विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में लीग ऑफ अरब स्टेट्स के महासचिव अहमद अबुल घीत से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करना था। यह मुलाकात भारत और अरब देशों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अहमद अबुल घीत दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। विदेश मंत्रालय ने मिस्र के राजनेता और राजनयिक घीत का गर्मजोशी से स्वागत किया। मंत्रालय के अनुसार, अगले कुछ दिनों में होने वाली उच्च-स्तरीय बैठकें विभिन्न क्षेत्रों में एक मजबूत भारत-अरब साझेदारी के लिए साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
यह बैठक 31 जनवरी को होने वाली दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) की पृष्ठभूमि में हुई है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित इस बैठक में अरब लीग के अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी भाग लेंगे। इस बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने और साझेदारी का विस्तार करने की उम्मीद है।
बैठक के प्रमुख बिंदु
अपनी बातचीत के बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “आज सुबह लीग ऑफ अरब स्टेट्स के महासचिव अहमद अबुल घीत के साथ एक गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई। हमारे सहयोग और इसे विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने के बारे में विस्तृत बातचीत हुई। साथ ही क्षेत्र के हालिया घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।” इस चर्चा ने दोनों पक्षों के लिए आपसी हित के मुद्दों पर संवाद को और गहरा करने का अवसर प्रदान किया।
आगामी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक
भारत 31 जनवरी को दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इस उच्च स्तरीय बैठक से पहले चौथी भारत-अरब वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी होगी। विदेश मंत्रियों के स्तर की यह बैठक 2016 के बाद हो रही है, जब पहली बैठक बहरीन में आयोजित की गई थी। इस तरह की बैठकें भारत की विदेश नीति और अरब देशों के साथ उसके संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत-अरब सहयोग का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और अरब देशों के बीच सहयोग का एक संस्थागत तंत्र है। मार्च 2002 में भारत और लीग ऑफ अरब स्टेट्स (LAS) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने संवाद प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया। दिसंबर 2008 में तत्कालीन अरब लीग के महासचिव अमरे मौसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे बाद में 2013 में संशोधित किया गया।
2016 में हुई पहली विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान, नेताओं ने सहयोग के लिए पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की थी। इनमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति शामिल थे। भारत लीग ऑफ अरब स्टेट्स में एक पर्यवेक्षक है, जो 22 सदस्य देशों का एक अखिल-अरब निकाय है।
यह बैठक भारत और अरब दुनिया के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती है। इसका उद्देश्य मौजूदा सहयोग के आधार पर साझेदारी का विस्तार करना और भविष्य के लिए एक नई रूपरेखा तैयार करना है।
FAQs
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किससे मुलाकात की?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लीग ऑफ अरब स्टेट्स के महासचिव अहमद अबुल घीत से मुलाकात की।
यह बैठक कहाँ आयोजित हुई?
यह बैठक भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
अहमद अबुल घीत भारत क्यों आए हैं?
अहमद अबुल घीत दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और संबंधित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भारत आए हैं।
पहली भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक कब और कहाँ हुई थी?
पहली भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित की गई थी।
लीग ऑफ अरब स्टेट्स में कितने सदस्य देश हैं?
लीग ऑफ अरब स्टेट्स 22 सदस्य देशों का एक अखिल-अरब संगठन है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


