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भारत कंपोनेंट्स ने सेना के लिए विकसित किया सटीक GNSS नेविगेशन सिस्टम

गुरुग्राम स्थित भारत कंपोनेंट्स ने ड्रोन के लिए एक सैन्य-ग्रेड जीएनएसएस नेविगेशन सिस्टम का अनावरण किया है, जिसे रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। यह विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है और महत्वपूर्ण यूएवी घटकों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करता है।

यह स्वदेशी रूप से विकसित जीएनएसएस मॉड्यूल जीपीएस, ग्लोनास, नाविक, गैलीलियो और बेइदोउ सहित कई सैटेलाइट प्रणालियों को एक साथ ट्रैक करने में सक्षम है। यह सुविधा विवादित या संघर्षपूर्ण वातावरण में भी ड्रोन के लिए एक मजबूत और विश्वसनीय नेविगेशन सुनिश्चित करती है, जहाँ विदेशी सिग्नल बाधित हो सकते हैं।

सिस्टम को विशेष रूप से सामरिक अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहाँ सटीकता और सुरक्षा सर्वोपरि है। इसकी तकनीकी क्षमताएँ इसे न केवल रक्षा क्षेत्र के लिए, बल्कि कृषि और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए भी उपयुक्त बनाती हैं।

भारत कंपोनेंट्स का नया जीएनएसएस सिस्टम

गुरुग्राम की कंपनी भारत कंपोनेंट्स ने ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के लिए एक उन्नत जीएनएसएस नेविगेशन सिस्टम पेश किया है। यह एक सैन्य-ग्रेड प्रणाली है जिसे विशेष रूप से रक्षा और रणनीतिक अभियानों की कठोर आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भर बनाना और आयातित प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त करना है।

तकनीकी विशेषताएँ और क्षमताएँ

यह जीएनएसएस मॉड्यूल उच्च अपडेट दरों के साथ काम करता है, जो तेज गति से उड़ने वाले ड्रोन के लिए सहज नेविगेशन प्रदान करता है। इसमें एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग जैसी महत्वपूर्ण सुरक्षा सुविधाएँ हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के खतरों से सिग्नल की रक्षा करती हैं। इसका मजबूत डिज़ाइन इसे -40°C से +85°C तक के तापमान, कृषि धूल और सैन्य-ग्रेड कंपन जैसी चरम स्थितियों में भी काम करने में सक्षम बनाता है। कम बिजली की खपत ड्रोन की उड़ान अवधि को बढ़ाती है, जो लंबी निगरानी या लॉजिस्टिक्स मिशन के लिए महत्वपूर्ण है। 30 सेमी बेसलाइन एंटीना कॉन्फ़िगरेशन के साथ, यह जटिल इलाकों में भी सटीक लक्ष्य ट्रैकिंग की सुविधा देता है।

आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्व

इस सिस्टम का विकास सीधे तौर पर सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल का समर्थन करता है। इसमें भारत की अपनी क्षेत्रीय सैटेलाइट प्रणाली ‘नाविक’ का एकीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यह विदेशी विकल्पों पर निर्भरता को कम करके एक सुरक्षित और विश्वसनीय नेविगेशन समाधान प्रदान करता है, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे जीपीएस-बाधित क्षेत्रों में। यह स्वदेशी तकनीक विदेशी कमजोरियों के बिना वास्तविक समय की खुफिया जानकारी देने में सामरिक टोही मिशनों को बदल सकती है।

विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग

रक्षा क्षेत्र के अलावा, यह जीएनएसएस तकनीक कृषि के लिए भी फायदेमंद है। सटीक नेविगेशन की मदद से कीटनाशकों के छिड़काव को अनुकूलित किया जा सकता है और फसल की निगरानी को बेहतर बनाया जा सकता है। इसके अलावा, औद्योगिक मैपिंग, लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसकी मापनीयता इसे बीएलडीसी मोटर्स और ईएससी के साथ आसानी से एकीकृत करने की अनुमति देती है, जिससे यह विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए एक बहुमुखी समाधान बन जाता है।

स्मार्ट फ्लाइट कंट्रोलर (SFC) के साथ एकीकरण

यह जीएनएसएस सिस्टम भारत कंपोनेंट्स के हाल ही में लॉन्च किए गए ‘भारत एसएफसी स्मार्ट फ्लाइट कंट्रोलर’ के साथ पूरी तरह से संगत है। एसएफसी 6S-14S तक की लिपो बैटरी, जेटसन नैनो जैसे एआई मॉड्यूल, और 4G/5G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। यह PX4 और ArduPilot सॉफ्टवेयर के साथ भी काम करता है। यह एकीकरण ड्रोन निर्माताओं को एक संपूर्ण समाधान प्रदान करता है जो डीजीसीए के मानकों का अनुपालन करता है।

यह जीएनएसएस प्रणाली रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख उदाहरण है। एक भारतीय निजी कंपनी द्वारा विकसित यह तकनीक देश की इंजीनियरिंग और रणनीतिक क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।

FAQs

भारत कंपोनेंट्स द्वारा लॉन्च किया गया नया उत्पाद क्या है?

यह ड्रोन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया एक सैन्य-ग्रेड ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) है।

यह सिस्टम किन सैटेलाइट प्रणालियों को सपोर्ट करता है?

यह सिस्टम जीपीएस, ग्लोनास, नाविक, गैलीलियो और बेइदोउ सहित कई सैटेलाइट प्रणालियों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।

इस जीएनएसएस सिस्टम की मुख्य सुरक्षा विशेषता क्या है?

इसकी मुख्य सुरक्षा विशेषताओं में एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग क्षमताएं शामिल हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के खतरों से संकेतों की रक्षा करती हैं।

यह विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल से कैसे जुड़ा है?

यह महत्वपूर्ण ड्रोन घटकों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करता है और स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का समर्थन करता है।

रक्षा के अलावा इसका उपयोग और कहाँ हो सकता है?

रक्षा के अलावा, इस प्रणाली का उपयोग सटीक कृषि, औद्योगिक मैपिंग, फसल निगरानी और लॉजिस्टिक्स डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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