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पूर्वी कोलकाता वेटलैंड्स आग: अतिक्रमण पर पर्यावरणविदों ने मांगी जांच

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स में कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर कई पर्यावरण संगठनों ने शुक्रवार को गहन जांच की मांग की है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय महत्व की एक रामसर-सूचीबद्ध आर्द्रभूमि है, जिसके कुछ हिस्सों में अवैध गतिविधियों के आरोप लगे हैं। यह मांग हाल ही में कोलकाता के दक्षिणी किनारे पर स्थित आनंदपुर इलाके के नाजिराबाद में दो गोदामों में भीषण आग लगने की घटना के बाद उठाई गई है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी।

आरोप है कि ये गोदाम रामसर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके बनाए गए थे। पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाले कई समूहों ने मिलकर यह मुद्दा उठाया है, जिनमें সবুজ মঞ্চ, प्रयास, बसुंधरा, कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी और ईस्ट कोलकाता फिशरीज एसोसिएशन जैसे संगठन शामिल हैं। इन संगठनों ने ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स मैनेजमेंट अथॉरिटी (EKWMA) को एक पत्र भेजकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स को 19 अगस्त 2002 में रामसर साइट का दर्जा दिया गया था। रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके सतत उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। यह वेटलैंड्स कोलकाता के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह शहर के एक बड़े हिस्से के अपशिष्ट जल का प्राकृतिक रूप से उपचार करता है और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे यह शहर का एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र बन जाता है।

विवाद का तात्कालिक कारण

इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब 26 जनवरी को नाजिराबाद के दो गोदामों में भीषण आग लग गई। पर्यावरणविदों का कहना है कि नाजिराबाद का इलाका ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स के संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। সবুজ মঞ্চ से जुड़े पर्यावरणविद नबा दत्ता के अनुसार, इस क्षेत्र में जल निकायों को धीरे-धीरे निर्माण क्षेत्रों में बदल दिया गया है, जिससे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

पर्यावरण समूहों की प्रमुख मांगें

सेव रबीन्द्र सरोबर फोरम के सोमेंद्र मोहन घोष ने बताया कि ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स मैनेजमेंट अथॉरिटी को एक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यह वेटलैंड्स रामसर कन्वेंशन के तहत संरक्षित है और यहां बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण और अतिक्रमण अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन है। पर्यावरण समूहों ने अधिकारियों से कथित अतिक्रमण, नक्शों में विसंगतियों और पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन की एक स्वतंत्र जांच करने का आग्रह किया है।

लगाए गए गंभीर आरोप

कार्यकर्ताओं द्वारा भेजे गए पत्र में नाजिराबाद रोड के चौड़ीकरण पर भी चिंता जताई गई है। आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण आनंदपुर नहर का लगभग सात किलोमीटर का हिस्सा संकरा हो गया है, जो रामसर-संरक्षित वेटलैंड्स प्रणाली का हिस्सा है। घोष ने दावा किया कि नहर को धीरे-धीरे सड़कों, गोदामों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों सहित निर्मित क्षेत्रों में बदल दिया गया है। उन्होंने आधिकारिक EKW नक्शों में गुलशन कॉलोनी और नाजिराबाद जैसे क्षेत्रों के नामकरण में गंभीर विसंगतियों का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि नाम बदलकर रामसर-निर्दिष्ट क्षेत्रों में कुछ मानव बस्तियों और वाणिज्यिक क्षेत्रों को बसाया गया है।

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स का महत्व

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स कोलकाता के पूर्वी किनारे पर स्थित आर्द्रभूमि, मछली तालाबों, नहरों और कृषि भूमि का एक विशाल और जटिल नेटवर्क है। यह न केवल लाखों लोगों की आजीविका का स्रोत है, बल्कि यह कोलकाता के सीवेज के पानी को प्राकृतिक रूप से साफ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रणाली शहर के लिए एक प्राकृतिक स्पंज के रूप में भी काम करती है, जो मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी सोखकर बाढ़ को रोकने में मदद करती है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि अनियंत्रित शहरी विस्तार इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन गया है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

इस रिपोर्ट के दाखिल होने तक EKWMA की ओर से इन बिंदुओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। हाल ही में आग से प्रभावित नाजिराबाद के दौरे के दौरान, कोलकाता के मेयर और शहरी मामलों और नगरपालिका विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, “वेटलैंड्स को अवैध रूप से भरने के सभी काम वाम मोर्चा शासन के दौरान हुए थे। टीएमसी ने बंगाल में अपने 12 साल के कार्यकाल के दौरान जल निकाय को बचाने के लिए काम किया है।” वहीं, सीपीआई नेता सतरूप घोष ने हकीम को अपने दावे के सबूत के साथ आने की चुनौती दी और आरोप लगाया कि सभी अवैध काम टीएमसी के शासनकाल में हुए हैं।

पर्यावरण समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि वेटलैंड्स का क्षरण जारी रहा, तो कोलकाता और इसके आसपास के क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पारिस्थितिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से एक पारदर्शी रिपोर्ट की मांग की है कि रामसर साइट के भीतर इलाकों के नाम कैसे बदले गए और इन परिवर्तनों को किसने अधिकृत किया।

FAQs

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स क्या है?

यह कोलकाता के पूर्वी किनारे पर स्थित प्राकृतिक और मानव निर्मित आर्द्रभूमि का एक नेटवर्क है, जो शहर के अपशिष्ट जल उपचार और बाढ़ नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।

इसे रामसर साइट क्यों कहा जाता है?

इसे रामसर कन्वेंशन के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जो आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। यह इसके अंतरराष्ट्रीय महत्व को मान्यता देता है।

पर्यावरणविद जांच की मांग क्यों कर रहे हैं?

वे इस संरक्षित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में अवैध रूप से बने गोदामों में लगी घातक आग ने इस मुद्दे को उजागर किया है।

मुख्य आरोप क्या हैं?

मुख्य आरोपों में जल निकायों का अवैध रूपांतरण, सड़क निर्माण के लिए नहरों को संकरा करना और अवैध बस्तियों को छिपाने के लिए आधिकारिक नक्शों में हेरफेर शामिल है।

इस मामले पर सरकार का क्या कहना है?

ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स मैनेजमेंट अथॉरिटी ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, कोलकाता के मेयर ने पिछली वाम मोर्चा सरकार को दोषी ठहराया है, जबकि सीपीआई नेता ने इस दावे का खंडन किया है।

यह जानकारी केवल सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।

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