अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य बल का उपयोग करके ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की संभावना से इनकार कर दिया है, लेकिन उन्होंने इस द्वीप का अधिग्रहण करने के लिए तत्काल बातचीत का आह्वान किया है। इस मुद्दे पर कई दिनों से बढ़ते तनाव ने ट्रान्साटलांटिक संबंधों को प्रभावित किया है और बाजारों में चिंता पैदा कर दी है।
बुधवार को डेवोस में विश्व आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की। इससे पहले उन्होंने डेनमार्क और अन्य नाटो सहयोगियों को आर्कटिक द्वीप पर सैन्य कब्जे से लेकर भारी नए टैरिफ लगाने तक की धमकी दी थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह बल का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने यूरोप पर अपनी मांगों को मानने के लिए दबाव बनाए रखा।
ट्रंप ने कहा कि वह डेनमार्क से ग्रीनलैंड के अधिग्रहण पर चर्चा के लिए “तत्काल बातचीत की मांग” कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका ने अपने इतिहास में कई अन्य क्षेत्रों का अधिग्रहण किया है। इसके जवाब में, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने बार-बार जोर देकर कहा है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है, यह रुख उन्होंने 2019 में ट्रंप द्वारा पहली बार रुचि व्यक्त किए जाने के बाद से बनाए रखा है।
इस घटनाक्रम का वित्तीय बाजारों पर भी सीधा असर देखा गया। सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप की धमकियों के कारण अमेरिकी संपत्तियों में बिकवाली हुई थी, लेकिन सैन्य बल का उपयोग न करने के उनके बयान के बाद बाजारों ने अपने नुकसान की कुछ भरपाई की।
ट्रंप का डेवोस में बयान
डेवोस में अपने भाषण में, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “लोगों को लगा कि मैं बल का प्रयोग करूंगा। मुझे बल का प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है। मैं बल का प्रयोग नहीं करना चाहता। मैं बल का प्रयोग नहीं करूंगा।” बाद में उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई “विचार-विमर्श का हिस्सा नहीं है”। उन्होंने यूरोप के सामने एक विकल्प रखते हुए कहा, “आप हां कह सकते हैं और हम बहुत आभारी होंगे, या आप ना कह सकते हैं और हम याद रखेंगे।” ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह “विशाल असुरक्षित द्वीप” उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है और अमेरिका द्वारा इसका अधिग्रहण नाटो के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए।
डेनमार्क और यूरोप की प्रतिक्रिया
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने ट्रंप के बयान का “सकारात्मक” रूप में स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि “इससे यह मामला खत्म नहीं हो जाता है”। डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ ट्रंप के दबाव ने यूरोपीय अधिकारियों को नाराज कर दिया है, जिनमें से कई का दावा है कि उन्होंने ट्रान्साटलांटिक संबंधों में विश्वास को नष्ट कर दिया है। इसके अलावा, जब यूरोपीय संसद ने ट्रंप की अतिरिक्त टैरिफ की धमकी के कारण अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के अनुसमर्थन को निलंबित कर दिया, तो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने यूरोपीय संघ पर सौदे को निलंबित करने के लिए “बहाने” खोजने का आरोप लगाया।
बाजार पर प्रभाव
ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा। सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी संपत्तियों में बिकवाली देखी गई थी। हालांकि, ट्रंप द्वारा बल प्रयोग से इनकार करने के बाद, बाजारों ने कुछ नुकसान की भरपाई की। न्यूयॉर्क में एसएंडपी 500 में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.1 प्रतिशत बढ़ा। अपने भाषण के दौरान, ट्रंप ने आइसलैंड और ग्रीनलैंड को लेकर भ्रमित होते हुए कहा, “हमारे शेयर बाजार में कल पहली गिरावट आइसलैंड की वजह से आई, इसलिए आइसलैंड की वजह से हमें पहले ही बहुत पैसा गंवाना पड़ा है।”
ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व
ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो रणनीतिक रूप से उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित है। यह द्वीप न केवल अपने संभावित प्राकृतिक संसाधनों जैसे तेल, गैस और खनिजों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका भू-राजनीतिक महत्व भी है। संयुक्त राज्य अमेरिका का यहां पहले से ही एक सैन्य अड्डा, थुल एयर बेस, मौजूद है, जो अमेरिकी मिसाइल चेतावनी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आर्कटिक में बढ़ती वैश्विक रुचि के कारण इस क्षेत्र का नियंत्रण अमेरिका के लिए एक रणनीतिक लाभ माना जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से इनकार करते हुए ग्रीनलैंड खरीदने के लिए बातचीत पर जोर दिया है। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड अपने “बिकाऊ नहीं” वाले रुख पर कायम हैं। इस गतिरोध ने अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वित्तीय बाजारों पर दिख रहा है।
FAQs
क्या ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए सैन्य बल के प्रयोग की धमकी दी?
नहीं, अपने हालिया बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से सैन्य बल का उपयोग करने से इनकार किया और कहा कि यह “विचार-विमर्श का हिस्सा नहीं है”।
ग्रीनलैंड को बेचने पर डेनमार्क का क्या रुख है?
डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने बार-बार जोर देकर कहा है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है।
ट्रंप के बयानों का बाजार पर क्या असर हुआ?
शुरुआत में, उनकी धमकियों से अमेरिकी संपत्तियों में बिकवाली हुई। हालांकि, जब उन्होंने सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार किया, तो बाजारों ने अपने कुछ शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली।
क्या ट्रंप ने अपने डेवोस भाषण में नए टैरिफ की घोषणा की?
नहीं, उन्होंने अपने डेवोस भाषण में डेनमार्क और सात अन्य यूरोपीय देशों के सामानों पर 10 प्रतिशत के अतिरिक्त टैरिफ का कोई उल्लेख नहीं किया, जिसकी धमकी उन्होंने पहले दी थी।
अमेरिका ग्रीनलैंड में क्यों रुचि रखता है?
ट्रंप ने इसे उत्तरी अमेरिका का हिस्सा और एक “विशाल असुरक्षित द्वीप” बताया। इसका रणनीतिक स्थान, प्राकृतिक संसाधन और मौजूदा अमेरिकी सैन्य उपस्थिति भी अमेरिकी रुचि के प्रमुख कारण हैं।
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