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यूक्रेन में असली जंग ज़मीन की

रूस-यूक्रेन शांति वार्ता को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें अबू धाबी में दोनों देशों और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। 2022 में रूस द्वारा पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किए जाने के बाद यह पहली बार है जब इस स्तर पर तीनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत हुई है। इस बैठक से शांति की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है।

यह वार्ता बिना किसी गतिरोध के समाप्त हुई और अगले सप्ताहांत फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया में, अमेरिका ने खुद को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया है, न कि संघर्ष में किसी एक पक्ष के भागीदार के रूप में। यूक्रेन और रूस, दोनों ने ही बातचीत में अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई है, जिससे सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि, शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा अभी भी क्षेत्रीय नियंत्रण का मुद्दा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी सुरक्षा गारंटियों पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ज़मीन का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है। रूस पूरे डोनबास क्षेत्र पर अपना कब्ज़ा चाहता है, जो उसकी न्यूनतम मांग बनी हुई है।

अबू धाबी में त्रिपक्षीय बैठक

पिछले सप्ताहांत, संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता का आयोजन किया गया। यह बैठक 2022 के बाद से अपनी तरह की पहली त्रिपक्षीय वार्ता थी, जिसमें संघर्ष के दोनों प्रमुख पक्ष और एक प्रमुख मध्यस्थ शामिल हुए। वार्ता का माहौल सकारात्मक रहा और इसे अगले सप्ताह जारी रखने पर सहमति बनी है। अमेरिका इस वार्ता में एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

शांति समझौते में मुख्य बाधा

वार्ता में प्रगति के बावजूद, क्षेत्रीय विवाद शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान कहा कि युद्ध के बाद की सुरक्षा गारंटियों को लेकर वह संतुष्ट हैं, लेकिन “सब कुछ ज़मीन को लेकर है। यह वह मुद्दा है जो अभी तक हल नहीं हुआ है।” इसी तरह, ट्रम्प के मुख्य वार्ताकार, स्टीव विटकॉफ ने भी कहा कि क्षेत्रीय मुद्दे को छोड़कर शांति समझौता लगभग पूरा हो गया है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस बात पर अड़े हुए हैं कि पूरे डोनबास क्षेत्र पर कब्ज़ा रूस के लिए न्यूनतम स्वीकार्य शर्त है। डोनबास पूर्वी यूक्रेन का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां 2014 से ही संघर्ष जारी है। वर्तमान में, रूसी सेना इस क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करती है, जबकि शेष 20 प्रतिशत हिस्सा यूक्रेन की “किलेबंद सुरक्षा पट्टी” के रूप में जाना जाता है। यूक्रेन इसे भविष्य के किसी भी रूसी आक्रमण से देश की रक्षा के लिए अनिवार्य मानता है और इस क्षेत्र को छोड़ने का कड़ा विरोध कर रहा है।

युद्धक्षेत्र की वर्तमान स्थिति

पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के आकलन के अनुसार, रूस को इस संघर्ष में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि अकेले दिसंबर में रूसी सेना को 30,000 हताहतों (मृत और घायल) का सामना करना पड़ा। यह भी बताया गया है कि यूक्रेनी पक्ष के हर एक सैनिक के नुकसान के बदले में रूस के 25 सैनिक हताहत हुए। इन आंकड़ों का श्रेय यूक्रेन की ड्रोन युद्ध में बढ़ती कुशलता और रूस की उस रणनीति को दिया जाता है जिसमें मानव जीवन की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में सैनिकों को हमले के लिए भेजा जाता है।

दोनों पक्षों पर बढ़ता दबाव

एक ओर जहां रूस को भारी सैन्य क्षति हो रही है, वहीं उसे अपनी युद्ध क्षमता बनाए रखने में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। क्रेमलिन को मोर्चे पर खोए सैनिकों की जगह नए सैनिकों को भर्ती करने में कठिनाई हो रही है। नए रंगरूटों के लिए दिए जाने वाले साइन-ऑन बोनस की राशि में वृद्धि हुई है और रूसी पक्ष से लड़ने के लिए विदेशियों की भी तलाश की जा रही है। रूसी अर्थव्यवस्था भी बढ़ते दबाव में है, जहां सरकार का वित्तीय भंडार कम हो रहा है, विकास दर धीमी हो रही है और मुद्रास्फीति बढ़ रही है।

दूसरी ओर, यूक्रेनी पक्ष भी गंभीर दबाव में है। रूसी मिसाइल हमलों ने देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिससे कीव और अन्य शहरों में शून्य से नीचे के तापमान में बिजली और हीटिंग की आपूर्ति बाधित हुई है। यूक्रेन में युद्ध को लेकर बढ़ती थकान भी एक प्रमुख कारक है। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की रूस के साथ बातचीत में शामिल होने की इच्छा आंशिक रूप से इसी दबाव को दर्शाती है।

यूरोप और अमेरिका की भूमिका

इस शांति प्रक्रिया में यूरोप और ट्रम्प प्रशासन पूरक भूमिकाएं निभाते दिख रहे हैं। यूरोपीय देश यूक्रेन को लड़ने के लिए वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान कर सकते हैं, जबकि अमेरिकी प्रशासन रूसियों के साथ संवाद के चैनल खुले रख सकता है और शांति वार्ता को प्रायोजित कर सकता है। यूरोपीय अधिकारियों के बीच अब यह चिंता कम हो गई है कि ट्रम्प प्रशासन रूस के प्रति पक्षपाती है। इसके बजाय, अब यह चिंता है कि प्रशासन एक लंबी और निराशाजनक शांति प्रक्रिया के साथ धैर्य और ध्यान खो सकता है।

शांति प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण का मुख्य मुद्दा अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके कारण संघर्ष जारी है।

FAQs

शांति वार्ता कहाँ आयोजित की गई?

नवीनतम त्रिपक्षीय शांति वार्ता संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी शहर में आयोजित की गई, जिसमें रूस, यूक्रेन और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बातचीत का मुख्य अनसुलझा मुद्दा क्या है?

बातचीत में सबसे बड़ा और अनसुलझा मुद्दा क्षेत्रीय नियंत्रण का है, विशेष रूप से पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र पर किसका अधिकार होगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह अमेरिका द्वारा दी गई युद्ध के बाद की सुरक्षा गारंटियों से संतुष्ट हैं, लेकिन ज़मीन का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है।

रूस की प्रमुख मांग क्या है?

रूस की न्यूनतम और प्रमुख मांग यह है कि उसे संपूर्ण डोनबास क्षेत्र का कब्ज़ा सौंप दिया जाए, जिस पर वह अपना दावा करता है।

इस शांति प्रक्रिया में अमेरिका की क्या भूमिका है?

इस शांति प्रक्रिया में, संयुक्त राज्य अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाना है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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