सरकार द्वारा गुरुवार को जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था 2026-27 में 7% से अधिक की दर से विस्तार कर सकती है। यह अनुमान दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी इस वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। यह बाजार की आम सहमति से अधिक मजबूत दृष्टिकोण है। वित्त वर्ष 2026 के लिए, सरकार का अनुमान है कि खपत और निवेश के बल पर अर्थव्यवस्था 7.4% का विस्तार करेगी।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि हाल के वर्षों में हुए नीतिगत सुधारों के संचयी प्रभाव ने अर्थव्यवस्था की मध्यम अवधि की विकास क्षमता को 7% के करीब पहुंचा दिया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दृष्टिकोण वैश्विक अनिश्चितता के बीच स्थिर विकास का है, जिसके लिए सावधानी की आवश्यकता है, लेकिन निराशा की नहीं।
इन अनुमानों के अनुसार, भारत अपने निर्यात पर 50% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद, कम से कम एक और वर्ष के लिए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का स्थान बनाए रखेगा। नई दिल्ली अभी भी उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसने वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुख्य अनुमान
आर्थिक सर्वेक्षण, जो केंद्रीय बजट से ठीक पहले संसद में प्रस्तुत किया जाने वाला एक वार्षिक दस्तावेज है, पिछले वर्ष में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की समीक्षा करता है और भविष्य के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इस वर्ष के सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 (2026-27) में विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026 के लिए विकास दर का अनुमान 7.4% रखा गया है। इसके विपरीत, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अनुमान लगाया है कि यदि अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ बने रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि दर 6.2% रहेगी।
विकास को गति देने वाले नीतिगत सुधार
सरकार ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए हाल के महीनों में कई दूरगामी नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाया है। इन सुधारों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को आंतरिक रूप से मजबूत करना है।
सितंबर में, सरकार ने साबुन से लेकर छोटी कारों तक सैकड़ों वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती की, जो 1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार था।
भारत ने हाल ही में अपने श्रम कानूनों को सरल बनाने के लिए उन्हें केवल चार श्रम संहिताओं में बदल दिया है।
मई से, भारत ने चार मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपीय संघ के साथ एक बहुप्रतीक्षित व्यापार सौदा भी शामिल है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2025 से अपनी रेपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती की है, ताकि अर्थव्यवस्था में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके।
अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और बाहरी चुनौतियां
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि देश में मुद्रास्फीति कम है, फर्मों और परिवारों की बैलेंस शीट स्वस्थ है, और उपभोग की मांग लचीली बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, “ये स्थितियां बाहरी झटकों के खिलाफ लचीलापन प्रदान करती हैं और विकास की गति को जारी रखने में सहायता करती हैं।” हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ये प्रयास अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की कमी से होने वाले नुकसान की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकते हैं। सरकार इस मामले में अधिक आशावादी है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि “अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता इस वर्ष के दौरान समाप्त होने की उम्मीद है, जिससे बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता को कम करने में मदद मिल सकती है।”
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, सरकार ने नीतिगत सुधारों के बल पर आगामी वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 7% से अधिक की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह अनुमान वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद देश की आंतरिक मजबूती और आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है।
FAQs
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर क्या है?
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है।
सरकार ने विकास की गति को बढ़ावा देने के लिए कौन से प्रमुख सुधार किए हैं?
सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती, चार नए श्रम कोड का कार्यान्वयन, यूरोपीय संघ सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते और निवेश को प्रोत्साहित करने जैसे कई सुधार किए हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण क्या होता है?
आर्थिक सर्वेक्षण भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट है। यह केंद्रीय बजट से पहले प्रस्तुत की जाती है और पिछले एक साल में देश के आर्थिक प्रदर्शन का विस्तृत विवरण देती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने प्रमुख बाहरी चुनौती क्या है?
वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने अमेरिकी टैरिफ और वाशिंगटन के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न होना एक प्रमुख बाहरी चुनौती है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत का विकास पूर्वानुमान क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि यदि मौजूदा अमेरिकी टैरिफ बने रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की विकास दर 6.2% रहेगी।
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