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रिलायंस जियो, एसबीआई म्यूचुअल फंड, आईजीएक्स और महानदी कोलफील्ड्स आज सुर्खियों में

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) और देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों ने निवेशकों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को बाजार के जोखिमों, विशेषकर डेरिवेटिव सेगमेंट में होने वाले नुकसान, और अनधिकृत निवेश योजनाओं से बचाना है। नियामकों ने निवेशकों को अपने डीमैट और ट्रेडिंग खातों की सुरक्षा के प्रति भी सचेत किया है।

नियामकीय विश्लेषण में यह पाया गया है कि इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में व्यापार करने वाले अधिकांश व्यक्तिगत व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, निवेशकों को व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली अपुष्ट सलाहों और गारंटीड रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

इन दिशानिर्देशों में निवेशकों को अपने खाते के विवरण जैसे लॉगिन आईडी, पासवर्ड और ओटीपी किसी के साथ साझा न करने की सलाह दी गई है। साथ ही, किसी भी धोखाधड़ी या अनधिकृत लेनदेन से बचने के लिए अपने मोबाइल नंबर और ईमेल पते को अपने ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के पास अपडेट रखना अनिवार्य बताया गया है। निवेशकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी स्थापित किए गए हैं।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में बड़े जोखिम पर सेबी का खुलासा

सेबी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले 10 में से 9 व्यक्तिगत व्यापारियों को शुद्ध घाटा हुआ है। औसतन, नुकसान उठाने वाले व्यापारियों को लगभग ₹50,000 का शुद्ध व्यापारिक घाटा हुआ।

यह भी पाया गया कि इन व्यापारियों ने शुद्ध व्यापारिक घाटे के अलावा, लेनदेन लागत के रूप में अतिरिक्त 28% राशि खर्च की। वहीं, जो व्यापारी शुद्ध मुनाफा कमाने में सफल रहे, उन्हें भी अपने मुनाफे का 15% से 50% हिस्सा लेनदेन लागत के रूप में चुकाना पड़ा। ये आंकड़े इस सेगमेंट में मौजूद उच्च जोखिम को दर्शाते हैं।

अनधिकृत योजनाओं और सलाहकारों से सावधानी

एनएसई, बीएसई और एमसीएक्स द्वारा जारी परिपत्रों के अनुसार, निवेशकों को अनधिकृत सामूहिक निवेश योजनाओं और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। निवेशकों को ऐसी किसी भी योजना से बचना चाहिए जो निश्चित, गारंटीकृत या सांकेतिक रिटर्न का वादा करती हो।

इसके अतिरिक्त, बिना उचित समझ के लीवरेज्ड उत्पादों या डेरिवेटिव्स जैसे ऑप्शंस में व्यापार करने से होने वाले संभावित नुकसान के प्रति आगाह किया गया है। निवेशकों को व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली अवांछित सलाहों के आधार पर व्यापार करने से बचना चाहिए। अपंजीकृत निवेश सलाहकारों और प्रभावशाली व्यक्तियों की सिफारिशों पर ऑप्शंस में ट्रेडिंग करना जोखिम भरा हो सकता है।

डीमैट और ट्रेडिंग खातों की सुरक्षा के उपाय

निवेशकों को अपने डीमैट और ट्रेडिंग खातों में अनधिकृत लेनदेन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की सलाह दी गई है। अपने मोबाइल नंबर और ईमेल पते को अपने स्टॉक ब्रोकर और डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के साथ अपडेट रखना महत्वपूर्ण है। इससे निवेशकों को अपने खाते में होने वाले सभी डेबिट और अन्य महत्वपूर्ण लेनदेन के बारे में सीडीएसएल और एक्सचेंजों से सीधे अलर्ट प्राप्त होते हैं।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि निवेशकों को अपने ट्रेडिंग क्रेडेंशियल, जैसे लॉगिन आईडी, पासवर्ड और ओटीपी, किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) प्रतिभूति बाजार में एक बार की जाने वाली प्रक्रिया है। यदि आपने किसी सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ (ब्रोकर, डीपी, म्यूचुअल फंड) के माध्यम से एक बार केवाईसी पूरा कर लिया है, तो आपको दूसरे मध्यस्थ के पास जाने पर इस प्रक्रिया को दोहराने की आवश्यकता नहीं है।

निवेश और शिकायत निवारण प्रक्रिया

अब आईपीओ में निवेश के लिए चेक जारी करने की आवश्यकता नहीं है। निवेशक आवेदन पत्र में अपने बैंक खाते का नंबर लिखकर और हस्ताक्षर करके आवंटन की स्थिति में भुगतान के लिए अपने बैंक को अधिकृत कर सकते हैं। पैसा निवेशक के खाते में ही रहता है, जिससे रिफंड की कोई चिंता नहीं होती। 1 सितंबर, 2020 से स्टॉकब्रोकर केवल डिपॉजिटरी सिस्टम में गिरवी (pledge) के माध्यम से ही अपने ग्राहकों से मार्जिन के रूप में प्रतिभूतियां स्वीकार कर सकते हैं।

किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए, निवेशक सेबी के SCORES पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के लिए नाम, पैन, पता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अनिवार्य है। इसके अलावा, सेबी ने भारतीय प्रतिभूति बाजार में विवादों को ऑनलाइन हल करने के लिए एक ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल भी स्थापित किया है।

संक्षेप में, नियामक संस्थाएं निवेशकों को शिक्षित करने और उन्हें शेयर बाजार के जोखिमों से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य एक सुरक्षित और पारदर्शी निवेश वातावरण बनाना है, जिसमें निवेशक सावधानी और पूरी जानकारी के साथ निर्णय ले सकें।

FAQs

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में मुख्य जोखिम क्या है?

सेबी के आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वाले 10 में से 9 व्यक्तिगत व्यापारियों को शुद्ध वित्तीय घाटा होता है, जो इस सेगमेंट से जुड़े उच्च जोखिम को दर्शाता है।

अनधिकृत निवेश योजनाओं को कैसे पहचानें?

ऐसी कोई भी योजना जो गारंटीकृत, निश्चित या सांकेतिक रिटर्न का वादा करती है, वह अनधिकृत हो सकती है। निवेशकों को ऐसी योजनाओं में निवेश करने से बचना चाहिए।

अपने डीमैट खाते को कैसे सुरक्षित रखें?

अपने डीमैट खाते को सुरक्षित रखने के लिए अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अपडेट रखें और कभी भी अपनी लॉगिन आईडी, पासवर्ड या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।

क्या KYC हर बार नए ब्रोकर के पास कराना पड़ता है?

नहीं, केवाईसी एक बार की प्रक्रिया है। यदि आपने किसी सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ के माध्यम से इसे पूरा कर लिया है, तो आपको इसे दोबारा कराने की आवश्यकता नहीं है।

निवेश संबंधी शिकायत कहां दर्ज करा सकते हैं?

निवेशक अपनी शिकायतें सेबी के SCORES (सेबी शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल और नए स्थापित ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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