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RCEP एक बड़ी सफलता, लेकिन अभी भी सुधार की जरूरत

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते की पहली सामान्य समीक्षा वर्ष 2026 के लिए निर्धारित की गई है। यह समीक्षा मौजूदा दौर की गंभीर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस व्यापारिक गुट की प्रासंगिकता और क्षमता का आकलन करने के लिए एक समय पर मिला अवसर है।

RCEP दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देश भागीदार हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार को सुगम बनाना, टैरिफ कम करना और निवेश को बढ़ावा देना है। यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और जनसंख्या के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

2026 में होने वाली यह समीक्षा समझौते के कार्यान्वयन और उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़े प्रभावों का मूल्यांकन करेगी। यह प्रक्रिया समझौते के ढांचे का ही एक हिस्सा है, जो समय-समय पर इसके प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति देता है।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) क्या है?

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) एक मुक्त व्यापार समझौता है जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को गहरा करना है। यह समझौता वस्तुओं, सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में व्यापार के नियमों को सरल और एकीकृत करता है। इसका लक्ष्य एक खुला, समावेशी और नियम-आधारित व्यापार और निवेश वातावरण बनाना है।

समझौते में शामिल सदस्य देश

RCEP समझौते में कुल 15 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के दस सदस्य देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम) हैं। इनके अलावा, आसियान के पांच मुक्त व्यापार भागीदार देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया भी इसका हिस्सा हैं।

2026 की निर्धारित समीक्षा

समझौते के नियमों के अनुसार, इसकी पहली सामान्य समीक्षा 2026 में आयोजित की जाएगी। यह एक औपचारिक प्रक्रिया है जो सभी सदस्य देशों को समझौते के अब तक के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने का एक मंच प्रदान करेगी। इस दौरान, समझौते के विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन की प्रगति और उससे हुए आर्थिक लाभों का जायजा लिया जाएगा।

वैश्विक अनिश्चितता और समीक्षा का महत्व

यह समीक्षा एक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। इस संदर्भ में, 2026 की समीक्षा यह देखने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगी कि RCEP इन अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने में कितना प्रभावी रहा है।

समझौते पर भारत का रुख

भारत RCEP की प्रारंभिक वार्ताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। हालांकि, कई वर्षों की बातचीत के बाद, भारत ने नवंबर 2019 में इस समझौते में शामिल नहीं होने का फैसला किया। भारत सरकार ने अपने घरेलू उद्योगों, किसानों और कुछ सदस्य देशों के साथ व्यापार घाटे से संबंधित चिंताओं को इस फैसले का कारण बताया था। वर्तमान में, भारत RCEP का सदस्य नहीं है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसके प्रभाव पर नजर रखी जाती है।

संक्षेप में, 2026 में RCEP की पहली सामान्य समीक्षा एक निर्धारित प्रक्रिया है जो मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इस बड़े व्यापारिक गुट के प्रदर्शन और प्रासंगिकता का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी।

FAQs

RCEP का पूरा नाम क्या है?

RCEP का पूरा नाम रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (Regional Comprehensive Economic Partnership) है, जिसे हिंदी में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी कहा जाता है।

यह समझौता कब लागू हुआ था?

RCEP समझौता 1 जनवरी 2022 को लागू हुआ था, जब आवश्यक संख्या में सदस्य देशों ने इसकी पुष्टि कर दी थी।

RCEP में कुल कितने सदस्य देश हैं?

इस समझौते में कुल 15 सदस्य देश हैं, जिनमें 10 आसियान देश और उनके 5 मुक्त व्यापार भागीदार देश शामिल हैं।

क्या भारत इस समझौते का हिस्सा है?

नहीं, भारत RCEP समझौते का हिस्सा नहीं है। भारत ने लंबी बातचीत के बाद 2019 में इस समझौते में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया था।

RCEP की पहली समीक्षा कब होगी?

समझौते के प्रावधानों के अनुसार, इसकी पहली सामान्य समीक्षा वर्ष 2026 में होना निर्धारित है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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