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अजित पवार और बीजेपी: सत्ता, सियासत और बेचैनी पर टिका गठबंधन

जुलाई 2023 में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का भाजपा-शिवसेना महायुति गठबंधन में शामिल होना एक आसान राजनीतिक बदलाव नहीं था। अजित पवार, जिन्हें राज्य के राजनीतिक हलकों में ‘दादा’ के नाम से जाना जाता है, ने अंततः 2023 में अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर एक निर्णायक कदम उठाया। यह कदम उन्होंने शरद पवार के प्रति कभी वफादार रहे वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक समर्थन से उठाया था।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने उनका भव्य स्वागत किया, लेकिन राज्य भाजपा इकाई और पार्टी के व्यापक राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र में इस रिश्ते को लेकर एक असहजता बनी रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उस समय अजित पवार से कहा था, “यह आपकी सही जगह है लेकिन आपने बहुत देर कर दी।” यह गठबंधन राजनीतिक मजबूरियों का परिणाम था, जिसमें अजित पवार की महत्वाकांक्षाएं और शरद पवार जैसे प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करने की भाजपा की राजनीतिक रणनीति शामिल थी।

2024 के लोकसभा चुनावों में जब महाराष्ट्र में महायुति का प्रदर्शन खराब रहा, तो दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों ने इसके लिए NCP के साथ गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया। RSS से जुड़े एक साप्ताहिक पत्र में प्रकाशित एक लेख में कहा गया कि भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक अजित पवार के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं कर पाए थे, जिन्हें पार्टी ने कुछ साल पहले सिंचाई घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए निशाना बनाया था।

अजित पवार ने अपने प्रशासनिक कौशल और ज्ञान से महायुति सरकार में महत्वपूर्ण योगदान दिया, विशेषकर कृषि, सहकारिता, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभागों में। हालांकि, गठबंधन में उनका समय चुनौतियों से भरा रहा, और उन्हें अपने दो मंत्रियों को बर्खास्त भी करना पड़ा। राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद, वे महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बने रहे।

महायुति गठबंधन में अजित पवार का प्रवेश

जुलाई 2023 में जब अजित पवार ने NCP के एक गुट के साथ महायुति सरकार में शामिल होने का फैसला किया, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम था। इस कदम ने उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बना दिया। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह और तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनका स्वागत किया। अमित शाह की टिप्पणी कि यह उनकी “सही जगह” थी, ने इस कदम के राजनीतिक महत्व को रेखांकित किया। हालांकि, राज्य स्तर पर भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता इस गठबंधन से असहज थे, क्योंकि वे वर्षों से अजित पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे थे।

2024 लोकसभा चुनाव और गठबंधन पर प्रभाव

2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। इस चुनावी झटके के बाद, गठबंधन के भीतर दरारें सामने आने लगीं। RSS से जुड़े एक साप्ताहिक पत्र में प्रकाशित एक लेख में हार का एक प्रमुख कारण अजित पवार की NCP के साथ गठबंधन को बताया गया। लेख में तर्क दिया गया कि भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता और समर्थक इस गठबंधन को दिल से स्वीकार नहीं कर पाए थे। इसका मुख्य कारण यह था कि भाजपा ने वर्षों तक अजित पवार पर सिंचाई घोटाले सहित कई भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और उन्हें राजनीतिक भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया था।

राजनीतिक मजबूरियां और पृष्ठभूमि

अजित पवार का भाजपा के साथ जाना राजनीतिक मजबूरियों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का परिणाम था। वह लंबे समय से अपने चाचा शरद पवार की छाया से बाहर निकलकर अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते थे। 2019 में भी उन्होंने एक असफल प्रयास किया था। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह गठबंधन 2019 में सत्ता से बाहर होने का बदला लेने का एक अवसर था। 2019 में, शरद पवार ने वैचारिक रूप से भिन्न दलों को मिलाकर महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन बनाया था, जिसने भाजपा को सत्ता से दूर कर दिया था। अजित पवार को अपने साथ मिलाकर भाजपा ने न केवल MVA को कमजोर किया, बल्कि शरद पवार के राजनीतिक वर्चस्व को भी सीधी चुनौती दी।

