पेंटागन की नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (National Defense Strategy) अमेरिकी रक्षा नीति में दशकों से स्थापित सिद्धांतों से एक बड़ा विचलन प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नई दिशा न केवल एक महत्वपूर्ण बदलाव है, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ भी नहीं हो सकती है। यह रणनीति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के उस दौर की परिकल्पना करती है, जब अमेरिका अपने गोलार्ध में सुरक्षित था और उसकी सेना किसी भी अन्य देश से कहीं बेहतर थी।
ट्रंप प्रशासन द्वारा पेश की गई यह नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS) उस “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” को खारिज करती है, जो पिछले 80 वर्षों से दोनों प्रमुख अमेरिकी दलों की राष्ट्रीय रक्षा का मार्गदर्शक सिद्धांत रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उदार लोकतंत्र के मूल्यों को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करना था।
विशेषज्ञों ने इस रणनीति के आंतरिक विरोधाभासों और इसके ऐतिहासिक दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह रणनीति न केवल पहले के ट्रंप प्रशासन की अपनी रक्षा रणनीति के खिलाफ है, बल्कि यह अमेरिकी सहयोगियों के योगदान को भी गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। इस दस्तावेज़ में व्यक्तिगत प्रभाव भी स्पष्ट है, जिसमें ट्रंप का नाम 47 बार उल्लेखित है, जो पिछली रणनीतियों के प्रारूप से बिल्कुल अलग है।
रणनीति में बड़े बदलाव
नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति का सबसे बड़ा बदलाव “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” को अस्वीकार करना है, जिसे दस्तावेज़ में एक “काल्पनिक विचार” कहा गया है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित उस वैश्विक ढांचे से एक पूर्ण विचलन है जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा मूल्यों पर जोर देता है।
इसके बजाय, रणनीति मोनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine) पर लौटने का आह्वान करती है, जो गोलार्धीय अलगाववाद पर केंद्रित है। इसमें एक “ट्रंप कोरोलरी” भी शामिल है, जो पश्चिमी गोलार्ध में “अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व” स्थापित करने की बात करता है, ताकि विरोधी ताकतों को इस क्षेत्र में अपनी क्षमताएं स्थापित करने से रोका जा सके। अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के एक सीनियर फेलो टॉड हैरिसन ने बताया कि यह अमेरिकी मूल्यों को आगे बढ़ाकर अमेरिकी हितों को साधने की पारंपरिक सोच से अलग है।
नई प्राथमिकताएं और लक्ष्य
रणनीति में प्राथमिकताओं को फिर से परिभाषित किया गया है। अब पहली प्राथमिकता केवल अमेरिकी मातृभूमि की रक्षा करना नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी गोलार्ध की सुरक्षा करना है। इसमें ग्रीनलैंड और पनामा नहर तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने जैसे स्पष्ट लक्ष्य जोड़े गए हैं। यह रणनीति “हस्तक्षेपवाद, अंतहीन युद्धों, शासन परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण” को समाप्त करने का संकल्प लेती है।
दस्तावेज़ में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से खतरों का वर्णन करने वाले खंड हैं, लेकिन चीन को ताइवान पर कब्जा करने से रोकने का कोई उल्लेख नहीं है। सीमाओं को सुरक्षित करना अभी भी सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए रक्षा विभाग, होमलैंड सुरक्षा विभाग को सहायता प्रदान करेगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह सहायता कैसे प्रदान की जाएगी।
पिछली नीतियों से टकराव
यह रणनीति न केवल पिछले 80 वर्षों की द्विदलीय विदेश नीति से अलग है, बल्कि यह ट्रंप के पहले कार्यकाल की रक्षा रणनीति से भी टकराती है। पहले कार्यकाल में, रक्षा सचिव जिम मैटिस ने स्थापित सहयोगियों से हटने के प्रयासों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। उनके उत्तराधिकारी, मार्क एस्पर ने भी 75 वर्षों से चली आ रही नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे ट्रंप प्रशासन की रक्षा रणनीति पहले प्रशासन की रणनीति के साथ “युद्ध” में है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के एक वरिष्ठ सलाहकार मार्क कैन्सियन ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह नई रणनीति पहले के ट्रंप प्रशासन सहित अब तक के सभी राष्ट्रीय-सुरक्षा विचारों को “विफल और भोला” मानती है।
विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवाल
रक्षा विशेषज्ञों ने इस रणनीति की स्थिरता और तार्किकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। टॉड हैरिसन ने इसमें “आंतरिक असंगति” की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि रणनीति यह स्वीकार करती है कि साइबर और मिसाइल खतरों के युग में दो महासागर अब अमेरिका की रक्षा नहीं कर सकते, लेकिन साथ ही यह गोलार्ध में वापस सिमटने का प्रस्ताव करती है, जैसे कि ये महासागर अभी भी सुरक्षा प्रदान करेंगे।
यू.एस. नॉर्दर्न कमांड के पूर्व कमांडर और सेवानिवृत्त एयर फोर्स जनरल ग्लेन वैनहर्क ने कहा कि रक्षा विभाग दुनिया में सबसे सक्षम है, लेकिन सवाल यह है कि सीमित संसाधनों का उपयोग कैसे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन मिशनों के लिए जिम्मेदार एजेंसियों को पूरी तरह से संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, और रक्षा विभाग केवल आवश्यक होने पर अतिरिक्त क्षमता प्रदान कर सकता है।
सहयोगियों के प्रति दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति इस झूठे आधार पर टिकी है कि अमेरिकी सहयोगियों ने अमेरिका की उदारता का फायदा उठाया है। रणनीति में कहा गया है कि पिछले प्रशासन ने NATO को “फ्री-राइड” करने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि, तथ्य यह है कि बाइडन प्रशासन ने NATO देशों को अपना रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया था, और 2020 के बाद से 2% GDP खर्च करने वाले देशों की संख्या दोगुनी हो गई थी।
यूक्रेन युद्ध के जवाब में, यूरोपीय संघ ने 124 बिलियन डॉलर की सहायता दी है, जबकि अमेरिका ने 128 बिलियन डॉलर दिए हैं। जीडीपी के अनुपात में जर्मनी, यूके और कनाडा ने अमेरिका से अधिक योगदान दिया है। रणनीति में इज़राइल को एक “आदर्श सहयोगी” कहा गया है, लेकिन यह उल्लेख नहीं किया गया है कि अमेरिका 1999 से उसे सालाना अरबों डॉलर की सैन्य सहायता दे रहा है।
पेंटागन की नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति अमेरिकी विदेश और रक्षा नीति में एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत देती है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बजाय गोलार्धीय प्रभुत्व और अलगाववाद पर ध्यान केंद्रित करती है, एक ऐसा कदम जिसकी विशेषज्ञों द्वारा व्यापक आलोचना की गई है और इसकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर संदेह जताया गया है।
FAQs
नई अमेरिकी रक्षा रणनीति क्या है?
यह एक नई नीतिगत रूपरेखा है जो वैश्विक सहयोग के बजाय पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व स्थापित करने, सीमाओं को सुरक्षित करने और हस्तक्षेपवादी नीतियों को समाप्त करने पर केंद्रित है।
यह पिछली रणनीतियों से कैसे अलग है?
यह रणनीति पिछले 80 वर्षों की द्विदलीय अमेरिकी नीति से बिल्कुल अलग है, जो “नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” और वैश्विक सहयोगियों के साथ साझेदारी पर आधारित थी।
‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ का क्या मतलब है?
यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित एक वैश्विक ढांचा है जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संधियों और संस्थाओं के माध्यम से उदार लोकतंत्र और सहयोग को बढ़ावा देता है ताकि वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों ने इस पर क्या चिंताएं जताई हैं?
विशेषज्ञों ने इसकी दीर्घकालिक स्थिरता पर संदेह जताया है, इसके आंतरिक विरोधाभासों (जैसे आधुनिक खतरों के बावजूद अलगाववाद पर जोर) की ओर इशारा किया है, और सहयोगियों के योगदान के बारे में इसके दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।
रणनीति में किन देशों को खतरा बताया गया है?
इस दस्तावेज़ में रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से उत्पन्न होने वाले खतरों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


