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बेंगलुरु फिल्म फेस्टिवल में फ़िलिस्तीनी फिल्मों पर क्यों छिड़ा विवाद?

17वें बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (BIFFes) में फ़िलिस्तीनी फिल्मों की स्क्रीनिंग को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर अभिनेता प्रकाश राज और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गए हैं। फिल्म महोत्सव के ब्रांड एंबेसडर प्रकाश राज ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने इस आयोजन में फ़िलिस्तीनी फिल्मों की स्क्रीनिंग को रोका है।

अभिनेता ने 29 जनवरी को महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कला और सिनेमा में राजनीतिक हस्तक्षेप की निंदा की और कर्नाटक की राज्य सरकार से इन फिल्मों की स्क्रीनिंग के समर्थन में एक मजबूत रुख अपनाने का आग्रह किया।

इस आरोप के जवाब में, भाजपा ने प्रकाश राज पर तीखा हमला बोला है। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सी.एन. अश्वथ नारायण ने अभिनेता की आलोचना करते हुए उन्हें ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का हिस्सा बताया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। यह घटनाक्रम महोत्सव की शुरुआत के साथ ही चर्चा का केंद्र बन गया है।

प्रकाश राज का आरोप और मांग

कार्यक्रम में दर्शकों को संबोधित करते हुए, अभिनेता प्रकाश राज ने एक फ़िलिस्तीनी कविता की पंक्तियाँ पढ़ीं, “युद्ध समाप्त होते हैं, नेता हाथ मिलाते हैं और चले जाते हैं, लेकिन बूढ़ी औरत अपने बेटे का इंतजार करती रहती है…”। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा और साहित्य को राजनीतिक एजेंडे से बाधित होने के बजाय मानवीय कहानियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों का उद्देश्य विभिन्न विचारों को साझा करना और मानवीय जुड़ाव के अवसर प्रदान करना है। फिल्म महोत्सव में फ़िलिस्तीनी फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं देना अस्वीकार्य है।” प्रकाश राज ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य सरकार से सीधे अपील की कि वे केंद्र के फैसले का विरोध करें और इन फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति दें, जैसा कि केरल सरकार ने किया है।

विवाद का मूल कारण

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के लिए चुनी गई पांच फ़िलिस्तीनी फिल्मों में से चार को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र की ओर से इन फिल्मों को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद से यह मुद्दा गरमा गया। फिलहाल, कर्नाटक सरकार ने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है कि वह इन फिल्मों की स्क्रीनिंग को लेकर क्या कदम उठाएगी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

प्रकाश राज के आरोपों पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कर्नाटक के पूर्व उपमुख्यमंत्री सी.एन. अश्वथ नारायण ने अभिनेता पर निशाना साधते हुए कहा, “आप जानते हैं कि वह कितने भ्रमित हैं। वह टुकड़े-टुकड़े गैंग से हैं। वह हमारे देश के खिलाफ बोलेंगे। वे जिम्मेदारी से बात नहीं करते। ऐसे लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।” उन्होंने प्रकाश राज के बयानों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के बारे में

बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव कर्नाटक सरकार के लिए कर्नाटक चलचित्र अकादमी द्वारा आयोजित एक प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन है। इस वर्ष महोत्सव में दुनिया भर की 300 से अधिक फिल्में, महिला निर्देशकों द्वारा निर्देशित 60 फिल्में और वैश्विक फिल्म समारोहों से 100 से अधिक पुरस्कार विजेता फिल्में दिखाई जा रही हैं। यह महोत्सव सिनेमा प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।

यह महोत्सव 30 जनवरी से 6 फरवरी तक बेंगलुरु के कई स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मैजेस्टिक के पास लुलु मॉल में सिनेपोलिस, बनशंकरी में सुचित्रा फिल्म सोसाइटी और चामराजपेट में कन्नड़ फिल्म आर्टिस्ट्स एसोसिएशन शामिल हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव कला और सिनेमा की विविधता का जश्न मना रहा है। केंद्र सरकार के फैसले और उस पर प्रकाश राज तथा भाजपा के बीच हुई बयानबाजी ने इस आयोजन को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

FAQs

विवाद किस फिल्म महोत्सव में हुआ?

यह विवाद 17वें बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (BIFFes) में हुआ है।

अभिनेता प्रकाश राज ने क्या आरोप लगाया?

अभिनेता प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने महोत्सव में फ़िलिस्तीनी फिल्मों की स्क्रीनिंग को रोका है।

कितनी फ़िलिस्तीनी फिल्मों को मंजूरी नहीं मिली?

महोत्सव के लिए चुनी गई पांच में से चार फ़िलिस्तीनी फिल्मों को केंद्र सरकार से स्क्रीनिंग की मंजूरी नहीं मिली।

भाजपा नेता ने प्रकाश राज पर क्या टिप्पणी की?

भाजपा नेता सी.एन. अश्वथ नारायण ने प्रकाश राज को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का हिस्सा बताया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

BIFFes कब से कब तक आयोजित हो रहा है?

बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 30 जनवरी से 6 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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