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रक्षा तैयारियों में तेजी लाने के लिए जर्मनी ने दिया ‘टू-स्पीड’ EU का प्रस्ताव

जर्मनी ने ‘टू-स्पीड’ यूरोपीय संघ (EU) बनाने की एक नई पहल का नेतृत्व किया है, जिसका उद्देश्य बढ़ते भू-राजनीतिक दबावों के बीच रक्षा सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को गति देना है। इस प्रस्ताव के तहत, छह प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक मुख्य समूह पारंपरिक सर्वसम्मति-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को दरकिनार कर सकता है।

इस पहल को स्थापित करने के लिए, जिसे E6 प्रारूप कहा जा रहा है, जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील और उनके फ्रांसीसी समकक्ष रोलैंड लेस्क्योर ने 28 जनवरी को पोलैंड, स्पेन, इटली और नीदरलैंड के वित्त मंत्रियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की। क्लिंगबील ने बैठक से पहले बर्लिन में एक कार्यक्रम में कहा, “अब दो गतियों वाले यूरोप का समय है।”

इस अवधारणा का लक्ष्य यूरोप की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना और संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भरता कम करना है। हालांकि, इस दृष्टिकोण से यूरोपीय संघ के भीतर एकजुटता को लेकर चिंताएं भी पैदा हुई हैं, क्योंकि यह उन सदस्य देशों को अलग-थलग कर सकता है जो इस मुख्य समूह का हिस्सा नहीं हैं।

यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब जर्मनी स्वयं एक ऐतिहासिक सैन्य विस्तार कर रहा है और अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ रणनीतिक संबंधों को नया आकार दे रहा है।

E6 समूह का गठन और उद्देश्य

जर्मनी द्वारा शुरू किए गए ‘टू-स्पीड’ यूरोपीय संघ की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए छह प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह बनाया गया है, जिसे E6 कहा जा रहा है। इस समूह में जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, स्पेन, इटली और नीदरलैंड शामिल हैं। इस समूह की पहली बैठक 28 जनवरी को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई, जिसकी संयुक्त मेजबानी जर्मनी और फ्रांस के वित्त मंत्रियों ने की।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रमुख मुद्दों पर तेजी से निर्णय लेना है, विशेष रूप से रक्षा और उद्योग के क्षेत्रों में। मौजूदा यूरोपीय संघ की व्यवस्था में, 27 सदस्य देशों के बीच किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सर्वसम्मति की आवश्यकता होती है, जिससे प्रक्रिया अक्सर धीमी हो जाती है। E6 प्रारूप का विचार इस बाधा को पार करना है ताकि यह मुख्य समूह त्वरित गति से आगे बढ़ सके।

जर्मनी का चार-सूत्रीय एजेंडा

जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील ने अपने समकक्षों को भेजे एक निमंत्रण पत्र में चार-सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया। इस एजेंडे में रक्षा खर्च को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पत्र के अनुसार, यूरोप को मजबूत और अधिक लचीला बनने की जरूरत है और इस लक्ष्य की दिशा में काम में तेजी लानी होगी।

एजेंडे के अन्य तीन प्रमुख बिंदु बचत और निवेश संघ (Savings and Investment Union) बनाना, यूरो को मजबूत करना और महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति को सुरक्षित करना हैं। क्लिंगबील के दस्तावेज़ में रक्षा खर्च पर सहयोग बढ़ाने और अगले यूरोपीय संघ के बहु-वार्षिक बजट में रक्षा को एक प्रमुख केंद्र बनाने का आग्रह किया गया है। साथ ही, रक्षा को महाद्वीप की अर्थव्यवस्था के लिए “विकास के इंजन” में बदलने का भी आह्वान किया गया है।

बढ़ती रक्षा साझेदारी और रणनीतिक बदलाव

यह पहल बर्लिन की यूरोपीय साझेदारियों में एक रणनीतिक पुनर्संरेखण को भी दर्शाती है। 27 जनवरी को, चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ एक रणनीतिक सहयोग योजना पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों को क्षमता अंतराल को पाटकर और नाटो (NATO) के भीतर यूरोपीय स्तंभ को मजबूत करके यूरोपीय रक्षा तैयारी हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध करता है। दोनों देश एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा, मानव रहित प्रणाली और नौसैनिक जहाजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।

