता पर प्रभाव
22 जून, 2025 को हुए “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” ने विशेष रूप से फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान में स्थित ईरानी परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था। इस हमले में GBU-57 “बंकर बस्टर” बम का इस्तेमाल किया गया, जिसने ईरान के अधिकांश परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया। हालांकि, इस हमले का ईरान की मिसाइल आपूर्ति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
इसके अलावा, 2025 में ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान इजरायली हमलों ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया था। लेकिन खुफिया जानकारी से पता चलता है कि ईरान ने भंडारण में रखे गए सिस्टम का उपयोग करके अपनी मिसाइल लॉन्च क्षमता का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि पिछले हमलों से गंभीर रूप से प्रभावित होने के बावजूद, ईरान तकनीकी रूप से अपने पास मौजूद कई मिसाइलों को दागने की क्षमता रखता है।
ईरान का वर्तमान मिसाइल जखीरा
ईरान के मिसाइल भंडार की सटीक संख्या बताना मुश्किल है, क्योंकि इसे ईरानी अधिकारी छिपा कर रखते हैं और अक्सर सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच स्थानांतरित करते रहते हैं। फिर भी, यह ज्ञात है कि ईरान के पास हजारों की संख्या में कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (SRBMs) और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBMs) हैं। SRBMs की रेंज लगभग 1,000 किमी और MRBMs की रेंज 1,000 से 3,000 किमी के बीच होती है।
उदाहरण के लिए, सेज्जिल (Sejjil) मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2,000 किमी है, जो इसे इजरायल और कई अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम बनाती है। इसी तरह, खुर्रमशहर (Khorramshahr) मिसाइल परिवार भी लगभग 2,000 किमी की रेंज और 1,800 किलोग्राम तक के भारी हथियार ले जाने की क्षमता रखता है। हालांकि, ईरान के पास अभी तक कोई opérationnel अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है जो अमेरिकी मुख्य भूमि पर हमला कर सके।
मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति में, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने शक्तिशाली USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है, जिसके जवाब में ईरान ने किसी भी हमले पर “संपूर्ण युद्ध” छेड़ने की धमकी दी है। पिछले सैन्य हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और वायु रक्षा को नुकसान पहुंचा है, लेकिन उसका विशाल और सक्षम मिसाइल भंडार, विशेष रूप से अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की निकटता के कारण, एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
FAQs
अमेरिका ने मध्य पूर्व में कौन सा जहाजी बेड़ा तैनात किया है?
अमेरिका ने मध्य पूर्व में USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को तैनात किया है। यह एक शक्तिशाली नौसैनिक बल है जिसमें एक विमानवाहक पोत और उसके सहयोगी युद्धपोत शामिल होते हैं।
ईरान ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?
ईरानी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि उसके क्षेत्र पर किसी भी हमले को “संपूर्ण युद्ध” माना जाएगा और उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।
‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ क्या था?
‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ जून 2025 में किया गया एक अमेरिकी सैन्य हमला था, जिसने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया था। हालांकि, इस हमले से ईरान की मिसाइल आपूर्ति पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
ईरान की प्रमुख मिसाइलों की मारक क्षमता कितनी है?
ईरान के शस्त्रागार में सेज्जिल और खुर्रमशहर जैसी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर है। ये मिसाइलें इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और नौसैनिक जहाजों तक पहुंच सकती हैं।
क्या हालिया हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता समाप्त हो गई है?
नहीं, हालिया हमलों ने ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों को कमजोर किया है, लेकिन उसकी मिसाइल आपूर्ति और मोबाइल लॉन्चर काफी हद तक अप्रभावित रहे हैं। ईरान अभी भी अपनी मिसाइलों को दागने की तकनीकी क्षमता रखता है।
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