75वें गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कई नई पहल देखने को मिलीं। नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबाण रेजिमेंट से लेकर ‘सूर्यस्त्र’ रॉकेट लॉन्चर सिस्टम तक, कई स्वदेशी प्लेटफॉर्म और प्रमुख सैन्य संपत्तियों का पहली बार प्रदर्शन किया गया। इस ऐतिहासिक परेड ने भारतीय सेना की आधुनिक होती क्षमताओं और परंपराओं के अनूठे संगम को प्रस्तुत किया।
इस वर्ष के समारोह में पहली बार दो-कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊँटों और ज़ांस्कर पोनी को भी शामिल किया गया, जिसने परेड में एक नया आकर्षण जोड़ा। इसके अलावा, कई सैन्य टुकड़ियों ने भी नए स्वरूप में हिस्सा लिया, जो उनकी परिचालन भूमिकाओं को दर्शाता है। यह परेड भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भी अपनी उन्नत तकनीक का प्रदर्शन किया, जिसमें हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल थी। परेड में न केवल अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन हुआ, बल्कि भारतीय सेना के पशु दल की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया गया। कुल मिलाकर, कर्तव्य पथ पर आयोजित यह समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक और यादगार रहा।
नई सैन्य टुकड़ियों का प्रदर्शन
इस वर्ष की परेड में भारतीय सेना की कई नई यूनिट्स ने पहली बार हिस्सा लिया। सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट की एक विशेष असॉल्ट इन्फेंट्री यूनिट, भैरव बटालियन, ने अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराई। यह यूनिट पारंपरिक इन्फेंट्री और विशेष बलों के बीच की क्षमताओं के अंतर को पाटती है।
इसके साथ ही, नवगठित आर्टिलरी यूनिट, शक्तिबाण रेजिमेंट ने भी परेड में भाग लिया। इस रेजिमेंट को उन्नत ड्रोन तकनीकों के एकीकरण के माध्यम से मारक क्षमता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
एक और महत्वपूर्ण पहली बार, एक मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी ने परेड में मार्च किया। इस टुकड़ी में लद्दाख स्काउट्स, डोगरा स्काउट्स, अरुणाचल स्काउट्स, कुमाऊं स्काउट्स, गढ़वाल स्काउट्स और सिक्किम स्काउट्स के सदस्य शामिल थे। उन्हें उनकी परिचालन भूमिका के अनुरूप भारी थर्मल गियर में देखा गया।
61 कैवेलरी का बदला स्वरूप
भारतीय सेना की विशिष्ट घुड़सवार रेजिमेंट, 61 कैवेलरी, जो पारंपरिक रूप से अपने औपचारिक पोशाक और आकर्षक हेडगियर में परेड का नेतृत्व करती है, इस बार पहली बार युद्धक पोशाक (बैटल गियर) में नजर आई। यह एक बड़ा बदलाव था, क्योंकि यह रेजिमेंट हमेशा से सशस्त्र बलों की टुकड़ियों में सबसे आगे रही है।
तीसरी पीढ़ी के अधिकारी, 26 वर्षीय कैप्टन अहान कुमार ने इस प्रतिष्ठित टुकड़ी का नेतृत्व किया। वह अपने चार्जर ‘रणवीर’ के साथ कर्तव्य पथ पर लौटे, जो एक हनोवेरियन नस्ल का घोड़ा है। कैप्टन कुमार ने परेड के बाद कहा, “मेरे लिए, इस ऐतिहासिक टुकड़ी का औपचारिक वर्दी में नेतृत्व करना कहीं अधिक खुशी देता है, बजाय इसके कि मैं इसे युद्धक पोशाक में करूं, लेकिन हां, इस साल की परेड में यह बहुत अलग महसूस हुआ।”
स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन
परेड के दौरान भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का भी प्रदर्शन किया गया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन किया। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है जो स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और विभिन्न पेलोड ले जा सकती है।
अन्य प्रमुख रक्षा संपत्तियों में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणाली, एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और कुछ ड्रोनों का एक स्थिर प्रदर्शन शामिल था। ‘सूर्यस्त्र’ नामक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी आकर्षण का केंद्र रहा।
पशु दल ने भी खींचा ध्यान
इस साल की परेड में पहली बार दो-कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊँट और ज़ांस्कर पोनी को शामिल किया गया, जो एक अनूठा दृश्य था। इसके अलावा, रिमाउंट वेटरनरी कोर (RVC) की टुकड़ी ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन हर्षिता राघव ने किया।
कैप्टन राघव ने बताया कि उनकी टुकड़ी में रैप्टर्स (चील) और कुछ सेना के कुत्ते भी शामिल थे। उन्होंने कहा, “ये जानवर भी भारतीय सेना के सैनिक ही हैं। वास्तव में, वे मूक योद्धा हैं, उन्हें परिचालन के लिए तैयार करना और इन जानवरों से संचालन की आवश्यकताओं को समझना दो बहुत महत्वपूर्ण पहलू हैं। वे भारतीय सेना के सच्चे बल गुणक हैं।”
75वें गणतंत्र दिवस की परेड ने भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और अनूठी परंपराओं का एक व्यापक प्रदर्शन प्रस्तुत किया। नई रेजिमेंटों, उन्नत हथियार प्रणालियों और पशु दल की पहली बार भागीदारी ने इस राष्ट्रीय पर्व को और भी यादगार बना दिया।
FAQs
परेड में पहली बार किन नई सैन्य यूनिट्स ने हिस्सा लिया?
इस वर्ष की परेड में भैरव लाइट कमांडो बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और एक मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी ने पहली बार हिस्सा लिया।
61 कैवेलरी की टुकड़ी में इस साल क्या बदलाव देखा गया?
हमेशा औपचारिक वर्दी में नजर आने वाली 61 कैवेलरी की टुकड़ी इस साल पहली बार युद्धक पोशाक (बैटल गियर) में परेड में शामिल हुई।
DRDO ने किस नई मिसाइल का प्रदर्शन किया?
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन किया, जो एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है।
परेड में पहली बार कौन से जानवर शामिल हुए?
इस साल पहली बार दो-कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊँट और ज़ांस्कर पोनी को औपचारिक परेड में शामिल किया गया।
मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी में कौन-कौन शामिल थे?
मिश्रित स्काउट्स टुकड़ी में लद्दाख स्काउट्स, डोगरा स्काउट्स, अरुणाचल स्काउट्स, कुमाऊं स्काउट्स, गढ़वाल स्काउट्स और सिक्किम स्काउट्स के सदस्य शामिल थे।
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