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बंगाल में अल्पसंख्यक मोर्चा बनाने की कवायद तेज, क्या बढ़ेंगी TMC की मुश्किलें?

आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच, राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। मुर्शिदाबाद जिले में एक निलंबित तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक द्वारा एक नई बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति का निर्माण शुरू किया गया है, जो अल्पसंख्यक वोटों को लेकर एक नई बहस छेड़ रहा है। यह कदम एक ऐसे समय में आया है जब कई छोटे दल TMC और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ एक नया मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) बनाई है और वह आगामी विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी पर अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया है। इसी दौरान, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी TMC और BJP के खिलाफ एक गठबंधन बनाने का आह्वान किया है, जिसका कबीर ने समर्थन किया है।

यह राजनीतिक हलचल विशेष रूप से उन जिलों में हो रही है जहाँ मुस्लिम आबादी काफी है, जैसे कि मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर। 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में 27% मुस्लिम हैं, और यह समुदाय 2011 से TMC की लगातार जीत में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है। अब इस नए मोर्चे के उभरने से TMC के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने की संभावना बन रही है।

हालांकि, TMC का प्रभाव अभी भी काफी मजबूत है, खासकर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में, जहाँ पार्टी ने पिछले चुनावों में अपने वोट शेयर में लगातार वृद्धि की है। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर मुखर होकर और अन्य राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासियों की हिरासत का विरोध करके खुद को अल्पसंख्यकों के हितैषी के रूप में स्थापित किया है।

नई बाबरी मस्जिद का निर्माण स्थल

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बेलडांगा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर, पुलिस बैरिकेड्स से घिरी एक जमीन पर नई बाबरी मस्जिद के निर्माण की तैयारी चल रही है। इस स्थल पर लाल ईंटों का ढेर, एक अस्थायी मंच और एक बैनर लगा है, जिस पर इसे नई बाबरी मस्जिद का स्थल घोषित किया गया है। यह प्रतिकृति निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बनवाई जा रही है। निर्माण स्थल के आसपास एक दर्जन से अधिक अस्थायी दुकानें लगी हैं, जहाँ अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तस्वीरों वाली टी-शर्ट और मग जैसी चीजें बेची जा रही हैं।

नए राजनीतिक मोर्चे का उदय

हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीतिक पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) का गठन किया है और बंगाल में मुसलमानों से एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं। दूसरी ओर, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने 17 जनवरी को TMC और BJP दोनों के खिलाफ एक गठबंधन बनाने की बात कही थी। सिद्दीकी विधानसभा में एकमात्र ऐसे विधायक हैं जो TMC या BJP से नहीं हैं। उनका संबंध हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ दरगाह से है। दोनों दलों के सूत्रों के अनुसार, चुनाव के लिए एक साथ आने के प्रयास चल रहे हैं। इस गठबंधन की बातचीत में केरल स्थित SDPI जैसे अन्य छोटे संगठन भी शामिल हैं, जो प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की राजनीतिक शाखा है।

गठबंधन के लिए बातचीत और प्रस्ताव

जनता उन्नयन पार्टी (JUP) ने वाम मोर्चा और कांग्रेस को भी गठबंधन के लिए प्रस्ताव भेजे हैं और उनके जवाब का इंतजार कर रही है। हुमायूं कबीर ने हाल ही में कहा कि अगर कांग्रेस जल्द ही कोई जवाब नहीं देती है, तो प्रस्तावित गठबंधन मालदा में उसके बिना ही आगे बढ़ेगा। इसके अलावा, उन जिलों में भी पैठ बनाने की कोशिशों पर चर्चा हुई है, जहां मुस्लिम आबादी बहुत अधिक नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस का अल्पसंख्यक वोट बैंक

2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में 27% मुस्लिम आबादी है, जो TMC के प्रभुत्व का एक बड़ा कारण रही है। मालदा और मुर्शिदाबाद, जहां कुल 34 विधानसभा सीटें हैं, में से 28 सीटें वर्तमान में TMC के पास हैं। आंकड़ों के अनुसार, मालदा में TMC का वोट शेयर 2011 में 8% से बढ़कर 2021 में 53% हो गया। इसी तरह, मुर्शिदाबाद में यह 2011 में 6% से बढ़कर 2021 में 54% हो गया। उत्तर दिनाजपुर में भी 2021 के चुनावों में TMC ने चार सीटें जीती थीं।

अल्पसंख्यक समुदाय में असंतोष के कारण

हाल के कुछ घटनाक्रमों ने अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग में TMC सरकार के प्रति कुछ असंतोष पैदा किया है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची से 37 समूहों को हटाने और 34 अन्य अल्पसंख्यक समूहों के पुनर्वर्गीकरण के खिलाफ मुस्लिम युवाओं के विरोध के बाद, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग ने 7 जनवरी को एक नया सर्वेक्षण करने की घोषणा की। इसके अलावा, संशोधित वक्फ कानून को लागू करने के सरकार के फैसले से भी कुछ लोग नाखुश थे। TMC की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर की कांग्रेस में वापसी को भी मालदा में TMC के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि TMC का अल्पसंख्यक वोटों पर दबदबा अभी भी मजबूत है और ममता बनर्जी को BJP को सत्ता से बाहर रखने के लिए सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है, लेकिन अल्पसंख्यक केंद्रित नए मोर्चे के गठन से सत्तारूढ़ दल को अपने प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है।

FAQs

पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद कौन बनवा रहा है?

पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति का निर्माण निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा करवाया जा रहा है।

हुमायूं कबीर की नई पार्टी का क्या नाम है?

हुमायूं कबीर द्वारा बनाई गई नई राजनीतिक पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (JUP) है।

कौन सी पार्टियां TMC और BJP के खिलाफ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही हैं?

इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF), जनता उन्नयन पार्टी (JUP) और SDPI जैसे कई छोटे दल TMC और BJP के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की जनसंख्या में मुस्लिम समुदाय का कितना प्रतिशत है?

2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय का हिस्सा 27 प्रतिशत है।

मालदा और मुर्शिदाबाद में TMC का वोट शेयर कितना बढ़ा है?

मालदा में TMC का वोट शेयर 2011 में 8% से बढ़कर 2021 में 53% हो गया, जबकि मुर्शिदाबाद में यह 2011 के 6% से बढ़कर 2021 में 54% हो गया।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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