27.7 C
New Delhi
HomeGeopoliticsशेख हसीना निर्वासित, चुनाव पर बैन का खतरा: बांग्लादेश में क्या है...
spot_img

शेख हसीना निर्वासित, चुनाव पर बैन का खतरा: बांग्लादेश में क्या है अवामी लीग का भविष्य?

आगामी बांग्लादेश चुनाव से पहले, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगने और उनकी अनुपस्थिति के कारण समर्थकों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद, 2024 में एक छात्र आंदोलन के कारण हसीना सरकार का पतन हो गया और उन्हें भारत में निर्वासित होना पड़ा। अब देश 12 फरवरी को हसीना के बिना अपने पहले संसदीय चुनाव के लिए तैयारी कर रहा है।

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, अवामी लीग पर सभी राजनीतिक गतिविधियों से प्रतिबंध लगा दिया गया। एक विशेष न्यायाधिकरण ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान 1,400 से अधिक लोगों की हत्या में उनकी भूमिका के लिए शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सज़ा सुनाई। विडंबना यह है कि इस न्यायाधिकरण की स्थापना 2010 में स्वयं हसीना ने ही अपने राजनीतिक विरोधियों पर मुकदमा चलाने के लिए की थी।

चुनाव नज़दीक आने के साथ, पार्टी के पारंपरिक मतदाता एक अजीब दुविधा का सामना कर रहे हैं। कई लोगों को डर है कि अगर वे वोट नहीं डालते हैं, तो उन्हें अवामी लीग के समर्थकों के रूप में पहचाना जा सकता है, जिससे उन्हें मौजूदा गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘नाव’ मतपत्र पर नहीं होने के कारण, वे यह भी नहीं जानते कि किसे वोट दें। यह स्थिति पार्टी के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी स्पष्ट है, जहाँ कई समर्थक मतदान से दूर रहने का मन बना रहे हैं।

पूरे देश में राजनीतिक हिंसा जारी है, जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी सहित अन्य दलों के नेताओं की हाल के हफ्तों में हत्या हुई है। हालांकि, अब अवामी लीग के आम समर्थक भी सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें अपने नेताओं के कार्यों के कारण उत्पन्न हुए सार्वजनिक रोष का सामना करना पड़ रहा है।

शेख हसीना की अनुपस्थिति में पहला चुनाव

बांग्लादेश 12 फरवरी को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल के शासन के अंत के बाद अपने पहले संसदीय चुनाव का सामना कर रहा है। 2024 में एक बड़े छात्र आंदोलन ने हसीना सरकार को गिरा दिया, जिसके बाद उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके तुरंत बाद, उनकी पार्टी, अवामी लीग, को सभी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया। देश के 170 मिलियन लोग अब एक ऐसे चुनाव में मतदान करेंगे जिसमें दशकों से राजनीति पर हावी रही पार्टी और उसका ‘नाव’ चुनाव चिन्ह शामिल नहीं होगा।

अवामी लीग समर्थकों की दुविधा और डर

अवामी लीग के पारंपरिक गढ़ों में भी समर्थकों के बीच माहौल बंटा हुआ है। राजबाड़ी जिले के एक नाविक रिपन मृधा जैसे आजीवन अवामी लीग मतदाताओं ने चुनाव के प्रति बहुत कम उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार मतदान करेगा, क्योंकि उन्हें डर है कि मतदान न करने पर उन्हें अवामी लीग समर्थक के रूप में চিহ্নিত किया जा सकता है। इसके विपरीत, हसीना परिवार के गढ़ गोपालगंज में एक रिक्शा चालक सोलेमन मिया ने कहा कि वह और उनका परिवार इस साल मतदान नहीं करेंगे, क्योंकि “मतपत्र पर नाव के बिना चुनाव कोई चुनाव नहीं है।”

राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव

ढाका के गुलिस्तान इलाके में स्थित अवामी लीग का मुख्यालय अब वीरान पड़ा है, जिसे आंदोलन के दौरान तोड़ दिया गया था और आग लगा दी गई थी। अब यह इमारत बेघर लोगों के लिए एक आश्रय स्थल बन गई है। इलाके के दुकानदारों का कहना है कि महीनों से किसी भी अवामी लीग कार्यकर्ता को आसपास नहीं देखा गया है। वहीं, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के प्रतीकों वाले स्कार्फ की बिक्री बढ़ गई है, जो बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है। हसीना के शासन के दौरान, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया था, जिसमें उनके नेताओं को जेल में डालना और फांसी देना शामिल था।

पार्टी के भविष्य पर विभाजित मत

पार्टी के भविष्य को लेकर समर्थकों में अलग-अलग विचार हैं। अवामी लीग की छात्र शाखा, बांग्लादेश छात्र लीग के एक पूर्व नेता अरमान का मानना ​​है कि पार्टी केवल रणनीतिक चुप्पी बनाए हुए है और शेख हसीना के साथ वापस लौटेगी। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल होगा। उनका तर्क है कि अवामी लीग के बिना चुनाव होने पर, उसके मतदाता स्थानीय स्तर पर প্রভাবশালী ताकतों के साथ जुड़ जाएंगे, जिससे पार्टी का समर्थन आधार फिर से बनाना लगभग असंभव हो जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम और सर्वेक्षण

निर्वासन में रहते हुए, शेख हसीना ने नई दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में एक कार्यक्रम को एक पूर्व-रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में “विदेशी-सेवित कठपुतली शासन” को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। इस घटना पर ढाका ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह “हैरान और स्तब्ध” है कि भारतीय अधिकारियों ने ऐसे कार्यक्रम की अनुमति दी। इस बीच, इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण से पता चलता है कि अवामी लीग के पास अभी भी लगभग 11 प्रतिशत का समर्थन आधार है, भले ही पार्टी चुनाव अभियान से पूरी तरह से गायब है। अधिक जानकारी के लिए PaisaMag.com देखें।

शेख हसीना की सरकार के पतन और अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद, बांग्लादेश एक नए राजनीतिक युग की दहलीज पर खड़ा है। 12 फरवरी को होने वाले चुनाव पार्टी के भविष्य और देश की राजनीति की दिशा तय करेंगे, जबकि उसके समर्थक डर, अनिश्चितता और पहचान के संकट से जूझ रहे हैं।

FAQs

बांग्लादेश में अगला संसदीय चुनाव कब है?

बांग्लादेश में अगला संसदीय चुनाव 12 फरवरी को होना निर्धारित है।

अवामी लीग चुनाव में क्यों भाग नहीं ले रही है?

2024 में एक छात्र आंदोलन के कारण सरकार गिरने के बाद अवामी लीग पर सभी राजनीतिक गतिविधियों से प्रतिबंध लगा दिया गया था, इसलिए वह चुनाव में भाग नहीं ले रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना कहाँ हैं?

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में सत्ता से बेदखल होने के बाद भारत में निर्वासन में रह रही हैं।

शेख हसीना को क्या सज़ा सुनाई गई है?

एक विशेष न्यायाधिकरण ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों में उनकी भूमिका के लिए शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सज़ा सुनाई है।

अवामी लीग का चुनाव चिन्ह क्या था?

अवामी लीग का पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘नाव’ था, जो इस बार के मतपत्रों पर मौजूद नहीं होगा।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

spot_img
spot_img

latest articles

explore more

spot_img
spot_img
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x