संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रमुख सैन्य ठिकाने ड्रोन हमलों से असुरक्षित हैं, जबकि नीतियां इसके विपरीत अनिवार्य करती हैं। यह चेतावनी पेंटागन के एक वॉचडॉग रिपोर्ट में दी गई है। इस गंभीर सुरक्षा चूक का मुख्य कारण नीतियों और नियमों को लेकर नौकरशाही में फैला भ्रम बताया जा रहा है।
रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल द्वारा 20 जनवरी को जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि किन सैन्य ठिकानों को ड्रोन-रोधी सुरक्षा के दायरे में रखा जाना चाहिए। इस भ्रम के कारण, मानव रहित हवाई प्रणालियों (ड्रोन) से बचाव के उपायों में चौंकाने वाली कमियां सामने आई हैं, यहां तक कि उन ठिकानों पर भी जहां पहले कई बार ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं हो चुकी हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान, जहां उन्नत हथियार प्रणालियों और विमानों का संचालन होता है, ड्रोन-रोधी सुरक्षा के दायरे से बाहर हैं। यह स्थिति तब है जब पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों का खतरा काफी बढ़ गया है।
इस खुलासे ने अमेरिकी सैन्य तैयारियों और घरेलू सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं, क्योंकि दुश्मन ताकतें इन कमजोरियों का फायदा उठा सकती हैं।
पेंटागन की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
रक्षा विभाग के महानिरीक्षक (Inspector General) की रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने ड्रोन हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा नीतियों के बावजूद, इन ठिकानों पर ड्रोन-रोधी रक्षा प्रणाली (C-UAS) या तो मौजूद नहीं है या फिर उसे उपयोग करने की मंजूरी नहीं है। इस समस्या की जड़ नौकरशाही से जुड़ी उलझनों और नीतियों की अस्पष्टता में निहित है। जांचकर्ताओं ने पाया कि अलग-अलग सैन्य सेवाओं के पास ड्रोन-रोधी प्रणालियों की मंजूरी के लिए अलग-अलग नियम हैं, जिससे एकरूपता का अभाव है।
महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने भी असुरक्षित
रिपोर्ट में कई हैरान करने वाले उदाहरण दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, एरिजोना में स्थित ल्यूक एयर फोर्स बेस, जहां दुनिया के 75 प्रतिशत F-35 पायलटों को प्रशिक्षण दिया जाता है, को ड्रोन सुरक्षा के लिए “कवर की गई सुविधा” के रूप में नामित नहीं किया गया है। अमेरिकी कानून के तहत, केवल कुछ विशेष श्रेणियों, जैसे परमाणु मिसाइल सुविधाओं या हथियार परीक्षण स्थलों को ही अनिवार्य ड्रोन-रोधी सुरक्षा मिलती है, और प्रशिक्षण अड्डे इस सूची में नहीं हैं। इसी तरह, कैलिफोर्निया में स्थित एयर फोर्स प्लांट 42, जहां ग्लोबल हॉक जैसे ड्रोन के स्पेयर पार्ट्स बनते हैं, की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। 2024 में यहां कई ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं हुईं, लेकिन अधिकारी यह तय नहीं कर पाए कि यह सुरक्षा के दायरे में आता है या नहीं।
नीतियों और नियमों में भ्रम की स्थिति
इस सुरक्षा चूक का मुख्य कारण अमेरिकी रक्षा विभाग (DOD) द्वारा जारी की गई 20 से अधिक अलग-अलग नीतियां हैं, जिनमें ड्रोन-रोधी प्रणालियों की तैनाती पर स्पष्ट मार्गदर्शन का अभाव है। अमेरिकी संहिता के सेक्शन 130i, टाइटल 10 के तहत कुछ कमांडरों को ड्रोन को मार गिराने का अधिकार है, जबकि अन्य को ऐसा करने पर आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, नीतियों में स्पष्टता न होने के कारण, बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों के पास ड्रोन-रोधी क्षमताओं का उपयोग करने के लिए परिचालन की मंजूरी ही नहीं है। इस भ्रम की वजह से सुरक्षा में गंभीर खामियां पैदा हो रही हैं।
विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता
इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट के निष्कर्ष अमेरिकी सेना के जॉइंट काउंटर-स्मॉल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम ऑफिस और RAND कॉर्पोरेशन द्वारा किए गए वॉरगेम्स के परिणामों से मेल खाते हैं। इन अभ्यासों में भी यह पाया गया कि अमेरिका के लगभग 500 सैन्य ठिकानों के बीच ड्रोन से निपटने के नियमों को लेकर कोई एकरूपता नहीं है। पिछले साल यूक्रेन के ‘ऑपरेशन स्पाइडरवेब’ के बाद यह चिंता और बढ़ गई है, जिसमें यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के अंदर घुसकर हवाई ठिकानों पर खड़े विमानों को नष्ट कर दिया था। विशेषज्ञों को डर है कि अगर यूक्रेन ऐसा कर सकता है, तो आतंकवादी और अन्य विरोधी ताकतें भी अमेरिका में ऐसा ही कर सकती हैं। नवीनतम रक्षा समाचार के लिए हमारे साथ बने रहें।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
इस समस्या से निपटने के लिए, रक्षा विभाग ने 2025 में जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य ड्रोन-रोधी प्रयासों में समन्वय स्थापित करना है। इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट ने सिफारिश की है कि यह नई टास्क फोर्स मौजूदा नीतियों की समीक्षा करे और एक एकीकृत नीति जारी करे। इस नीति में स्पष्ट भूमिकाएं, जिम्मेदारियां, अधिकार और सुविधाओं के लिए कवर पदनाम की आवश्यकताएं परिभाषित होनी चाहिए। साथ ही, ड्रोन-रोधी प्रणालियों की मंजूरी के लिए एक मानकीकृत और सुव्यवस्थित प्रक्रिया बनाने की भी सिफारिश की गई है।
संक्षेप में, पेंटागन की आंतरिक रिपोर्ट ने यह उजागर किया है कि नौकरशाही की उलझनों और अस्पष्ट नीतियों के कारण अमेरिका के प्रमुख सैन्य ठिकाने ड्रोन हमलों के प्रति गंभीर रूप से असुरक्षित हैं। जब तक इन मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक ये महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान एक बड़े खतरे का सामना करते रहेंगे।
FAQs
पेंटागन की रिपोर्ट में क्या चेतावनी दी गई है?
पेंटागन की वॉचडॉग रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका के कई प्रमुख सैन्य ठिकाने मौजूदा नीतियों के बावजूद ड्रोन हमलों से असुरक्षित हैं।
सैन्य ठिकानों की सुरक्षा में मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या नौकरशाही में फैला भ्रम और अस्पष्ट नीतियां हैं, जिसके कारण यह तय नहीं हो पा रहा है कि किन ठिकानों को ड्रोन-रोधी सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
ल्यूक एयर फोर्स बेस क्यों असुरक्षित है?
ल्यूक एयर फोर्स बेस एक प्रशिक्षण अड्डा है, और अमेरिकी कानून के तहत प्रशिक्षण अड्डों को अनिवार्य ड्रोन-रोधी सुरक्षा की सूची में शामिल नहीं किया गया है, भले ही वहां F-35 जैसे उन्नत विमानों का प्रशिक्षण होता हो।
इस समस्या को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाया गया है?
इस समस्या के समाधान के लिए 2025 में जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 का गठन किया गया है, जिसे नीतियों की समीक्षा कर एक एकीकृत और स्पष्ट नीति बनाने की सिफारिश की गई है।
क्या अन्य अध्ययनों में भी यही बात सामने आई है?
हां, अमेरिकी सेना और RAND कॉर्पोरेशन द्वारा किए गए वॉरगेम्स और अध्ययनों में भी समान निष्कर्ष सामने आए हैं, जिनमें नीतियों में भिन्नता और अधिकार को लेकर भ्रम की स्थिति पाई गई।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


