हरियाणा भाजपा ने पार्टी में शामिल होने वाले नए सदस्यों की जांच के लिए राज्य और जिला स्तर पर स्क्रीनिंग समितियों का गठन किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “कांग्रेस की बुराइयों” के बारे में आगाह किए जाने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। पार्टी का घोषित उद्देश्य खुद को संभावित “कांग्रेसीकरण” से बचाना है। इन समितियों का काम पार्टी में आने वाले नए नेताओं की पृष्ठभूमि और इरादों का आकलन करना होगा।
मंगलवार को हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने एक राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा की। इस समिति में भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव, राज्य मंत्री कृष्ण बेदी, और पूर्व राज्य मंत्री कंवर पाल गुर्जर व सुभाष सुधा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर भी इसी तरह के पैनल बनाए गए हैं, जिनमें जिला पार्टी अध्यक्ष और जिला प्रभारी सहित तीन से चार सदस्य होंगे।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह कदम पार्टी के वैचारिक चरित्र को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, हरियाणा में भाजपा का उदय केवल संगठनात्मक ताकत पर आधारित नहीं था, बल्कि इसमें कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल (INLD), जननायक जनता पार्टी (JJP) और हरियाणा विकास पार्टी के नेताओं ने भी भूमिका निभाई थी। इसलिए, नए और पुराने सदस्यों के बीच एक संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस कदम को राज्य भाजपा में एक महत्वपूर्ण जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। हरियाणा में भाजपा के प्रभारी सतीश पूनिया ने कहा कि यह तंत्र जांच के बिना होने वाली भर्तियों को रोकेगा और एकरूपता लाएगा।
स्क्रीनिंग समितियों का गठन और उद्देश्य
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी में नए सदस्यों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू की है। इसका मुख्य उद्देश्य पार्टी के वैचारिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी सतीश पूनिया ने बताया कि कुछ व्यक्ति केवल “व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ” के लिए पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में आपत्ति होती है। उन्होंने कहा, “ये स्क्रीनिंग समितियां सभी हितधारकों के साथ चर्चा करेंगी, उम्मीदवारों के इरादे का आकलन करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि नए प्रवेशकों से पार्टी मजबूत हो।” इसके बाद ही उनके आवेदन को मंजूरी के लिए वरिष्ठ नेतृत्व के पास भेजा जाएगा।
राज्य और जिला स्तरीय समितियों की संरचना
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली द्वारा घोषित राज्य स्तरीय समिति में चार प्रमुख सदस्य हैं। इनमें भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव, राज्य मंत्री कृष्ण बेदी, और पूर्व राज्य मंत्री कंवर पाल गुर्जर तथा सुभाष सुधा को शामिल किया गया है। राज्य इकाई के अलावा, पार्टी के नेतृत्व ने जिला स्तर पर भी तीन से चार सदस्यों वाली समान समितियों का गठन किया है। इन जिला स्तरीय पैनलों में संबंधित जिले के पार्टी अध्यक्ष और जिला प्रभारी को भी शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी और पार्टी की चिंता
20 जनवरी को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी नेताओं को आगाह किया था। उन्होंने कहा था, “जो कांग्रेस की बुराइयों से बचेगा वही देश में आगे बढ़ेगा।” इसी चेतावनी को ध्यान में रखते हुए हरियाणा भाजपा ने यह कदम उठाया है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “हम नहीं चाहते कि भाजपा अपनी पहचान खो दे और उसका कांग्रेसीकरण हो जाए।” उन्होंने यह भी बताया कि सत्ता पूरी तरह से नए प्रवेशकों को नहीं सौंपी जा सकती और एक सही संतुलन बनाना आवश्यक है।
हालिया राजनीतिक फेरबदल
स्क्रीनिंग समितियों की घोषणा का समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह के कांग्रेस से भाजपा में आने के साथ हुआ है। इससे पहले फरवरी 2025 में कांग्रेस नेता सरदार त्रिलोचन सिंह भी भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं, भाजपा से भी कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले, वरिष्ठ नेता बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे बृजेंद्र सिंह, जो हिसार से भाजपा सांसद थे, कांग्रेस में लौट आए। इसी तरह, अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले, पूर्व सांसद अशोक तंवर और पूर्व मंत्री करण देव कंबोज ने भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम को “महत्वहीन” बताकर खारिज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि हरियाणा जैसे छोटे राज्य में इस तरह की कवायद का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई महत्वपूर्ण है, तो हर कोई उस नेता को पहले से ही जानता है। क्या भाजपा ने कभी किसी को प्रवेश देने से मना किया है? वे कांग्रेस, INLD और हर जगह से नेताओं का स्वागत कर रहे हैं।”
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के नतीजे
अक्टूबर 2024 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों में भाजपा ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की थी। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 48 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 37 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वोट शेयर के मामले में दोनों पार्टियों के बीच मामूली अंतर था। भाजपा को 39.94% वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 39.09% वोट प्राप्त हुए। इस परिणाम ने राज्य में भाजपा की स्थिति को और मजबूत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह के बाद, हरियाणा भाजपा ने पार्टी के वैचारिक चरित्र को बनाए रखने के लिए नए सदस्यों की जांच हेतु राज्य और जिला स्तर पर स्क्रीनिंग समितियों का गठन किया है। इस कदम का उद्देश्य बिना सोचे-समझे पार्टी में होने वाली भर्तियों को रोकना है, हालांकि कांग्रेस ने इसे एक दिखावा करार दिया है।
FAQs
हरियाणा भाजपा ने स्क्रीनिंग समितियों का गठन क्यों किया है?
हरियाणा भाजपा ने पार्टी में शामिल होने वाले नए सदस्यों की जांच करने, “कांग्रेसीकरण” को रोकने और अपने वैचारिक चरित्र को बनाए रखने के उद्देश्य से स्क्रीनिंग समितियों का गठन किया है।
राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?
राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी में भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव, राज्य मंत्री कृष्ण बेदी, और पूर्व राज्य मंत्री कंवर पाल गुर्जर तथा सुभाष सुधा शामिल हैं।
इस कदम पर कांग्रेस की क्या प्रतिक्रिया है?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने इस कदम को “महत्वहीन” बताया है और कहा है कि भाजपा हमेशा से ही दूसरी पार्टियों के नेताओं का स्वागत करती रही है।
क्या हाल ही में कोई बड़ा नेता भाजपा में शामिल हुआ है?
हाँ, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहा?
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। पार्टी को 39.94% वोट शेयर मिला था।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


