सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के विवादास्पद मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को एक सकारात्मक रुख अपनाते हुए हरियाणा को “भाई” बताया और निरंतर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का आह्वान किया। यह आमतौर पर इस मुद्दे पर होने वाली तनावपूर्ण बयानबाजी से एक अलग कदम है।
चंडीगढ़ में अपने हरियाणा समकक्ष नायब सिंह सैनी के साथ दो घंटे की बैठक के बाद, मान ने कहा कि तीन दशक पुराने इस गतिरोध को हल करने के लिए चर्चा “सकारात्मक माहौल” में हुई। दोनों मुख्यमंत्रियों ने इस जटिल मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नियमित बातचीत जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मान ने कहा, “हरियाणा हमारा दुश्मन नहीं, बल्कि भाई है। यह एक विरासत में मिला मुद्दा है, और दोनों राज्य इसका समाधान चाहते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि अब दोनों राज्यों के अधिकारी महीने में तीन से चार बार मिलकर किसी भी राज्य के अधिकारों से समझौता किए बिना समाधान खोजेंगे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इसी भावना को दोहराते हुए पुष्टि की कि अब बातचीत प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, “आज सार्थक बातचीत हुई। हम दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच नियमित बैठकों के माध्यम से इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।”
मुख्यमंत्रियों की बैठक और सकारात्मक माहौल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ के एक होटल में यह बैठक आयोजित की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार दोनों राज्यों से केंद्र सरकार की मध्यस्थता के माध्यम से एक सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने का आग्रह किया है। अगस्त 2020 के बाद से यह इस तरह की छठी बैठक थी। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच लगभग दो घंटे तक चली इस वार्ता का उद्देश्य दशकों से चले आ रहे SYL नहर विवाद पर गतिरोध को तोड़ना था।
बातचीत से समाधान पर जोर
बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह निर्णय लिया गया ہے कि दोनों पक्षों के अधिकारी किसी भी राज्य के अधिकारों से समझौता किए बिना समाधान खोजने के लिए महीने में तीन से चार बार मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य अब अपनी आंतरिक चर्चाओं को आयोजित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई की विशिष्ट तारीखों का इंतजार नहीं करेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी कहा कि सार्थक बातचीत हुई है और इस प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
पंजाब का पुराना रुख बरकरार
इस सौहार्दपूर्ण माहौल के बावजूद, विवाद का मुख्य बिंदु अभी भी बना हुआ है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के पुराने रुख को दोहराया कि नहर का निर्माण तभी हो सकता ہے जब रावी और ब्यास नदियों में उपलब्ध पानी की मात्रा का नए सिरे से आकलन किया जाए। उन्होंने कहा, “पानी सभी के लिए आवश्यक है, और किसी को भी उनके उचित अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”
क्या है SYL नहर परियोजना?
SYL नहर परियोजना का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच पानी साझा करना है। इस विवादित परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर शामिल है, जिसमें से 122 किलोमीटर पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में पड़ता है। हरियाणा ने अपने हिस्से का निर्माण बहुत पहले ही पूरा कर लिया है, लेकिन पंजाब घटते भूजल स्तर और नदी के प्रवाह में कमी का हवाला देते हुए इसके निर्माण का विरोध करता रहा है।
बैठक में शामिल अन्य अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर गोयल, हरियाणा की मंत्री श्रुति चौधरी और दोनों राज्यों के सिंचाई और कानूनी विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। अधिकारियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अब इस मुद्दे को तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर आगे बढ़ाया जाएगा।
दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच हुई इस बैठक ने दशकों पुराने SYL नहर विवाद को सुलझाने की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई है। अब नियमित अधिकारी-स्तरीय बैठकों के माध्यम से इस मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, हालांकि पानी के पुनर्मूल्यांकन की मुख्य शर्त अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
FAQs
SYL नहर पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक कहाँ हुई?
यह बैठक दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ के एक होटल में आयोजित की गई थी।
बैठक का मुख्य परिणाम क्या रहा?
बैठक का मुख्य परिणाम यह रहा कि दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी अब महीने में तीन से चार बार मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि एक सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
पंजाब की मुख्य मांग क्या है?
पंजाब की मुख्य मांग यह है कि नहर निर्माण पर चर्चा से पहले रावी और ब्यास नदियों में उपलब्ध पानी की मात्रा का नए सिरे से आकलन किया जाना चाहिए।
SYL नहर परियोजना की कुल लंबाई कितनी है?
SYL नहर परियोजना की कुल लंबाई 214 किलोमीटर है, जिसमें 122 किलोमीटर पंजाब में और 92 किलोमीटर हरियाणा में बनना प्रस्तावित है।
यह बैठक किसके निर्देश पर बुलाई गई थी?
यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बुलाई गई थी, जिसने दोनों राज्यों को केंद्र सरकार की मध्यस्थता में एक सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए कहा है।
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