भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय संघ को होने वाले भारतीय कपड़ा और चमड़ा निर्यात पर टैरिफ समाप्त कर दिया गया है। इस कदम को इन क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, जो पहले अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% आयात शुल्क से प्रभावित थे। इस समझौते से भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में एक बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
इस नए व्यापारिक प्रावधान के अनुसार, कपड़ा, परिधान और वस्त्रों पर आयात शुल्क को 12% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इसी तरह, चमड़ा और फुटवियर उत्पादों पर लगने वाले 17% के टैरिफ को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। शुल्क हटाने का यह निर्णय भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे पूरी तरह से खोल देगा।
इस बदलाव से भारतीय निर्माताओं के लिए बड़े ऑर्डर आने की संभावना है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी। विशेष रूप से, तमिलनाडु के तिरुपुर से लेकर पंजाब के लुधियाना तक के विनिर्माण केंद्रों को इससे सीधा लाभ मिल सकता है। साथ ही, चमड़ा उद्योग में भी आगरा-कानपुर और वेल्लोर-अंबूर जैसे क्लस्टरों से सोर्सिंग बढ़ने की उम्मीद है।
नई टैरिफ दरें और प्रमुख बदलाव
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापारिक समझौते के तहत दो प्रमुख क्षेत्रों के लिए आयात शुल्क में महत्वपूर्ण कटौती की गई है। कपड़ा, परिधान और संबंधित वस्त्रों पर लगने वाले 12% के टैरिफ को अब घटाकर 0% कर दिया गया है। इसके अलावा, चमड़ा और फुटवियर श्रेणी के उत्पादों पर जो पहले 17% का टैरिफ लगता था, उसे भी अब शून्य कर दिया गया है।
कपड़ा उद्योग पर प्रभाव
शून्य प्रतिशत आयात शुल्क लागू होने से यूरोपीय बाजारों में भारतीय परिधान और कपड़ा उत्पाद काफी सस्ते हो जाएंगे। इससे तमिलनाडु के तिरुपुर और पंजाब के लुधियाना जैसे प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में स्थित भारतीय कपड़ा निर्माताओं के लिए बड़े ऑर्डर आने की उम्मीद है। इस व्यापार समझौते के परिणामस्वरूप, भारतीय कपड़ा निर्माताओं को यूरोपीय संघ के 263.5 बिलियन डॉलर के विशाल कपड़ा बाजार में पूरी पहुंच मिल गई है। वर्तमान में इस बाजार में भारत का निर्यात 7.2 बिलियन डॉलर का है।
चमड़ा उद्योग को लाभ
आयात शुल्क शून्य होने से यूरोपीय संघ का 100 बिलियन डॉलर का चमड़ा और फुटवियर उद्योग भारत से अपनी सोर्सिंग बढ़ा सकता है। इसका विशेष लाभ उत्तर प्रदेश के आगरा-कानपुर क्लस्टर और तमिलनाडु के वेल्लोर-अंबूर क्लस्टर को मिलेगा। इस कदम से इन क्षेत्रों में औपचारिक रोजगार के अवसर पैदा होने और नए उद्यमों की स्थापना की संभावना है।
प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात
टैरिफ हटने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा, जिससे मध्यम से लेकर प्रीमियम चमड़े के सामानों की मांग बढ़ सकती है। यह टैनिंग, फिनिशिंग और फुटवियर निर्माण सहित पूरी आपूर्ति श्रृंखला में निर्यात को बढ़ावा दे सकता है। बेहतर बाजार पहुंच से भारतीय उत्पादकों को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के तहत भारतीय कपड़ा और चमड़ा उत्पादों पर टैरिफ का خاتمہ एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे इन क्षेत्रों को यूरोपीय संघ के बड़े बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और विनिर्माण केंद्रों में उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
FAQs
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के तहत कपड़ा उत्पादों पर नया टैरिफ क्या है?
इस समझौते के तहत कपड़ा, परिधान और वस्त्रों पर लगने वाला आयात शुल्क 12% से घटाकर 0% कर दिया गया है।
चमड़ा और फुटवियर उत्पादों के लिए पुरानी टैरिफ दर क्या थी?
समझौते से पहले चमड़ा और फुटवियर उत्पादों पर यूरोपीय संघ में 17% की टैरिफ दर लागू थी, जिसे अब शून्य कर दिया गया है।
इस समझौते से भारत के किन कपड़ा केंद्रों को लाभ होने की उम्मीद है?
इस समझौते से तमिलनाडु के तिरुपुर और पंजाब के लुधियाना जैसे भारत के प्रमुख कपड़ा विनिर्माण केंद्रों को विशेष रूप से लाभ होने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ का कपड़ा बाजार कितना बड़ा है?
यूरोपीय संघ का कपड़ा बाजार लगभग 263.5 बिलियन डॉलर का है, जिसमें भारत का मौजूदा निर्यात 7.2 बिलियन डॉलर है।
समझौते से चमड़ा उद्योग में क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है?
इस समझौते से भारत के चमड़ा उद्योग को यूरोपीय संघ से अधिक सोर्सिंग ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे आगरा-कानपुर और वेल्लोर-अंबूर जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार और उद्यमों का निर्माण हो सकता है।
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