प्रसिद्ध कलाकार फेलिक्स टोपोलस्की द्वारा महात्मा गांधी के बनाए गए रेखाचित्र और पेंटिंग्स, उनकी कलात्मक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह कलाकृतियाँ उस समय की हैं जब टोपोलस्की ने गांधीजी को औपचारिक बैठकों के बिना, उनके स्वाभाविक रूप में देखा और कुछ ही स्ट्रोक्स के माध्यम से उनके गतिशील व्यक्तित्व को कैनवास पर उतार दिया। ये चित्र महज़ कला नहीं, बल्कि इतिहास के दस्तावेज़ हैं।
1951 में लंदन में एक मुलाकात के दौरान, बर्नार्ड शॉ के रेखाचित्रों की एक पुस्तक देखने के बाद टोपोलस्की को महात्मा गांधी पर भी एक ऐसी ही पुस्तक बनाने का सुझाव दिया गया था। इससे पहले टोपोलस्की दो बार भारत आ चुके थे और हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित अपने चित्रों के लिए ख्याति प्राप्त कर चुके थे। इस सुझाव के बाद, उन्होंने गांधीजी से जुड़े अपने सभी पुराने स्केच एकत्र किए।
इन कलाकृतियों में सबसे चर्चित 1946 में बनाई गई एक पेंटिंग है, जिसे कई कला समीक्षक गांधीजी की हत्या का पूर्वाभास मानते हैं। इसके अलावा, उनकी एक और उत्कृष्ट कृति, जो अब नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित है, भारतीय इतिहास का एक अमूल्य हिस्सा बन चुकी है। इन सभी कलाकृतियों का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया गया था।
गांधी जी के रेखाचित्रों की कहानी
1951 में लंदन में कलाकार फेलिक्स टोपोलस्की के घर पर एक मुलाकात के दौरान उन्हें महात्मा गांधी के चित्रों का एक संग्रह प्रकाशित करने का विचार सुझाया गया। टोपोलस्की ने गांधीजी के लिए कभी कोई औपचारिक बैठक आयोजित नहीं की। इसके बजाय, उन्होंने गांधीजी को विभिन्न अवसरों पर दूर से देखकर ही स्केच बनाए। इसका परिणाम त्वरित और अपरिष्कृत रेखाचित्रों के रूप में सामने आया, जिन्होंने कुछ ही रेखाओं में गांधीजी के ऊर्जावान व्यक्तित्व को सटीकता से पकड़ लिया। इस संग्रह में शामिल अधिकांश श्वेत-श्याम रेखाचित्र 1944 में बनाए गए थे।
1946 की भविष्यसूचक पेंटिंग
संग्रह की एक पेंटिंग 1946 में बनाई गई थी, जिसे कई कला समीक्षक 30 जनवरी, 1948 को हुई गांधीजी की हत्या का एक कलात्मक पूर्वाभास मानते हैं। इस पेंटिंग में गांधीजी को एक शांत लेकिन शिथिल अवस्था में दर्शाया गया है, जिन्हें उनके साथी गिरने से बचा रहे हैं। उनका दाहिना हाथ संदेह और पीड़ा में आधा उठा हुआ है। हालांकि, कलाकार ने स्वयं इस पूर्वाभास के सिद्धांत की न तो पुष्टि की और न ही इसे नकारा, लेकिन यह चित्र दर्शकों के लिए मूल्यांकन हेतु उपलब्ध है। इसी विषय पर आधारित एक अन्य 1946 की पेंटिंग लंदन के एक प्रमुख कला समीक्षक मौरिस कोलिस के पास है।
राष्ट्रपति भवन में स्थापित उत्कृष्ट कृति
1948 में गांधीजी की हत्या के बाद, टोपोलस्की ने अपनी एक महान कृति “द ईस्ट, 1948” बनाई। यह एक 12×9 फीट का विशाल कैनवास है जिसमें अफ्रीका, मध्य पूर्व, भारत और चीन को दर्शाया गया है। इस पेंटिंग के भारत वाले हिस्से में, उन्होंने अपनी 1946 की पेंटिंग को कुछ अतिरिक्त विवरणों के साथ दोहराया है। यह विशाल पेंटिंग वर्तमान में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन की एक दीवार पर लगी है। इसे अप्रैल 1949 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लंदन यात्रा के दौरान भारत सरकार के लिए अधिग्रहित किया था।
टोपोलस्की की विशिष्ट कला शैली
फेलिक्स टोपोलस्की को उनकी बेपरवाह और साहसी शैली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्राप्त थी। उनके रेखाचित्र पहली नज़र में साधारण लग सकते हैं, जिनमें बच्चों जैसी लापरवाही से खींची गईं रेखाएँ होती हैं। उनकी एक और खासियत यह थी कि वे अपनी कलाकृति पर कंटीले तारों के कुंडल जैसे आकार बना देते थे। इन सभी विशेषताओं के बावजूद, उनकी कला में शांति, शक्ति और लय का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है।
फेलिक्स टोपोलस्की के ये चित्र केवल कलाकृतियाँ नहीं हैं, बल्कि महात्मा गांधी के जीवन के अंतिम वर्षों का एक अनूठा दृश्य रिकॉर्ड भी हैं। 1946 की पेंटिंग, जिसे उनकी हत्या का पूर्वाभास माना जाता है, और राष्ट्रपति भवन में रखी गई उनकी विशाल कृति, भारतीय इतिहास और कला के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में स्थापित हैं।
FAQs
फेलिक्स टोपोलस्की कौन थे?
फेलिक्स टोपोलस्की पोलैंड में जन्मे एक प्रसिद्ध ब्रिटिश अभिव्यक्तिवादी चित्रकार और ड्राफ्ट्समैन थे, जो अपनी युद्धकालीन कला और ऐतिहासिक घटनाओं के जीवंत चित्रण के लिए जाने जाते थे।
टोपोलस्की ने गांधी जी के रेखाचित्र कैसे बनाए?
टोपोलस्की ने गांधीजी को औपचारिक बैठकों में चित्रित नहीं किया, बल्कि उन्हें विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में दूर से देखकर उनके त्वरित और स्वाभाविक रेखाचित्र बनाए।
1946 की पेंटिंग को भविष्यसूचक क्यों कहा जाता है?
इस पेंटिंग में गांधीजी को एक कमजोर और शिथिल अवस्था में दर्शाया गया है, जिसे उनके साथी सहारा दे रहे हैं। कला समीक्षकों ने इसे दो साल बाद हुई उनकी हत्या का एक दुखद पूर्वाभास माना।
टोपोलस्की की प्रसिद्ध गांधी पेंटिंग “द ईस्ट, 1948” कहाँ है?
यह 12×9 फीट की विशाल पेंटिंग नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास, राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित है।
यह पेंटिंग भारत सरकार को कैसे प्राप्त हुई?
इस पेंटिंग को अप्रैल 1949 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी लंदन यात्रा के दौरान भारत सरकार के लिए खरीदा था।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


