अमेरिकी डॉलर में तेज बिकवाली के बीच सोने की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार में यह हलचल तेज हो गई, जिसमें उन्होंने हाल के दिनों में डॉलर में आई गिरावट पर कोई चिंता नहीं जताई। ट्रंप की नीतियों को लेकर मुद्रा बाजारों में अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों के बाद डॉलर के मूल्य में और गिरावट आई, जबकि सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्ति की मांग बढ़ गई। मंगलवार को डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में चार साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। इस गिरावट का असर बुधवार को एशियाई बाजारों में भी देखा गया, जहां डॉलर में और कमजोरी आई।
इस बीच, सोने की कीमतें $5,200 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को पार कर गईं। यह उछाल वैश्विक निवेशकों के बीच अमेरिकी आर्थिक नीतियों के प्रति बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है। डॉलर की कमजोरी का फायदा यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी मुद्राओं को भी मिला, जो अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
ट्रंप की टिप्पणियों का बाजार पर असर
मुद्रा बाजार में ताजा उथल-पुथल तब शुरू हुई जब आयोवा में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप से डॉलर की हालिया गिरावट के बारे में पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं, मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है।” उन्होंने आगे कहा, “डॉलर के मूल्य को देखें। हम जो कारोबार कर रहे हैं उसे देखें। डॉलर, डॉलर बहुत अच्छा कर रहा है।”
उनकी इस टिप्पणी के बाद बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। टोक्यो में कारोबारियों ने ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी, जिससे येन में तीन दिनों से जारी तेजी और बढ़ गई। डॉलर के मुकाबले येन ¥152.3 के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की जमकर खरीदारी की। एशिया में बुधवार को सोने की कीमत 0.7 प्रतिशत बढ़कर $5,218 प्रति ट्रॉय औंस हो गई। इससे पहले मंगलवार को इसमें 3 प्रतिशत की जोरदार तेजी आई थी। आर्थिक या राजनीतिक अस्थिरता के समय, निवेशक अक्सर सोने को एक विश्वसनीय संपत्ति मानते हैं क्योंकि यह ऐतिहासिक रूप से अपना मूल्य बनाए रखता है।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी भारी उछाल देखा गया। मंगलवार को चांदी की कीमत 8 प्रतिशत से अधिक बढ़कर $112 प्रति औंस पर पहुंच गई। यह दर्शाता है कि निवेशक जोखिम भरे विकल्पों से बचकर कीमती धातुओं में अपना पैसा लगा रहे हैं।
डॉलर में गिरावट और अन्य मुद्राओं का प्रदर्शन
अन्य प्रमुख मुद्राओं की टोकरी के मुकाबले डॉलर मंगलवार को 1.3 प्रतिशत गिर गया, जिससे यह चार साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया। 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें 2.6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बुधवार को एशिया में इसमें 0.1 प्रतिशत की और कमजोरी आई।
अमेरिकी मुद्रा की इस गिरावट के बीच, यूके पाउंड और यूरो 2021 के मध्य के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यूरोपीय मुद्रा यूरो 1.4 प्रतिशत बढ़कर $1.204 पर पहुंच गई, जबकि स्टर्लिंग 1.2 प्रतिशत उछलकर $1.384 हो गया। येन ने भी डॉलर के मुकाबले अपनी मजबूती जारी रखी।
विश्लेषकों ने बताई गिरावट की वजहें
रॉयल लंदन एसेट मैनेजमेंट के ट्रेवर ग्रीथम ने कहा, “सोने की मजबूती और डॉलर की कमजोरी ट्रंप द्वारा अचानक और अव्यवस्थित तरीके से बनाई जा रही नीतियों पर गंभीर संदेह को दर्शाती है।” उन्होंने कनाडा और दक्षिण कोरिया के खिलाफ प्रशासन के हालिया कदमों का हवाला दिया।
MUFG के विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिकी नीति-निर्माण को लेकर चिंताओं के कारण यूरो “एंटी-डॉलर” की भूमिका से लाभान्वित हो रहा है। वहीं, जेफरीज के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री थॉमस सिमंस ने कहा, “अव्यवस्थित अमेरिकी नीति का मतलब है कि भले ही जोखिम वाली संपत्तियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हों, डॉलर पर असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक इस बात से आश्वस्त नहीं हैं कि डॉलर में गिरावट खत्म हो गई है।”
यूरो और पाउंड में मजबूती के संकेत
अटलांटिक के दूसरी ओर, यूरोप में आर्थिक और राजनीतिक विकास ने निवेशकों को यूरो और स्टर्लिंग के प्रति अधिक सकारात्मक बनाया है। यूबीएस ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट के कॉन्स्टेंटिन बोल्ज़ के अनुसार, यूरोजोन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी के हालिया आंकड़ों ने निवेशकों की धारणा को बढ़ावा दिया है।
जर्मनी की अर्थव्यवस्था 2025 में 0.2 प्रतिशत बढ़ी, जो 2022 के बाद पहली सकारात्मक वृद्धि है। इसके अलावा, जनवरी में निर्माण क्षेत्र में गतिविधि का एक महत्वपूर्ण संकेतक 2022 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इन सकारात्मक संकेतों से यूरोपीय मुद्राओं को समर्थन मिल रहा है।
अमेरिका के सामने अन्य चुनौतियां
विश्लेषकों के अनुसार, कई मुद्दे एक साथ अमेरिकी मुद्रा पर दबाव डाल रहे हैं। इनमें एक चिंता यह भी है कि संघीय सरकार के कुछ हिस्से शनिवार तक बंद हो सकते हैं। इसके अलावा, निवेशक इस बात को लेकर भी अनिश्चित हैं कि ट्रंप मई में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जे पॉवेल का कार्यकाल समाप्त होने पर किसे नामित करेंगे। अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच तनाव, विशेष रूप से ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की मांगों के कारण, भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है।
बाजार में यह उथल-पुथल डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों, अमेरिकी नीतियों पर बढ़ती चिंताओं और निवेशकों द्वारा सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ाने के कारण हुई है। डॉलर अपने चार साल के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं।
FAQs
अमेरिकी डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां और उनकी टिप्पणियां हैं, जिनसे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके अलावा, अमेरिकी सरकार के बंद होने का खतरा और फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष को लेकर अनिश्चितता भी प्रमुख कारण हैं।
सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर क्यों पहुंच गई?
जब वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश मानते हैं। डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी नीतियों पर चिंताओं के कारण निवेशकों ने सोने में भारी खरीदारी की, जिससे इसकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने डॉलर की गिरावट पर क्या कहा?
डॉलर की गिरावट पर पूछे जाने पर, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह चिंतित नहीं हैं और उन्हें लगता है कि यह “बहुत अच्छा” है। उन्होंने कहा कि डॉलर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
डॉलर के मुकाबले कौन सी प्रमुख मुद्राएं मजबूत हुईं?
डॉलर के मुकाबले यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख मुद्राएं मजबूत हुई हैं। यूरो और पाउंड 2021 के मध्य के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए।
चांदी की कीमतों पर इसका क्या असर हुआ?
सोने की तरह चांदी को भी एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। डॉलर में गिरावट और बाजार की अनिश्चितता के बीच चांदी की कीमतों में भी 8% से अधिक की भारी तेजी आई और यह $112 प्रति औंस पर पहुंच गई।
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