भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की स्थापना की घोषणा नई दिल्ली में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की भारत यात्रा के दौरान की गई। यह निर्णय यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया। इस परिषद का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना है।
इस उच्च-स्तरीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना था। इस परिषद के माध्यम से, भारत और यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करेंगे और अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देंगे।
इस यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने एक दशक से रुके हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतों (Geographical Indications) पर भी अलग-अलग समझौतों के लिए बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया गया, जो आर्थिक संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद का शुभारंभ
भारत और यूरोपीय संघ ने एक व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह एक रणनीतिक समन्वय तंत्र है जो दोनों भागीदारों को व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के गठजोड़ पर चुनौतियों का समाधान करने की अनुमति देगा। यह परिषद दोनों पक्षों के बीच सहयोग को गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।
यह भारत के लिए स्थापित अपनी तरह का पहला परिषद है, जबकि यूरोपीय संघ के लिए यह केवल दूसरा है। यूरोपीय संघ ने पहला ऐसा परिषद संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ स्थापित किया था। यह कदम भारत के साथ अपने संबंधों को लेकर यूरोपीय संघ की रणनीतिक महत्ता को दर्शाता है।
मुक्त व्यापार और निवेश समझौतों पर वार्ता की बहाली
इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण परिणाम भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत को फिर से शुरू करना है। दोनों पक्ष एक संतुलित, महत्वाकांक्षी, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर बातचीत करने के लिए सहमत हुए हैं।
इसके अलावा, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतों पर अलग-अलग समझौतों के लिए भी बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और निवेश के लिए एक स्थिर और पूर्वानुमानित कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
यात्रा के प्रमुख भागीदार और बैठकें
इस महत्वपूर्ण यात्रा में यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने किया। उनकी भारत यात्रा के दौरान, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और इसे आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
यह यात्रा रायसीना डायलॉग 2022 के अवसर पर हुई, जिसमें अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि थीं। इस मंच पर भी उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्र
व्यापार और प्रौद्योगिकी के अलावा, भारत और यूरोपीय संघ ने कई अन्य क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की। इनमें डिजिटल परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, स्वास्थ्य सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करना है, जो दोनों के लिए एक साझा प्राथमिकता है।
यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की स्थापना और मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की बहाली जैसे निर्णय दोनों पक्षों के बीच मजबूत होते आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को दर्शाते हैं।
FAQs
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद क्या है?
यह एक रणनीतिक समन्वय तंत्र है जिसे भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने और सहयोग को गहरा करने के लिए स्थापित किया गया है।
इस यात्रा पर यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व किसने किया?
इस यात्रा पर यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने किया।
क्या भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू हो गई है?
हाँ, इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
व्यापार के अलावा किन अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
व्यापार के अलावा, डिजिटल परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, सुरक्षा और रक्षा, तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
यह परिषद यूरोपीय संघ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह परिषद यूरोपीय संघ के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के साथ स्थापित पहला ऐसा तंत्र है और अमेरिका के बाद दुनिया में केवल दूसरा है, जो भारत के साथ यूरोपीय संघ के रणनीतिक संबंधों के महत्व को दर्शाता है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


