भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसे यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण करार दिया है। मंगलवार को उन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते के सफलतापूर्वक संपन्न होने की घोषणा की, जिससे 18 वर्षों की लंबी बातचीत का समापन हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 16वें यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को दो वैश्विक शक्तियों के बीच “साझेदारी का एक आदर्श उदाहरण” बताया।
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय संबंधों को कई क्षेत्रों में गहरा करने और गुणात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। इस समझौते के अगले साल किसी समय लागू होने की उम्मीद है, जिससे दोनों पक्षों को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में समझौते को अंतिम रूप
भारत और यूरोपीय संघ ने आधिकारिक तौर पर अपने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे 18 साल से चल रही यात्रा का अंत हुआ। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित 16वें यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल हुए।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष का बयान
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने घोषणा करते हुए कहा, “आज यूरोप और भारत इतिहास रच रहे हैं। हमने सभी समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण समझौते को संपन्न किया है। हमने दो अरब लोगों का एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा।” उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यह केवल शुरुआत है और दोनों पक्ष अपने रणनीतिक संबंधों को और भी मजबूत करेंगे।
समझौते से भारत को मिलने वाले लाभ
इस समझौते के तहत भारत के 97 प्रतिशत निर्यातों पर शुल्क हटा दिया जाएगा, जिससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को भारी बढ़ावा मिलेगा। इससे विशेष रूप से कपड़ा, रत्न और चमड़ा जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। इसके साथ ही, यह समझौता यूरोपीय कारों और मशीनरी के लिए भारतीय बाजार भी खोलेगा, जिससे व्यापार संतुलन को बढ़ावा मिलेगा। व्यापार और निवेश के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
साझा मूल्यों पर आधारित मजबूत साझेदारी
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी इस अवसर पर कहा कि वह “साझा मूल्यों और बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा पर आधारित यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक मजबूत साझेदारी” की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे नागरिकों के लिए ठोस लाभ पहुंचाने, हमारी साझा समृद्धि और सुरक्षा की दिशा में मिलकर काम करने और वैश्विक मुद्दों पर नेतृत्व दिखाने के बारे में है।
व्यापक रणनीतिक एजेंडा
मंगलवार की बैठक का व्यापक ध्यान व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर था। दोनों पक्षों द्वारा एक रक्षा रूपरेखा समझौते और एक रणनीतिक एजेंडे का अनावरण करने की भी तैयारी है। यह नई साझेदारी ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप अमेरिका और चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है और अन्य क्षेत्रों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश कर रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 वर्षों की बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौते का सफल समापन हुआ है, जिसे दोनों पक्षों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, और इसके अगले वर्ष लागू होने की संभावना है।
FAQs
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता क्या है?
यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक व्यापारिक समझौता है जिसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार किए जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर शुल्क को खत्म करना और व्यापारिक बाधाओं को कम करना है।
इस समझौते की घोषणा किसने और कहाँ की?
इस समझौते के संपन्न होने की घोषणा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की। इसे नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान अंतिम रूप दिया गया।
भारतीय निर्यातकों को इससे क्या प्रमुख लाभ होगा?
इस सौदे से भारत के 97 प्रतिशत निर्यातों पर लगने वाला शुल्क हट जाएगा, जिससे विशेष रूप से कपड़ा, रत्न और चमड़ा जैसे उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
यह समझौता कब से लागू होने की उम्मीद है?
इस मुक्त व्यापार समझौते के अगले साल किसी समय से प्रभावी होने की उम्मीद है, जिसके बाद इसके लाभ मिलने शुरू हो जाएंगे।
इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” क्यों कहा गया?
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने इसे यह नाम दिया क्योंकि यह लगभग दो अरब लोगों का एक विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाता है, जिससे दोनों पक्षों को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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