भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग दो दशकों की रुक-रुक कर हुई बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों पक्ष अमेरिका के साथ तनाव के बीच अपने संबंधों को और गहरा करना चाहते हैं। इस समझौते से दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश और 27 यूरोपीय देशों के ब्लॉक के बीच वस्तुओं के मुक्त व्यापार का मार्ग प्रशस्त होगा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद इस समझौते को “सभी समझौतों की जननी” बताया। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने इस सौदे को “ऐतिहासिक” करार दिया। यह समझौता एक ऐसे विशाल बाजार का निर्माण करेगा जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 25% और दो अरब लोगों की आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के लिए टैरिफ को काफी हद तक कम करना और बाजार तक पहुंच का विस्तार करना है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में मौजूद थे। वे इस सप्ताह के अंत में दिल्ली पहुंचे थे और सोमवार को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे।
समझौते की मुख्य बातें
यूरोपीय आयोग के अनुसार, इस समझौते के तहत रसायनों, मशीनरी, बिजली के उपकरणों, विमान और अंतरिक्ष यान जैसे अधिकांश निर्यातों पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा। एक महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत, मोटर वाहनों पर लगने वाले शुल्क, जो वर्तमान में 110% तक हैं, को 2,50,000 वाहनों के कोटा के तहत घटाकर 10% कर दिया जाएगा। इस समझौते से भारत में प्रवेश करने वाले यूरोपीय उत्पादों जैसे कार, मशीनरी और कृषि खाद्य पदार्थों की लागत कम होने की उम्मीद है, क्योंकि आयात शुल्क में कटौती की जाएगी। हालांकि, डेयरी और चीनी जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है।
नेताओं के बयान और भू-राजनीतिक संदर्भ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक समझौता है। इससे भारत के किसानों और छोटे व्यवसायों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी। यह विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को भी बढ़ावा देगा और नवीन साझेदारियों को गति देगा।” मंगलवार को इंडिया एनर्जी वीक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का एक आदर्श उदाहरण है। यह समझौता वैश्विक जीडीपी का 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा है।”
यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और यूरोपीय संघ दोनों अमेरिका से आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि यह व्यापार सौदा दुनिया को एक “महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश” भेजेगा कि भारत और यूरोपीय संघ टैरिफ के बजाय व्यापार समझौतों में अधिक विश्वास करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब संरक्षणवाद बढ़ रहा है।
समझौते की पृष्ठभूमि और समयरेखा
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता के लिए बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन बाजार पहुंच और नियामक मांगों से जुड़ी बाधाओं के कारण 2013 में रुक गई थी। जुलाई 2022 में चर्चाओं को औपचारिक रूप से फिर से शुरू किया गया। बातचीत के मुख्य विवादास्पद बिंदु भारत के ऑटोमोबाइल बाजार तक पहुंच, कृषि सामान और कार्बन से जुड़े टैरिफ थे। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने यूरोपीय नेताओं की यात्रा से पहले समझौते के लंबित अध्यायों को अंतिम रूप देने के लिए पिछले कुछ दिनों में गहनता से काम किया। इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर इस साल के अंत में होने की संभावना है, जब इसे यूरोपीय संसद और यूरोपीय परिषद द्वारा अनुमोदित कर दिया जाएगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग का विस्तार
व्यापार समझौते के साथ-साथ, भारत और यूरोपीय संघ सुरक्षा, रक्षा सहयोग और जलवायु कार्रवाई पर भी अलग-अलग बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास के साथ कई द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की। इसमें विश्वसनीय रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने और भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं को विकसित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करने के अवसर शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और रक्षा संवाद जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए एक सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के मसौदे पर काम कर रहे हैं।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपने निर्यातकों के लिए वैकल्पिक बाजार सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले सात महीनों में, भारत ने यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ प्रमुख व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, यूरोपीय संघ ने भी 25 वर्षों की बातचीत के बाद इस महीने की शुरुआत में दक्षिण अमेरिकी व्यापार ब्लॉक मर्कोसुर के साथ एक व्यापार सौदे पर हस्ताक्षर किए।
FAQs
यह भारत-ईयू व्यापार समझौता क्या है?
यह भारत और 27 यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता है, जिसका उद्देश्य अधिकांश वस्तुओं पर टैरिफ कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है।
इस समझौते से किन उत्पादों पर शुल्क कम होगा?
इस समझौते से रसायन, मशीनरी, बिजली के उपकरण, विमान, अंतरिक्ष यान और मोटर वाहन जैसे उत्पादों पर शुल्क में उल्लेखनीय कमी आएगी। हालांकि, डेयरी और चीनी जैसे कुछ कृषि उत्पादों को बाहर रखा गया है।
इस समझौते पर बातचीत कब शुरू हुई थी?
इस समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू हुई थी। 2013 में रुकने के बाद, इसे जुलाई 2022 में फिर से शुरू किया गया और अब इसे अंतिम रूप दिया गया है।
इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कब होंगे?
यूरोपीय संसद और यूरोपीय परिषद से मंजूरी मिलने के बाद, इस समझौते पर इस साल के अंत तक औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने की संभावना है।
व्यापार के अलावा और किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है?
व्यापार के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में भी अपनी साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।
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