भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार को अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ। इस साझेदारी से न केवल दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारतीय रक्षा निर्माताओं को यूरोपीय संघ की खरीद प्रणाली “ReArm Europe” तक पहुंच भी प्राप्त होगी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा उपस्थित थे। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि यह साझेदारी रक्षा उद्योग सहयोग में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को गहरा और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि भारत इन यूरोपीय पहलों में भाग लेने पर विचार करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत रक्षा प्लेटफार्मों के निर्माण के लिए एक व्यवहार्य वैकल्पिक देश है, जो यूरोपीय कंपनियों को उनके निवेश का बेहतर मूल्य प्रदान करता है। इस साझेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा, साइबर, अंतरिक्ष सुरक्षा और आतंकवाद-निरोध जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा, जिससे भारतीय रक्षा निर्माताओं को लाभ उठाने के नए अवसर मिलेंगे।
दोनों पक्षों ने एक सूचना साझाकरण समझौते पर बातचीत शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की, जो रक्षा और सुरक्षा मामलों में अधिक संवेदनशील सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह समझौता रूस-यूक्रेन युद्ध पर नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच मतभेदों के बावजूद हुआ है, जो दोनों पक्षों की रणनीतिक रक्षा संबंधों को गहरा करने की मंशा को दर्शाता है।
समझौते के मुख्य बिंदु
यह साझेदारी भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए यूरोपीय संघ के बाजार में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। समझौते का सबसे अहम पहलू “ReArm Europe” पहल के तहत भारतीय रक्षा निर्माताओं को यूरोपीय संघ की रक्षा खरीद प्रणाली तक संभावित पहुंच प्रदान करना है। यह 800 बिलियन यूरो की योजना है जिसका उद्देश्य यूरोपीय सुरक्षा ढांचे में अमेरिका पर निर्भरता कम करना है। इस योजना के तहत, 150 बिलियन यूरो की एक विशिष्ट सुरक्षा कार्रवाई (SAFE) की घोषणा की गई है, जो यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी वाले तीसरे देशों के साथ रक्षा उपकरणों की संयुक्त खरीद की अनुमति देती है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के तहत सहयोग के कई क्षेत्रों का विस्तार किया जाएगा। इनमें समुद्री सुरक्षा, साइबर मुद्दे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती विघटनकारी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हाइब्रिड खतरे, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का संरक्षण, संगठित अपराध से मुकाबला, अप्रसार और निरस्त्रीकरण, और प्रशिक्षण एवं शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतरिक्ष सुरक्षा और अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता सहित अंतरिक्ष से जुड़े विषय भी इस साझेदारी का हिस्सा हैं।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
यह सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भारत की विदेश नीति और रक्षा आधुनिकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यूरोप के देश, विशेष रूप से फ्रांस और जर्मनी, भारत के रक्षा खरीद नेटवर्क के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हाल के वर्षों में, कई यूरोपीय कंपनियों ने भारत में रखरखाव, मरम्मत और संचालन (MRO) सुविधाएं भी स्थापित की हैं। यह साझेदारी भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी बढ़ावा देगी, क्योंकि यह रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर पैदा करेगी। जापान और दक्षिण कोरिया के बाद भारत एशिया का तीसरा देश है जिसने यूरोपीय संघ के साथ ऐसी साझेदारी की है।
शिखर सम्मेलन के अन्य परिणाम
सुरक्षा साझेदारी के अलावा, 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत के समापन की भी घोषणा की। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह समझौता इस कैलेंडर वर्ष के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा, “रक्षा और सुरक्षा किसी भी मजबूत साझेदारी की नींव हैं। आज, हम इसे एक सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के माध्यम से आधिकारिक बना रहे हैं। यह हमें आतंकवाद-निरोध, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर अधिक निकटता से काम करने में मदद करेगा।”
यह समझौता दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक संबंधों में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है, जो रक्षा उद्योग और सुरक्षा मामलों में गहरे सहयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
FAQs
भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा साझेदारी क्या है?
यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक समझौता है जिसका उद्देश्य रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और आतंकवाद-निरोध जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना है।
“ReArm Europe” पहल क्या है?
“ReArm Europe” यूरोपीय संघ की एक 800 बिलियन यूरो की योजना है, जिसका उद्देश्य अमेरिका पर अपनी सुरक्षा निर्भरता को कम करना है। इसके तहत, भागीदार देशों को यूरोपीय संघ की संयुक्त रक्षा खरीद प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है।
इस साझेदारी से भारत को क्या लाभ होगा?
इस साझेदारी से भारतीय रक्षा निर्माताओं को यूरोपीय संघ के रक्षा बाजार तक पहुंच मिलेगी, और रक्षा प्रौद्योगिकी में सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा मिलेगा।
सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?
इस साझेदारी के तहत समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष सुरक्षा, हाइब्रिड खतरों से निपटना, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।
क्या भारत ईयू के साथ ऐसी साझेदारी करने वाला पहला एशियाई देश है?
नहीं, भारत एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया के बाद यूरोपीय संघ के साथ इस तरह की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर करने वाला तीसरा देश है।
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