रानी मुखर्जी की आगामी फिल्म ‘मर्दानी 3’ को इसकी थिएट्रिकल रिलीज से पहले एक बड़ी कानूनी सुरक्षा मिल गई है। बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने फिल्म के कॉपीराइट की सुरक्षा के लिए एक ‘एड-अंतरिम’ पायरेसी-रोधी निषेधाज्ञा जारी की। यह आदेश फिल्म के निर्माता, यश राज फिल्म्स द्वारा दायर एक मुकदमे के बाद पारित किया गया, जिसमें रिलीज से पहले और बाद में संभावित पायरेसी को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।
यह महत्वपूर्ण कदम फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है, जो लंबे समय से पायरेसी की समस्या से जूझ रहा है। उच्च न्यायालय का यह आदेश फिल्म को अवैध ऑनलाइन सर्कुलेशन और अनधिकृत प्रसारण से बचाने में मदद करेगा, जिससे निर्माताओं के व्यावसायिक हितों की रक्षा हो सकेगी।
इस आदेश के तहत, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और केबल ऑपरेटरों पर फिल्म के किसी भी हिस्से को अवैध रूप से प्रसारित या वितरित करने पर रोक लगा दी गई है। यह फिल्म की रिलीज की तारीख 30 जनवरी, 2026 तक प्रभावी रहेगा, ताकि इसे सिनेमाघरों में एक सुरक्षित रिलीज मिल सके।
न्यायालय का अंतरिम आदेश
न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) और केबल टेलीविजन ऑपरेटरों को फिल्म के किसी भी अनधिकृत प्रसारण, संचार या प्रसार से रोक दिया है। इस निषेधाज्ञा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फिल्म को सिनेमाघरों में इसकी आधिकारिक रिलीज से पहले अवैध रूप से टेलीकास्ट या ऑनलाइन प्रसारित न किया जाए।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
आदेश पारित करते हुए, अदालत ने कहा कि रिलीज से पहले पायरेसी से जुड़े मामलों में कॉपीराइट धारक को अपरिवर्तनीय क्षति का खतरा होता है, यदि अनधिकृत प्रसारण को जल्द से जल्द नहीं रोका जाता है। अदालत ने यह भी नोट किया कि एक बार जब पायरेटेड सामग्री सार्वजनिक डोमेन में आ जाती है, तो निर्माता के व्यावसायिक हितों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती।
हितों के बीच संतुलन
अदालत ने पायरेसी-रोधी आदेशों के व्यापक दायरे से जुड़ी चिंताओं को भी स्वीकार किया। न्यायालय ने माना कि ऐसे विस्तृत आदेश मध्यस्थों, जैसे ISPs और केबल ऑपरेटरों के वैध व्यावसायिक हितों को प्रभावित कर सकते हैं, जो सीधे पायरेसी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और वैध व्यावसायिक संचालन को बनाए रखने के बीच संतुलन साधते हुए, अदालत ने निर्देश दिया कि यह निषेधाज्ञा यश राज फिल्म्स द्वारा प्रतिवादियों के पक्ष में एक क्षतिपूर्ति पत्र प्रस्तुत करने के अधीन लागू रहेगी।
‘मर्दानी 3’ के बारे में
‘मर्दानी 3’ लोकप्रिय ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त है। इस फिल्म में रानी मुखर्जी एक बार फिर पुलिस अधिकारी की अपनी सशक्त भूमिका में नजर आएंगी, जिसे उन्होंने 2014 और 2019 में रिलीज हुई पिछली फिल्मों में भी निभाया था। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और यह 30 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
यह कानूनी कार्रवाई यश राज फिल्म्स ने इस आशंका के बीच शुरू की थी कि ‘मर्दानी 3’ को अवैध टेलीकास्ट या ऑनलाइन सर्कुलेशन का सामना करना पड़ सकता है, जो आजकल बड़ी फिल्मों की रिलीज के साथ एक आम चिंता बन गई है। हाल ही में, मद्रास उच्च न्यायालय ने हिंदी फिल्म ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ के लिए भी इसी तरह का एक अंतरिम आदेश पारित किया था।
यह फैसला फिल्म उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पायरेसी के खतरे से निपटने के लिए न्यायपालिका के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह आदेश अन्य फिल्म निर्माताओं को भी अपनी फिल्मों को रिलीज से पहले सुरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
FAQs
‘मर्दानी 3’ को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय ने क्या आदेश दिया है?
मद्रास उच्च न्यायालय ने ‘मर्दानी 3’ की रिलीज से पहले इसकी पायरेसी को रोकने के लिए एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की है, जो इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और केबल ऑपरेटरों को फिल्म के अनधिकृत प्रसारण से रोकती है।
यह कानूनी कार्रवाई किसने की थी?
यह कानूनी कार्रवाई फिल्म की निर्माता कंपनी यश राज फिल्म्स ने अपनी फिल्म के कॉपीराइट की सुरक्षा और संभावित पायरेसी को रोकने के लिए की थी।
फिल्म ‘मर्दानी 3’ कब रिलीज होगी?
फिल्म ‘मर्दानी 3’, जिसमें रानी मुखर्जी मुख्य भूमिका में हैं, 30 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित है।
न्यायालय ने अपने आदेश में क्या शर्त रखी है?
न्यायालय ने यह शर्त रखी है कि यह आदेश तभी लागू रहेगा जब यश राज फिल्म्स प्रतिवादियों (जैसे ISPs) के पक्ष में एक क्षतिपूर्ति पत्र प्रस्तुत करेगा, ताकि उनके किसी भी वैध व्यावसायिक नुकसान की भरपाई हो सके।
क्या यह पहली बार है जब अदालत ने ऐसा आदेश दिया है?
नहीं, मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ नामक एक अन्य हिंदी फिल्म के लिए भी इसी तरह का पायरेसी-रोधी आदेश पारित किया था।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


