भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष और विदेश मामलों की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास ने इस समझौते की सराहना की है। उन्होंने यूरोप की दीर्घकालिक साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नई दिल्ली में मंगलवार को ‘यूरोप, भारत और एक बदलती विश्व व्यवस्था’ सम्मेलन में बोलते हुए, कैलास ने स्वीकार किया कि बातचीत लंबी चली, लेकिन अब यूरोपीय संघ इस सौदे का पूरी निष्ठा से सम्मान करने का इरादा रखता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यूरोप की विश्वसनीयता और समझौतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।
इस आर्थिक समझौते के साथ-साथ, भारत और यूरोपीय संघ ने अपनी पहली सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भी शुरू की है। यह ऐतिहासिक कदम दोनों लोकतंत्रों के बीच बढ़ते भरोसे और रणनीतिक संरेखण को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य एक अस्थिर दुनिया में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह सहयोग दशकों के रक्षा उद्योग सहयोग पर आधारित है, जिसे अब और तेज किया जाएगा।
यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और बढ़ते संरक्षणवाद के बीच दोनों पक्ष अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। इस साझेदारी से रक्षा निर्माण, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
काजा कैलास का बयान
नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में काजा कैलास ने कहा, “जब मैं दुनिया भर में यात्रा करती हूं, तो मैं देखती हूं कि अधिक से अधिक देश यूरोप के साथ साझेदारी करने के इच्छुक हैं क्योंकि हम पूर्वानुमानित हैं – एक ऐसा गुण जिसे आज तेजी से महत्व दिया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “हम सौदों पर बातचीत करने में समय लेते हैं, लेकिन एक बार सहमत होने के बाद, हम उनका ईमानदारी से पालन करते हैं।”
कैलास ने यूरोपीय प्रतिबद्धताओं की विश्वसनीयता को वैश्विक कूटनीति में एक प्रमुख संपत्ति के रूप में उजागर किया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ अपने समझौतों को सावधानीपूर्वक लागू करता है और यह निर्भरता उसके मूल्य प्रस्ताव का एक आधार बन गई है। उन्होंने यह भी देखा कि कुछ महाशक्तियों द्वारा बहुपक्षीय व्यवस्था को फिर से आकार देने के प्रयासों के बीच व्यापार संबंधों को गहरा करने के लिए एक वास्तविक उत्साह है।
व्यापक सहयोग के क्षेत्र
काजा कैलास ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग की विशाल क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया, “हमने सुरक्षा, रक्षा, विदेश नीति, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा में अवसरों की पहचान की है।” इन मोर्चों पर साझा खुफिया और तथ्यात्मक जागरूकता की आवश्यकता के कारण यूरोपीय संघ और भारत अब औपचारिक बातचीत कर रहे हैं।
उन्होंने उल्लेख किया कि महाशक्तियां दुनिया को गुटों में विभाजित करना चाहती हैं, जो छोटे और मध्यम आकार के देशों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि हालांकि भारत कोई छोटा देश नहीं है, लेकिन नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने में यूरोपीय संघ-भारत सहयोग से दोनों को पारस्परिक लाभ होगा।
ऐतिहासिक सुरक्षा और रक्षा साझेदारी
इससे पहले, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक संयुक्त बयान में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया गया। बयान में कहा गया, “हम केवल अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत नहीं कर रहे हैं; हम एक तेजी से अस्थिर होती दुनिया में अपने लोगों की सुरक्षा की रक्षा कर रहे हैं।”
इस बयान में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों की पहली सुरक्षा और रक्षा साझेदारी की शुरुआत की घोषणा की गई। यह ऐतिहासिक समझौता यूरोप और भारत के बीच दशकों के रक्षा उद्योग सहयोग पर आधारित है, जिसे अब और तेज किया जाना तय है। यह साझेदारी दोनों पक्षों के बीच गहरे विश्वास को दर्शाती है।
साझेदारी के प्रमुख स्तंभ
नई साझेदारी के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें बढ़ी हुई समुद्री सुरक्षा शामिल है, जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में समुद्री डकैती का मुकाबला करने के लिए संयुक्त नौसैनिक अभ्यास। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले समुद्री वातावरण को सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
साझेदारी का लक्ष्य बढ़ते साइबर और हाइब्रिड खतरों का मुकाबला करना भी है, जो हर साल अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित कनेक्टिविटी और स्थितिजन्य जागरूकता के लिए अंतरिक्ष सुरक्षा पर समर्पित संवाद भी आयोजित किए जाएंगे। आतंकवाद-निरोध के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिसमें विश्वास-आधारित खुफिया जानकारी साझा करने के लिए एक सूचना सुरक्षा समझौते पर बातचीत चल रही है।
‘मेक इन इंडिया’ और रणनीतिक महत्व
यह रक्षा साझेदारी भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ पूरी तरह से मेल खाती है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इससे नौसैनिक जहाजों और साइबर सुरक्षा उपकरणों जैसे सैन्य हार्डवेयर के सह-उत्पादन के द्वार खुल सकते हैं।
यूरोप के लिए, जो यूक्रेन संघर्ष के बीच गोला-बारूद और विमानों के उत्पादन में बाधाओं का सामना कर रहा है, भारतीय साझेदारी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में मदद कर सकती है। भू-राजनीतिक रूप से, यह गठबंधन व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीतियों से जुड़ता है, जो इस क्षेत्र में सत्तावादी प्रभावों के खिलाफ लोकतांत्रिक एकजुटता को मजबूत करता है।
यह विकसित होता गठबंधन दोनों पक्षों के लिए एक रणनीतिक धुरी का संकेत देता है, जो एक बहुध्रुवीय दुनिया में आर्थिक एकीकरण को कठोर सुरक्षा सहयोग के साथ मिलाता है। भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात प्रोफाइल, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइलें और ड्रोन शामिल हैं, इसे यूरोपीय जरूरतों के लिए एक व्यवहार्य वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच संपन्न हुआ मुक्त व्यापार समझौता और नई सुरक्षा साझेदारी दोनों पक्षों के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह सहयोग न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि एक नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने में भी मदद करेगा।
FAQs
काजा कैलास कौन हैं?
काजा कैलास यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष हैं। वह एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री भी रह चुकी हैं।
भारत-यूरोपीय संघ के नए समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का दोहरा उद्देश्य है। पहला, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और दूसरा, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के माध्यम से रणनीतिक सहयोग बढ़ाना।
सुरक्षा साझेदारी में कौन से प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं?
इस साझेदारी में समुद्री सुरक्षा, साइबर और हाइब्रिड खतरों का मुकाबला, अंतरिक्ष सुरक्षा पर संवाद और आतंकवाद-निरोध जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
काजा कैलास ने यूरोप की विश्वसनीयता पर जोर क्यों दिया?
उन्होंने यूरोप की विश्वसनीयता पर जोर दिया ताकि यह रेखांकित किया जा सके कि यूरोपीय संघ अपने द्वारा किए गए समझौतों का पूरी निष्ठा से पालन करता है, जो इसे एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार बनाता है।
भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं के संयुक्त बयान में क्या घोषणा की गई?
संयुक्त बयान में दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों, भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहली बार एक व्यापक सुरक्षा और रक्षा साझेदारी शुरू करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई।
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