प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 जनवरी, 2026 को घोषणा की कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है और 2047 तक 400 से अधिक हवाई अड्डों के साथ एक नए भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह घोषणा हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 के उद्घाटन समारोह के दौरान की गई, जहाँ भारत को विमान निर्माण, हरित विमानन ईंधन और अगली पीढ़ी की हवाई गतिशीलता के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रधानमंत्री ने एक रिकॉर्डेड संदेश के माध्यम से वैश्विक विमानन जगत के नेताओं, निवेशकों और नीति निर्माताओं को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय एयरलाइंस ने पहले ही 1,500 से अधिक विमानों के ऑर्डर दे दिए हैं, जो इस क्षेत्र में वृद्धि के पैमाने और गति को दर्शाता है। यह भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक है।
श्री मोदी ने कहा कि भारत की विमानन कहानी अब केवल कुछ विशिष्ट लोगों की यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी, निवेश के अवसरों और रणनीतिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत में हवाई यात्रा अब विशिष्ट नहीं, बल्कि समावेशी हो गई है,” और पिछले दशक को नागरिक उड्डयन के लिए “ऐतिहासिक परिवर्तन” का दौर बताया।
विंग्स इंडिया 2026 में प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित प्रमुख विमानन कार्यक्रम विंग्स इंडिया 2026 का उद्घाटन करते हुए देश के विमानन क्षेत्र के लिए अपने दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने भारत को न केवल एक बड़े बाजार के रूप में, बल्कि विमान निर्माण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सेवाओं और हरित विमानन प्रौद्योगिकियों के लिए एक वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के विमानन उद्योग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिन्होंने भारत की विकास गाथा में गहरी रुचि दिखाई।
बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत के विमानन बुनियादी ढांचे में दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई है। 2014 में जहाँ देश में केवल 70 हवाई अड्डे थे, वहीं अब 160 से अधिक परिचालन हवाई अड्डे और एयरोड्रम हैं। सरकार का लक्ष्य इस विस्तार को और तेज करना है। उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि 2047 तक, जब भारत एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है, देश में 400 से अधिक हवाई अड्डे होंगे, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े विमानन नेटवर्कों में से एक बना देगा। यह विस्तार देश की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर सरकार का जोर
सरकार के विमानन एजेंडे में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) योजना ने पहले ही लगभग 1.5 करोड़ यात्रियों को उन मार्गों पर उड़ान भरने में सक्षम बनाया है जो पहले मौजूद नहीं थे। इस योजना ने टियर-2 और टियर-3 शहरों को राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से सफलतापूर्वक जोड़ा है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अब उड़ान के अगले चरण पर काम कर रही है, जो सस्ती हवाई कनेक्टिविटी को और गहरा करेगा और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए सी-प्लेन संचालन का भी विस्तार करेगा।
विनिर्माण और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
बुनियादी ढांचे के अलावा, श्री मोदी ने विमानन निर्माण और सेवाओं में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने वैश्विक कंपनियों से आग्रह किया कि वे भारत को केवल एक बाजार के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक उत्पादन आधार के रूप में भी अपनाएं। उन्होंने विमान डिजाइन, निर्माण और एमआरओ इकोसिस्टम पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत पहले से ही विमान घटकों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है और घरेलू स्तर पर सैन्य और परिवहन विमानों का निर्माण शुरू कर दिया है।
भविष्य की तकनीक और हरित विमानन
भविष्य की ओर देखते हुए, प्रधानमंत्री ने उन विघटनकारी प्रौद्योगिकियों की ओर इशारा किया जो इस क्षेत्र को फिर से परिभाषित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में डिजाइन और निर्मित इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) विमान यात्रा के समय को तेजी से कम करके शहरी और क्षेत्रीय गतिशीलता में क्रांति ला देंगे। उन्होंने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) पर भारत के जोर को भी रेखांकित किया और भविष्यवाणी की कि देश जल्द ही हरित विमानन ईंधन का एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक बनकर उभरेगा।
पर्यटन और कार्गो लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने विमानन विकास को पर्यटन और लॉजिस्टिक्स से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत भर में पर्यटन स्थलों के विकास के साथ, हवाई यात्रा की मांग में “अभूतपूर्व विस्तार” होना तय है, जिससे निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। एयर कार्गो के संबंध में, उन्होंने लॉजिस्टिक्स लागत और डिलीवरी के समय को कम करने के लिए नियामक सुधारों, डिजिटल कार्गो प्लेटफॉर्म और आधुनिक वेयरहाउसिंग पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य भारत को एक प्रतिस्पर्धी ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक निवेशकों को वेयरहाउसिंग, फ्रेट फॉरवर्डिंग और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने वैश्विक कंपनियों से भारत की विमानन यात्रा में “सह-पायलट” बनने का आग्रह करते हुए कहा कि कुछ ही देश इस तरह का पैमाना, राजनीतिक स्थिरता और तकनीकी महत्वाकांक्षा प्रदान करते हैं।
FAQs
भारत का 2047 तक विमानन क्षेत्र में क्या लक्ष्य है?
भारत का लक्ष्य 2047 तक 400 से अधिक हवाई अड्डों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित करना है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े विमानन नेटवर्कों में से एक बन जाएगा।
विंग्स इंडिया 2026 का आयोजन कहाँ किया गया?
विंग्स इंडिया 2026 का आयोजन हैदराबाद, तेलंगाना में किया गया था, जहाँ प्रधानमंत्री ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपना संबोधन दिया।
उड़ान (UDAN) योजना क्या है?
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना एक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना है जिसका उद्देश्य छोटे शहरों को सस्ती हवाई यात्रा के माध्यम से देश के प्रमुख हवाई नेटवर्कों से जोड़ना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विमानन में आत्मनिर्भरता के लिए किन क्षेत्रों पर जोर दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने विमान डिजाइन, निर्माण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO), नागरिक विमानों का घरेलू उत्पादन और हरित विमानन ईंधन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
भारतीय एयरलाइंस ने कितने विमानों का ऑर्डर दिया है?
प्रधानमंत्री के संबोधन के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस ने हाल ही में 1,500 से अधिक नए विमानों के लिए ऑर्डर दिए हैं, जो क्षेत्र के तेज विकास को दर्शाता है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