प्रशासनिक भूमिका और आंतरिक विवाद

सरकार में शामिल होने के बाद, अजित पवार का प्रशासनिक अनुभव महायुति सरकार के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ। उन्होंने कई सरकारों में वित्त विभाग संभाला था, और उनके ज्ञान का उपयोग कृषि, सहकारिता, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभागों में नीतिगत निर्णय लेने में किया गया। हालांकि, गठबंधन में रहते हुए उन्हें आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उन्हें अपने दो मंत्रियों, धनंजय मुंडे और माणिकराव कोकाटे को बर्खास्त करना पड़ा। मुंडे को बीड़ में एक सरपंच की हत्या के मामले में उनके करीबी सहयोगी वाल्मीक कराड के कथित संबंधों के बाद इस्तीफा देना पड़ा, जबकि कोकाटे को एक कथित आवास धोखाधड़ी के मामले में पद छोड़ना पड़ा।

स्थानीय चुनाव और भाजपा के साथ टकराव

2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद, राज्य में नगर निगम चुनाव सभी दलों के लिए एक चुनौती बन गए, खासकर NCP के लिए जिसकी जमीनी उपस्थिति भाजपा के विस्तार से खतरे में थी। इस स्थिति में, अजित पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के लिए अपने चाचा शरद पवार के साथ चुनाव-पूर्व समझौता किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर तीखे हमले किए और “भ्रष्टाचार के राक्षस को खत्म करने” का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा, “वे सत्ता के भूखे हैं। खुली लूट चल रही है।” इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने उन्हें चेतावनी देते हुए कहा, “अपने गिरेबान में झांको… अगर हम अपना मुंह खोलेंगे, तो वह जानते हैं कि यह कहां तक जाएगा।”

एक अनुभवी प्रशासक और जमीनी नेता

अजित पवार को सरकार में उनकी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाना जाता था। वह प्रत्येक दिन सुबह 6 बजे काम शुरू करते थे और अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध थे। वह एक जमीनी नेता थे जिन्होंने राज्य के सहकारी क्षेत्र से अपनी राजनीति शुरू की थी। उन्हें हर तालुका और सिंचाई परियोजना की गहरी जानकारी थी। हालांकि, बारामती से 8 बार विधायक और कई बार मंत्री रहने के बावजूद, वह कभी भी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। जब उनसे इस पद की दौड़ में होने के बारे में पूछा जाता, तो वह कहते थे, “जब आपके कार्यकर्ता नारे लगाते हैं तो अच्छा लगता है… लेकिन मैं जमीनी हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ हूं। राजनीति संख्याओं का खेल है।”

अजित पवार ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में यथार्थवाद का प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण ताकत बनाया। 2023 में लिया गया उनका निर्णय उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया।

FAQs

अजित पवार महायुति गठबंधन में कब शामिल हुए?

अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP जुलाई 2023 में भाजपा-शिवसेना महायुति गठबंधन में शामिल हुई और वे राज्य के उपमुख्यमंत्री बने।

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद अजित पवार के गठबंधन की आलोचना क्यों हुई?

2024 के लोकसभा चुनावों में महायुति के खराब प्रदर्शन के बाद, RSS से जुड़े एक प्रकाशन ने कहा कि भाजपा समर्थक अजित पवार के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं कर पाए थे, क्योंकि भाजपा ने पहले उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।

अजित पवार को अपने किन दो मंत्रियों को बर्खास्त करना पड़ा था?

अजित पवार को अपने दो मंत्रियों, धनंजय मुंडे और माणिकराव कोकाटे को बर्खास्त करना पड़ा। मुंडे को एक हत्या के मामले में उनके सहयोगी के कथित लिंक के कारण और कोकाटे को एक कथित आवास धोखाधड़ी के कारण इस्तीफा देना पड़ा।

अजित पवार की प्रशासनिक विशेषज्ञता किन क्षेत्रों में थी?

अजित पवार को वित्त, कृषि, सहकारी क्षेत्र, जल संसाधन और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभागों में उनके प्रशासनिक कौशल और नीतिगत ज्ञान के लिए जाना जाता था।

मुख्यमंत्री पद को लेकर अजित पवार का क्या दृष्टिकोण था?

अजित पवार ने हमेशा कहा कि वह जमीनी हकीकत से वाकिफ हैं और राजनीति संख्याओं का खेल है। वह मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा को लेकर यथार्थवादी दृष्टिकोण रखते थे।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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