भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहली बार, व्यक्तिगत आयकर से होने वाली वसूली कॉर्पोरेट कर संग्रह से आगे निकल गई है। यह महत्वपूर्ण विकास ऐसे समय में हुआ है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने की तैयारी कर रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा।
यह बदलाव भारत की कर संरचना में एक नए चलन का संकेत देता है। अगस्त 2025 में जारी जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संरचनात्मक परिवर्तन के पीछे अर्थव्यवस्था का अधिक औपचारिक होना, मजबूत डिजिटल ट्रैकिंग और कर अनुपालन में वृद्धि मुख्य कारण हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से वेतनभोगी करदाताओं और उन लोगों के बीच अनुपालन बढ़ने का उल्लेख किया गया है जिनकी आय को सिस्टम के माध्यम से ट्रैक करना आसान है।
यह नया चलन बजट की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि सरकार 1 अप्रैल, 2026 से एक नया, सरल आयकर अधिनियम भी लागू करने जा रही है। इस नए अधिनियम का उद्देश्य छह दशक पुराने कानून को बदलना और कर प्रणाली को सुगम बनाना है।
प्रत्यक्ष कर संरचना में बड़ा बदलाव
प्रत्यक्ष कर वह कर है जो व्यक्ति या संस्था द्वारा सीधे सरकार को भुगतान किया जाता है। भारत में, इसके दो सबसे बड़े घटक व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट कर हैं। व्यक्तिगत आयकर व्यक्तियों द्वारा वेतन और अन्य आय पर चुकाया जाता है, जबकि कॉर्पोरेट कर कंपनियों द्वारा अपने मुनाफे पर दिया जाता है।
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, कुल प्रत्यक्ष करों में आयकर की हिस्सेदारी समय के साथ बढ़ी है। वर्ष 2000-01 में यह 47 प्रतिशत थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2025 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह ने पहली बार कॉर्पोरेट कर संग्रह को पार कर लिया, जो इस बदलाव का स्पष्ट प्रमाण है।
व्यक्तिगत आयकर संग्रह में वृद्धि के कारण
व्यक्तिगत आयकर संग्रह में वृद्धि का सबसे प्रमुख कारण वेतनभोगी और औपचारिक रूप से घोषित आय में वृद्धि है। जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, घोषित वेतन वित्त वर्ष 2014 के 9.8 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 35.2 ट्रिलियन रुपये हो गया। इसी अवधि में, व्यक्तिगत कर संग्रह 2.4 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर 8.3 ट्रिलियन रुपये हो गया।
इस वृद्धि में दो प्रमुख तंत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
स्रोत पर कर कटौती (TDS): यह एक ऐसी प्रणाली है जहां करदाता तक पैसा पहुंचने से पहले ही कर काट लिया जाता है। TDS संग्रह वित्त वर्ष 2014 के 2.5 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 6.5 ट्रिलियन रुपये हो गया।
अग्रिम कर (Advance Tax): यह उन करदाताओं द्वारा वर्ष के दौरान किस्तों में चुकाया जाता है जिनकी अनुमानित कर देनदारी एक निश्चित सीमा से अधिक होती है। अग्रिम कर भुगतान वित्त वर्ष 2014 के 2.9 ट्रिलियन रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 12.8 ट्रिलियन रुपये हो गया।
TDS और अग्रिम कर मिलकर अब भारत के कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह में आधे से अधिक का योगदान करते हैं।
आयकरदाताओं की संख्या
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च का अनुमान है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले व्यक्तियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन देश की आबादी के मुकाबले यह आधार अभी भी छोटा है। व्यक्तिगत रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 2013-14 में जनसंख्या का लगभग 2 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में बढ़कर लगभग 6 प्रतिशत हो गई।
हालांकि, रिटर्न दाखिल करने वाले सभी लोग कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 में, 63 प्रतिशत व्यक्तिगत फाइलर्स की कर देनदारी शून्य थी। इसका मतलब है कि प्रत्यक्ष कर का बोझ अभी भी लगातार भुगतान करने वाले एक छोटे समूह, विशेष रूप से वेतनभोगी करदाताओं पर केंद्रित है।
नया आयकर अधिनियम, 2025
पिछले साल अगस्त में लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 पेश किया गया था, जिसे संसद के मानसून सत्र के दौरान पारित कर दिया गया। यह नया कानून 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है और यह छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। इसका उद्देश्य कानून को सरल और सुगम बनाना है।
यह अधिनियम राजस्व-तटस्थ है, जिसका अर्थ है कि यह कर की दरों को नहीं बदलता है। इसने कानून के समग्र आकार को लगभग आधा कर दिया है और पुराने हो चुके प्रावधानों को हटा दिया है। सबसे बड़े सरलीकरणों में से एक “पिछले वर्ष” और “निर्धारण वर्ष” के बीच के अंतर को समाप्त करते हुए एकल “कर वर्ष” प्रणाली की ओर बढ़ना है। इसमें करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने वाले बदलाव भी शामिल हैं, जैसे कि समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर भी बिना अतिरिक्त दंड के TDS रिफंड को सक्षम करना।
संक्षेप में, भारत की कर प्रणाली एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां व्यक्तिगत आयकर अब कॉर्पोरेट कर से अधिक राजस्व उत्पन्न कर रहा है। यह आगामी बजट और नए आयकर अधिनियम के लागू होने के साथ देश की वित्तीय दिशा को प्रभावित करेगा।
FAQs
भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह में मुख्य बदलाव क्या है?
मुख्य बदलाव यह है कि 2025 में पहली बार व्यक्तिगत आयकर संग्रह कॉर्पोरेट कर संग्रह से अधिक हो गया है। यह अर्थव्यवस्था के औपचारिकता, बेहतर ट्रैकिंग और बढ़े हुए अनुपालन को दर्शाता है।
प्रत्यक्ष कर क्या है?
प्रत्यक्ष कर वह कर है जो किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा अपनी आय या लाभ पर सीधे सरकार को भुगतान किया जाता है। भारत में व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट कर इसके मुख्य उदाहरण हैं।
नया आयकर अधिनियम, 2025 कब लागू होगा?
नया आयकर अधिनियम, 2025, जो पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा, 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य कर कानूनों को सरल बनाना है।
भारत में कितने लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं?
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, 2023-24 में भारत की लगभग 6 प्रतिशत आबादी ने आयकर रिटर्न दाखिल किया। हालांकि, इनमें से एक बड़े हिस्से की कर देनदारी शून्य थी।
व्यक्तिगत आयकर संग्रह क्यों बढ़ रहा है?
इसके बढ़ने के मुख्य कारण वेतनभोगी आय में वृद्धि, स्रोत पर कर कटौती (TDS) और अग्रिम कर (Advance Tax) के माध्यम से बेहतर संग्रह हैं। इन दोनों तंत्रों का कुल प्रत्यक्ष कर में आधे से अधिक का योगदान है।
यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।