इसके साथ ही, जर्मनी पोलैंड के साथ भी अपने रक्षा संबंधों को गहरा कर रहा है। मेर्ज़ ने घोषणा की कि जर्मनी और पोलैंड 2026 तक एक नए रक्षा नीति समझौते का मसौदा तैयार कर रहे हैं। जर्मन सेना (Bundeswehr) पहले से ही पोलिश सेना के साथ संयुक्त अभ्यास बढ़ा रही है और ड्रोन का पता लगाने जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार कर रही है।

जर्मनी का विशाल रक्षा बजट

यह पहल ऐसे समय में आई है जब जर्मनी खुद अपने सैन्य बजट में भारी वृद्धि कर रहा है। बर्लिन के 2026 के बजट में सेना के लिए €82.69 बिलियन ($98.92 बिलियन) आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, एक विशेष रक्षा कोष से अतिरिक्त €25.5 बिलियन ($30.5 बिलियन) प्रदान किए जाएंगे। चांसलर मेर्ज़ का घोषित लक्ष्य जर्मनी को “यूरोप की सबसे मजबूत पारंपरिक सेना” बनाना है।

22 जनवरी को दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर, मेर्ज़ ने जर्मनी के रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 5% तक बढ़ाने की अपनी योजना की पुष्टि की। उन्होंने इसे यूरोपीय संप्रभुता का दावा करने के लिए आवश्यक “एक बड़ी वृद्धि” बताया।

पहल से जुड़ी चिंताएं और चुनौतियां

हालांकि ‘टू-स्पीड’ यूरोप की अवधारणा को गति मिल रही है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। इस दृष्टिकोण से यूरोपीय संघ के सदस्यों के बीच दरार पड़ सकती है। जो देश इस E6 समूह का हिस्सा नहीं हैं, वे अलग-थलग महसूस कर सकते हैं, जिससे ब्लॉक की समग्र एकता कमजोर हो सकती है। हालांकि, जर्मन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह प्रारूप लचीला रहेगा और भविष्य में अन्य प्रतिभागियों के लिए भी खुला हो सकता है।

यह पहल यूरोपीय संघ के पारंपरिक विकास इंजन, यानी फ्रांस और जर्मनी के बीच तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में भी हो रही है। यूरोप के अगली पीढ़ी के लड़ाकू जेट को डिजाइन करने के लिए फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) परियोजना में गतिरोध और 27 सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति के नियमों से उत्पन्न चुनौतियां इस कदम के पीछे के कुछ प्रमुख कारण हैं।

जर्मनी के नेतृत्व में यह नई पहल यूरोपीय संघ के भविष्य की दिशा बदल सकती है, जिसमें एक छोटा, अधिक शक्तिशाली समूह महत्वपूर्ण नीतियों पर तेजी से आगे बढ़ेगा, जबकि अन्य सदस्य देश धीमी गति से एकीकृत होंगे।

FAQs

‘टू-स्पीड’ यूरोपीय संघ की पहल क्या है?

यह जर्मनी द्वारा प्रस्तावित एक अवधारणा है जिसमें यूरोपीय संघ के छह प्रमुख देश रक्षा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में पारंपरिक सर्वसम्मति-आधारित निर्णयों को दरकिनार कर तेजी से सहयोग और एकीकरण कर सकते हैं।

E6 समूह में कौन से देश शामिल हैं?

E6 समूह में छह प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं: जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, स्पेन, इटली और नीदरलैंड।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस पहल का मुख्य उद्देश्य बढ़ते भू-राजनीतिक दबावों के बीच यूरोपीय संघ के रक्षा सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में तेजी लाना तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है।

जर्मनी अपने रक्षा बजट में कितनी वृद्धि कर रहा है?

जर्मनी ने अपने 2026 के बजट में सेना के लिए €82.69 बिलियन आवंटित किए हैं, साथ ही एक विशेष कोष से €25.5 बिलियन अतिरिक्त दिए गए हैं। चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ ने रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

जर्मनी किन देशों के साथ अपनी रक्षा साझेदारी बढ़ा रहा है?

जर्मनी इटली के साथ एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहा है, और पोलैंड के साथ एक नए रक्षा नीति समझौते पर काम कर रहा है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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