मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-PG) के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में सबसे अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली रह गई हैं। देश भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दूसरे दौर की काउंसलिंग पूरी होने के बावजूद 18,000 से अधिक पीजी सीटें नहीं भर पाई हैं, जो चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में एक बड़ी चुनौती को दर्शाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। सीटों की इस बड़ी रिक्ति के कारण, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने एक संशोधित क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल जारी करने का निर्णय लिया। इस कदम के तहत, NEET-PG के तीसरे दौर की काउंसलिंग के लिए आरक्षित श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कट-ऑफ को घटाकर शून्य कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक सीटों को भरा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कॉलेजों की अत्यधिक फीस, नॉन-क्लिनिकल विषयों के प्रति छात्रों की अरुचि और शिक्षण सुविधाओं से जुड़े मुद्दे इन खाली सीटों के मुख्य कारण हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश में पीजी मेडिकल सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बावजूद हजारों सीटों का खाली रहना एक गंभीर चिंता का विषय है।
3 अगस्त 2025 को आयोजित NEET PG 2025 परीक्षा में 2,42,000 से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिसका परिणाम 19 अगस्त 2025 को घोषित किया गया था। यह परीक्षा देश के 301 शहरों में 1052 केंद्रों पर कंप्यूटर-आधारित प्रारूप में आयोजित की गई थी।
देशभर में 18,000 से अधिक सीटें खाली
स्वास्थ्य मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, दूसरे दौर की काउंसलिंग समाप्त होने के बाद भी पूरे भारत के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में 18,000 से अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली हैं। यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पीजी सीटों की संख्या 2020 में 40,858 से बढ़कर लगभग 80,291 हो गई है, जिसमें 17,707 DNB और डिप्लोमा सीटें भी शामिल हैं।
किन राज्यों में हैं सबसे ज्यादा खाली सीटें?
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के डेटा के अनुसार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में खाली सीटों की संख्या सबसे अधिक है। इन तीनों राज्यों में से प्रत्येक में निजी/प्रबंधन और NRI कोटे के तहत 2000 से अधिक सीटें खाली हैं। यह इन राज्यों में चिकित्सा शिक्षा की लागत और अन्य स्थानीय कारकों की ओर इशारा करता है।
सरकार का कदम: क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल शून्य किया गया
बड़ी संख्या में सीटों को खाली रहने से रोकने के लिए, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि इस वर्ष NEET-PG के तीसरे दौर के लिए आरक्षित श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कट-ऑफ को घटाकर शून्य कर दिया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य अधिक उम्मीदवारों को काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र बनाना है।
किन विषयों में नहीं मिल रहे छात्र?
आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ विशेष विषयों में सीटें सबसे अधिक खाली हैं। इनमें माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, फॉरेंसिक मेडिसिन और फार्माकोलॉजी जैसे नॉन-क्लिनिकल विषय शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, जनरल मेडिसिन, रेडियो-डायग्नोसिस, जनरल सर्जरी, डर्मेटोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग और बाल रोग जैसे क्लिनिकल विषयों की मांग सबसे अधिक बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार सीटों के खाली रहने के कारण
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIIMS) डॉक्टर्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक रोहन कृष्णन के अनुसार, निजी कॉलेजों की फीस संरचना सीटों के खाली रहने का एक मुख्य कारण है, जो 20 लाख से शुरू होकर 4 करोड़ तक जाती है। एक अन्य वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि शिक्षा की अत्यधिक लागत, नॉन-क्लिनिकल विषयों को चुनने में हिचकिचाहट, अच्छे शिक्षण स्टाफ की कमी, बुनियादी ढांचे, रोगी भार और स्टाइपेंड जैसे मुद्दे भी बड़ी चुनौतियां हैं।
देश में पीजी मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद, 18,000 से अधिक सीटों का खाली रहना चिंता का विषय है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को कम करने जैसे कदम उठाए हैं, जबकि विशेषज्ञ निजी कॉलेजों की महंगी फीस और नॉन-क्लिनिकल विषयों के प्रति अरुचि को मुख्य कारण मानते हैं।
FAQs
NEET-PG 2025-26 में कितनी मेडिकल सीटें खाली रह गईं?
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दूसरे दौर की काउंसलिंग के बाद NEET-PG 2025-26 में 18,000 से अधिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली रह गईं।
किन राज्यों में सबसे अधिक PG मेडिकल सीटें खाली हैं?
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में सबसे अधिक PG मेडिकल सीटें खाली हैं। प्रत्येक राज्य में निजी, प्रबंधन और एनआरआई कोटे के तहत 2000 से अधिक सीटें रिक्त हैं।
सरकार ने खाली सीटों को भरने के लिए क्या कदम उठाया है?
खाली सीटों को भरने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने तीसरे दौर की काउंसलिंग के लिए आरक्षित श्रेणियों का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कट-ऑफ घटाकर शून्य कर दिया है।
किन मेडिकल विषयों की सीटें सबसे ज्यादा खाली हैं?
माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, फॉरेंसिक मेडिसिन और फार्माकोलॉजी जैसे नॉन-क्लिनिकल विषयों में सबसे अधिक सीटें खाली हैं।
मेडिकल सीटें खाली रहने का मुख्य कारण क्या बताया जा रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार, निजी मेडिकल कॉलेजों की अत्यधिक फीस (20 लाख से 4 करोड़ रुपये तक) और छात्रों की नॉन-क्लिनिकल विषयों के प्रति अरुचि सीटों के खाली रहने का मुख्य कारण है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


